Business शुरू करने के लिए शुभ मुहूर्त कैसे चुनें?

Business शुरू करने के लिए शुभ मुहूर्त कैसे चुनें?
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अगर आप कोई नया काम शुरू करने वाले हैं, तो शायद किसी बड़े-बुजुर्ग ने एक बार जरूर कहा होगा, "बेटा, पहले मुहूर्त देख लो।

" यह बात सुनने में पुरानी लग सकती है, लेकिन भारत में करोड़ों लोग आज भी व्यवसाय, दुकान, या कोई नया प्रोजेक्ट शुरू करने से पहले शुभ मुहूर्त देखते हैं।

यह परंपरा सदियों पुरानी है। और इसके पीछे सिर्फ धार्मिक आस्था नहीं है, बल्कि एक पूरा ज्योतिषीय ढांचा है।

'जो पंचांग, ग्रहों की स्थिति, तिथि, नक्षत्र और वार को मिलाकर बनता है।

तो सवाल यह है कि आप खुद कैसे जान सकते हैं कि कौन सा समय व्यवसाय शुरू करने के लिए ठीक माना जाता है?

मुहूर्त क्या होता है और इसे क्यों देखा जाता है?

"मुहूर्त" शब्द संस्कृत से आया है। पारंपरिक रूप से एक दिन को 30 मुहूर्तों में बांटा जाता है, जिसमें हर मुहूर्त लगभग 48 मिनट का होता है।

कई लोग मानते हैं कि जब कोई काम सही समय पर शुरू किया जाए, तो उसमें रुकावटें कम आती हैं और मन भी शांत रहता है।

यह विचार भारतीय ज्योतिष और वैदिक परंपरा का हिस्सा है।

कई लोग इसे पारंपरिक सांस्कृतिक विश्वास के रूप में देखते हैं, और इसे पूर्ण वैज्ञानिक सत्य कहना भी ठीक नहीं।

यह एक सांस्कृतिक विश्वास है जो पीढ़ियों से चला आ रहा है।

व्यवसाय के लिए मुहूर्त देखते समय मुख्य रूप से पाँच चीजें देखी जाती हैं: तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण। इन्हें मिलाकर ही पंचांग बनता है।

पंचांग से मुहूर्त कैसे निकाला जाता है?

पंचांग हिंदू कालगणना का आधार है। अगर आप किसी ज्योतिषी के पास नहीं जाना चाहते, तो खुद पंचांग पढ़कर भी एक अनुमानित शुभ समय निकाल सकते हैं।

पंचांग में हर दिन के लिए तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण लिखे होते हैं। इनमें से हर एक का अपना असर माना जाता है।

पंचांग की विश्वसनीय जानकारी के लिए  drikpanchang.com जैसी साइट देखी जा सकती है, जो हर दिन का पंचांग हिंदी में उपलब्ध कराती है।

व्यवसाय के लिए कौन सी तिथियाँ अच्छी मानी जाती हैं?

तिथि यानी चंद्र दिवस। महीने में 30 तिथियाँ होती हैं। इनमें से कुछ को व्यवसाय शुरू करने के लिए अनुकूल माना जाता है।

 व्यवसाय के लिए तिथि चार्ट
काफी शुभ मानी जाने वाली तिथियाँ
द्वितीया (2)
शुक्ल पक्ष में उपयुक्त
तृतीया (3)
नई शुरुआत के लिए
पंचमी (5)
व्यापार के लिए माना जाता है
सप्तमी (7)
कई पंचांगों में शुभ
दशमी (10)
व्यवसाय वृद्धि हेतु
एकादशी (11)
काफी शुभ मानी जाती है
आमतौर पर टाली जाने वाली तिथियाँ
अमावस्या (30)
नए काम से बचें
चतुर्दशी (14)
आमतौर पर अशुभ मानते हैं
अष्टमी (8)
कृष्ण पक्ष में सावधानी
षष्ठी (6)
कुछ मान्यताओं में टाला जाता है

वार यानी दिन का चुनाव

हर दिन एक ग्रह का प्रभाव माना जाता है। व्यवसाय के लिए दिन का चुनाव करते वक्त यह भी देखा जाता है।

