इस महीने दो बार चतुर्दशी तिथि पड़ रही है। पहली कृष्ण पक्ष चतुर्दशी 13 जून 2026, शनिवार को है।
दूसरी शुक्ल पक्ष चतुर्दशी 28 जून 2026, रविवार को पड़ रही है।
जून 2026 का महीना ज्येष्ठ अधिक मास के रूप में मनाया जा रहा है, जो विक्रम संवत 2083 के अंतर्गत आता है।
यह महीना आध्यात्मिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है।
चतुर्दशी तिथि जून 2026 का संक्षिप्त उत्तर
जून 2026 में चतुर्दशी कब है, इसका सीधा जवाब यह है कि कृष्ण पक्ष चतुर्दशी 13 जून 2026 को दोपहर 04:08 बजे प्रारंभ होकर 14 जून 2026 को दोपहर 12:20 बजे समाप्त होगी। शुक्ल पक्ष चतुर्दशी 28 जून 2026 को रात 02:25 बजे से 29 जून 2026 को रात 04:23 बजे तक रहेगी। शिव पूजा और व्रत के लिए दोनों तिथियां पारंपरिक रूप से उपयुक्त मानी जाती हैं।
जून 2026 में चतुर्दशी की तिथियां और समय
| विवरण | तिथि और समय |
|---|---|
| कृष्ण पक्ष चतुर्दशी प्रारंभ | 13 जून 2026, शनिवार, दोपहर 04:08 बजे |
| कृष्ण पक्ष चतुर्दशी समाप्त | 14 जून 2026, रविवार, दोपहर 12:20 बजे |
| शुक्ल पक्ष चतुर्दशी प्रारंभ | 28 जून 2026, रविवार, रात 02:25 बजे |
| शुक्ल पक्ष चतुर्दशी समाप्त | 29 जून 2026, सोमवार, रात 04:23 बजे |
| हिंदी महीना | ज्येष्ठ अधिक मास |
| विक्रम संवत | 2083 सिद्धार्थी |
| मुख्य स्वामी देव | भगवान शिव |
यह समय भारतीय मानक समय (IST) के अनुसार है।
स्थान के अनुसार समय में अंतर संभव है।
यह जानकारी पंचांग गणनाओं और पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित है।
चतुर्दशी तिथि का महत्व शिव पूजा में
हिंदू पंचांग में चतुर्दशी तिथि का विशेष स्थान है।
यह पाक्षिक कैलेंडर की चौदहवीं तिथि होती है। शुक्ल पक्ष में यह पूर्णिमा से ठीक एक दिन पहले आती है।
कृष्ण पक्ष में यह अमावस्या से एक दिन पहले पड़ती है।
पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार इस तिथि के स्वामी स्वयं भगवान शिव हैं।
इसीलिए इस दिन शिव जी की उपासना को विशेष महत्व का माना जाता है।
कई शिव भक्त हर महीने की चतुर्दशी पर उपवास रखते हैं। कुछ लोग इसे मासिक शिवरात्रि भी कहते हैं।
बहुत से परिवार पीढ़ियों से इस व्रत को निरंतर रखते आ रहे हैं।
कृष्ण पक्ष चतुर्दशी 13 जून 2026
13 जून 2026 को कृष्ण पक्ष चतुर्दशी की शुरुआत दोपहर 04:08 बजे हो जाएगी।
अगले दिन 14 जून को दोपहर 12:20 बजे यह तिथि समाप्त होगी।
उदया तिथि के नियम के अनुसार जिस दिन सूर्योदय के समय चतुर्दशी हो, उस दिन व्रत रखना सर्वोत्तम माना जाता है।
यहां 14 जून को सूर्योदय के समय चतुर्दशी तिथि विद्यमान रहेगी, इसलिए उपवास के लिए 14 जून 2026 भी उचित माना जा सकता है।
शिव पूजा के लिए प्रदोष काल यानी संध्याकाल का समय सबसे शुभ माना जाता है।
| पंचांग विवरण | 13-14 जून 2026 |
|---|---|
| तिथि | कृष्ण पक्ष चतुर्दशी |
| तिथि प्रारंभ | 13 जून 2026, दोपहर 04:08 बजे |
| तिथि समाप्त | 14 जून 2026, दोपहर 12:20 बजे |
| पक्ष | कृष्ण पक्ष, ज्येष्ठ अधिक मास |
| वार | शनिवार (13 जून) |
| अगला दिन | रविवार (14 जून), अमावस्या से पूर्व |
| शिव पूजा का शुभ समय | प्रदोष काल, संध्याकाल स्थान के अनुसार समय में अंतर संभव है। |