सोमवार: चंद्रमा का दिन। छोटे व्यवसाय और खाद्य से जुड़े काम के लिए ठीक माना जाता है।

बुधवार: बुध का दिन। व्यापार, संचार और बुद्धि से जुड़े कामों के लिए काफी अनुकूल माना जाता है।

गुरुवार: बृहस्पति का दिन। शिक्षा, सलाह और विस्तार वाले व्यवसाय के लिए पारंपरिक रूप से शुभ माना जाता है।

शुक्रवार: शुक्र का दिन। कला, सौंदर्य, फैशन और कपड़े के व्यवसाय के लिए उपयुक्त।

मंगलवार और शनिवार: इन्हें आमतौर पर नए व्यवसाय की शुरुआत के लिए टाला जाता है, हालांकि यह मान्यताएं अलग-अलग क्षेत्रों में भिन्न हो सकती हैं।

नक्षत्र और उनका असर

27 नक्षत्र होते हैं। इनमें से कुछ को व्यवसाय के लिए काफी उपयुक्त माना जाता है।

रोहिणी, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, हस्त, चित्रा, स्वाति, अनुराधा और रेवती नक्षत्रों को व्यवसाय शुरू करने के लिए आमतौर पर अनुकूल माना जाता है।

पुष्य नक्षत्र को खासतौर पर व्यापार के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है। कई व्यापारी परिवार आज भी दुकान या नया काम शुरू करने के लिए इसी नक्षत्र का इंतजार करते हैं।

चौघड़िया से दैनिक शुभ समय निकालें

चौघड़िया से दैनिक शुभ समय निकालें

अगर आपके पास पूरे पंचांग की जानकारी नहीं है, तो चौघड़िया एक सरल तरीका है। यह दिन और रात को 8-8 भागों में बांटता है। हर भाग लगभग डेढ़ घंटे का होता है।

 चौघड़िया शुभ और अशुभ समय
शुभ चौघड़िया
अमृत
चंद्रमा — काफी शुभ माना जाता है
शुभ
बृहस्पति — काफी अनुकूल
लाभ
बुध — व्यापार के लिए ठीक
चर
शुक्र — यात्रा व्यवसाय हेतु
सामान्यतः टाले जाने वाले चौघड़िया
काल
शनि — नए काम के लिए नहीं
उद्वेग
सूर्य — शुरुआत के लिए अनुकूल नहीं
रोग
मंगल — नई शुरुआत में सावधानी

चौघड़िया जानने का सबसे आसान तरीका यह है कि उस दिन का वार देखें। उदाहरण के लिए, बुधवार को सुबह का पहला चौघड़िया "लाभ" से शुरू होता है जो व्यवसाय के लिए ठीक माना जाता है। हर वार की शुरुआत अलग चौघड़िया से होती है।

राहुकाल से बचाव जरूरी है

राहुकाल हर दिन लगभग डेढ़ घंटे का होता है। इसे नए काम शुरू करने के लिए आमतौर पर उचित नहीं माना जाता।

हर वार का राहुकाल अलग समय पर आता है। सोमवार को सुबह 7:30 से 9:00, मंगलवार को दोपहर 3:00 से 4:30, बुधवार को दोपहर 12:00 से 1:30, गुरुवार को दोपहर 1:30 से 3:00, शुक्रवार को सुबह 10:30 से 12:00, शनिवार को सुबह 9:00 से 10:30, और रविवार को शाम 4:30 से 6:00 बजे तक माना जाता है।

ये समय अनुमानित हैं और सूर्योदय के आधार पर थोड़े बदल सकते हैं। सटीक समय के लिए उस दिन का पंचांग देखना बेहतर है।

मुहूर्त चुनते समय किन बातों का ध्यान रखें?

मुहूर्त चुनते समय किन बातों का ध्यान रखें?

कुछ लोग सोचते हैं कि बस एक अच्छा दिन देखा और काम शुरू कर दिया। लेकिन पारंपरिक मुहूर्त निकालने में कई चीजें एक साथ मिलती हैं।

पहला: अपनी कुंडली में लग्न देखें। अगर किसी ज्योतिषी से मिल रहे हैं, तो वे लग्न के आधार पर व्यक्तिगत मुहूर्त निकालते हैं।

दूसरा: शुक्ल पक्ष को प्राथमिकता दी जाती है। चंद्रमा जब बढ़ रहा हो, उस समय को नई शुरुआत के लिए उपयुक्त माना जाता है।

तीसरा: व्यापार की प्रकृति देखें। कपड़े का व्यवसाय और दवाई का व्यवसाय एक जैसा मुहूर्त नहीं माँगते। ज्योतिष में हर व्यवसाय के लिए अलग ग्रह और नक्षत्र की भूमिका होती है।

चौथा: गृह प्रवेश, नाम रखना और पूजा का समय अलग से तय किए जाते हैं। मुहूर्त सिर्फ पहले लेन-देन या दुकान खोलने के लिए नहीं होता।

सर्वार्थ सिद्धि योग और अभिजित मुहूर्त

ये दो योग खास हैं और इन्हें समझना आसान है।

सर्वार्थ सिद्धि योग तब बनता है जब वार और नक्षत्र का एक खास मेल होता है। जैसे रविवार को हस्त नक्षत्र, सोमवार को श्रवण नक्षत्र, बुधवार को अनुराधा नक्षत्र। इस योग में किया गया क  कई लोग इसे अनुकूल योग मानते हैं , ऐसा पारंपरिक मान्यताओं में कहा गया है।

अभिजित मुहूर्त दोपहर के समय लगभग 20-24 मिनट का होता है, आमतौर पर दोपहर 11:36 से 12:24 के बीच। इसे तत्काल शुभ काम के लिए उपयोगी माना जाता है। खासकर जब पूरा पंचांग अनुकूल न हो।

कुछ खास दिन जो व्यवसाय के लिए काफी उपयुक्त माने जाते हैं

साल में कुछ ऐसे दिन आते हैं जिन्हें व्यवसाय शुरू करने या दुकान खोलने के लिए परंपरागत रूप से अच्छा माना जाता है।

धनतेरस: इस दिन नई दुकान खोलना या व्यापार शुरू करना काफी शुभ माना जाता है। कई व्यापारी इसी दिन नया हिसाब-किताब शुरू करते हैं।

अक्षय तृतीया: वैशाख शुक्ल तृतीया को अक्षय तृतीया कहा जाता है। इसे  पारंपरिक रूप से शुभ माना जाने वाला समय, माना जाता है यानी अलग से मुहूर्त देखने की जरूरत नहीं।

गुड़ी पड़वा: नए साल की शुरुआत के तौर पर कई क्षेत्रों में नया व्यवसाय इसी दिन खोला जाता है।

विजयादशमी (दशहरा): इस दिन नया काम शुरू करना शुभ माना जाता है, खासकर दक्षिण और पश्चिम भारत में।

ज्योतिषी से कब और कैसे मिलें?

अगर आपका व्यवसाय बड़ा है, जैसे कारखाना, बड़ी दुकान, या कोई नया प्रोजेक्ट, तो किसी अनुभवी ज्योतिषी से मिलना समझदारी हो सकती है।

वे आपकी जन्म पत्रिका, व्यवसाय की प्रकृति और वर्तमान ग्रह दशा देखकर ज्यादा व्यक्तिगत सुझाव दे सकते हैं।

लेकिन किसी पर भी आँख मूंदकर भरोसा न करें। एक अच्छा ज्योतिषी वह होता है जो आपको विकल्प दे, डर न दिखाए।

अगर कोई कहता है कि "इस तारीख के बाद काम शुरू किया तो  अनावश्यक डर पैदा करने वाली बातें," तो यह ठीक नहीं है।

ज्योतिष एक परंपरागत ज्ञान है जो मार्गदर्शन देता है, लेकिन अंतिम फैसला आपकी तैयारी, मेहनत और समझदारी पर टिका होता है।

व्यवसाय के प्रकार के अनुसार ग्रह और मुहूर्त

 व्यवसाय और उपयुक्त ग्रह/वार
शिक्षा/कोचिंग
गुरुवार, बृहस्पति
कपड़े/फैशन
शुक्रवार, शुक्र
IT/तकनीक
बुधवार, बुध
खाद्य/रेस्तरां
सोमवार, चंद्रमा
निर्माण/ठेका
मंगलवार, मंगल
सरकारी काम
रविवार, सूर्य

एक छोटा व्यावहारिक उदाहरण

मान लीजिए आप अगले महीने एक किराने की दुकान खोलना चाहते हैं।

पहले शुक्ल पक्ष का कोई बुधवार या गुरुवार चुनें। उस दिन का पंचांग देखें। अगर पुष्य, हस्त या अनुराधा नक्षत्र है। 

तो और अच्छा। चौघड़िया में "अमृत" या "शुभ" समय पर दुकान का पहला द्वार खोलें।

राहुकाल से बचें। इतना करने के बाद कई लोग मानते हैं कि इससे मानसिक संतुलन और आत्मविश्वास बना रहता है।

FAQ

क्या बिना मुहूर्त देखे व्यवसाय शुरू करना ठीक नहीं है?

ऐसा नहीं है। मुहूर्त एक सांस्कृतिक और पारंपरिक विश्वास है। कई सफल व्यापारियों ने बिना किसी खास तिथि के काम शुरू किया है। मुहूर्त से मानसिक शांति और आत्मविश्वास मिलता है, यह ज्यादातर लोग इसीलिए मानते हैं।

पुष्य नक्षत्र को इतना खास क्यों माना जाता है?

पुष्य नक्षत्र को पारंपरिक रूप से स्थिरता और वृद्धि से जोड़कर देखा जाता है। परंपरागत रूप से इसे स्थिरता और वृद्धि का प्रतीक माना गया है। इसीलिए व्यापारी परिवारों में इस नक्षत्र को व्यवसाय, खरीदारी और नई शुरुआत के लिए उपयुक्त माना जाता है।

अगर मेरे लिए कोई शुभ मुहूर्त नहीं मिल रहा तो क्या करूँ?

अभिजित मुहूर्त एक ऐसा विकल्प है जो लगभग हर दिन उपलब्ध होता है। यह दोपहर में करीब 24 मिनट का होता है। इसके अलावा सर्वार्थ सिद्धि योग भी देखा जा सकता है। और अगर कुछ न बने तो किसी ज्योतिषी से परामर्श लें।

क्या ऑनलाइन पंचांग पर भरोसा किया जा सकता है?

हाँ,  drikpanchang.com जैसी साइट  विस्तृत पंचांग जानकारी उपलब्ध कराती है। आप वहाँ तिथि, नक्षत्र, चौघड़िया और राहुकाल सब देख सकते हैं। बस अपना शहर जरूर चुनें क्योंकि सूर्योदय के हिसाब से समय बदलता है।

क्या मुहूर्त देखना हर धर्म में होता है?

हिंदू परंपरा में यह सबसे ज्यादा प्रचलित है। जैन परंपरा में भी शुभ समय का ध्यान रखा जाता है, हालांकि उनका तरीका थोड़ा अलग होता है। बौद्ध और सिख परंपराओं में इस तरह का मुहूर्त उतना प्रचलित नहीं है। यह मुख्यतः व्यक्तिगत आस्था और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि पर निर्भर करता है।

अस्वीकरण: यह लेख पूरी तरह पारंपरिक मान्यताओं, सांस्कृतिक विश्वासों और सामान्य जानकारी पर आधारित है। इसे किसी वित्तीय, कानूनी या चिकित्सीय सलाह के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए। व्यवसायिक निर्णय लेने से पहले अपने विवेक और किसी योग्य सलाहकार का मार्गदर्शन जरूर लें।

यह लेख साझें

Shiv Kumar Pandit

Shiv Kumar Pandit

सत्यापित
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मैं, शिव कुमार पंडित, इस प्लेटफ़ॉर्म का Co-Founder और वरिष्ठ कंटेंट रिसर्चर हूं। मुझे भारतीय संस्कृति, शुभ मुहूर्त, चोघड़िया, पंचांग और पारंपरिक ज्ञान से जुड़े विषयों पर रिसर्च करना और सरल भाषा में जानकारी साझा करना पसंद है, ताकि हर पाठक आसानी से सही जानकारी समझ सके।

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