शुक्ल पक्ष चतुर्दशी 28 जून 2026
जून महीने की दूसरी चतुर्दशी 28 जून 2026 को रात 02:25 बजे प्रारंभ होगी।
यह 29 जून 2026 को रात 04:23 बजे समाप्त होगी।
28 जून की रात के बाद यानी 29 जून 2026, सोमवार को सूर्योदय के समय शुक्ल पक्ष चतुर्दशी विद्यमान रहेगी।
यह शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी है जो पूर्णिमा से ठीक एक दिन पहले आती है।
29 जून सोमवार को शुक्ल पक्ष चतुर्दशी का व्रत रखना पारंपरिक दृष्टि से उपयुक्त माना जाता है।
| पंचांग विवरण | 28-29 जून 2026 |
|---|---|
| तिथि | शुक्ल पक्ष चतुर्दशी |
| तिथि प्रारंभ | 28 जून 2026, रात 02:25 बजे |
| तिथि समाप्त | 29 जून 2026, रात 04:23 बजे |
| पक्ष | शुक्ल पक्ष, ज्येष्ठ अधिक मास |
| वार | रविवार (28 जून) / सोमवार (29 जून) |
| अगले दिन | ज्येष्ठ पूर्णिमा (29 जून 2026) |
| शिव पूजा का शुभ समय | प्रात:काल अभिषेक, प्रदोष काल पूजा |
जून 2026 का ज्येष्ठ अधिक मास और इसका महत्व
जून 2026 का महीना हिंदू कैलेंडर में ज्येष्ठ अधिक मास के रूप में चल रहा है।
अधिक मास कुछ वर्षों में एक बार आता है और इसे धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व वाला माना जाता है।
इस महीने की गई पूजा, व्रत, दान और उपासना का विशेष महत्व बताया जाता है, ऐसी पारंपरिक मान्यता है।
शिव भक्तों के लिए यह महीना और भी विशेष है क्योंकि चतुर्दशी तिथि के स्वामी शिव जी हैं और अधिक मास की इस तिथि पर व्रत रखने का अलग महत्व बताया गया है।
कई परिवार इस पूरे महीने प्रतिदिन शिव जी का जलाभिषेक करते हैं।
चतुर्दशी व्रत की पूजा विधि
शिव चतुर्दशी व्रत की पूजा विधि सरल और भावपूर्ण है।
पारंपरिक रूप से इस दिन निम्नलिखित क्रम में पूजा की जाती है:
- कई लोग प्रातःकाल स्नान और पूजा की परंपरा का पालन करते हैं।
- व्रत संकल्प और शिव ध्यान की परंपरा प्रचलित है।
- बेलपत्र, धतूरा, भांग, आक के फूल अर्पित करें
- बेलपत्र, धतूरा, भांग, आक के फूल अर्पित करें
- चंदन और दीप अर्पित किए जाते हैं।
- शिव स्तोत्र और मंत्र जाप का विशेष महत्व माना जाता है।
- संध्याकाल में प्रदोष पूजा की परंपरा है।
- अगले दिन सूर्योदय के बाद पारण करें
- अगले दिन सूर्योदय के बाद पारण करें
जो लोग पूरे दिन उपवास नहीं रख सकते, वे फलाहार करके भी यह व्रत रखते हैं। यह व्यक्ति की शक्ति और श्रद्धा पर निर्भर करता है।
शिव पूजा के लिए विशेष सामग्री
चतुर्दशी पर शिव पूजन के लिए कुछ सामग्री पारंपरिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जाती है।
इनमें शामिल हैं:
- बेलपत्र जो तीन पत्तियों वाले हों और बिना कटे हों
- जल विशेषकर गंगाजल या स्वच्छ नदी का जल
- दूध, दही, घी, शहद और शक्कर यानी पंचामृत
- सफेद फूल जैसे धतूरे के फूल और आक के फूल
- कच्चा चावल अर्थात अक्षत
- काले तिल विशेषकर कृष्ण पक्ष चतुर्दशी पर
- दीप यानी घी का दीपक
- धूप और अगरबत्ती
शिव जी को तुलसी नहीं चढ़ाई जाती, यह बात ध्यान में रखें।
कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष चतुर्दशी में अंतर
बहुत से श्रद्धालु यह जानना चाहते हैं कि इन दोनों चतुर्दशियों में क्या फर्क है।
कृष्ण पक्ष चतुर्दशी अमावस्या से एक दिन पहले आती है। इस दिन चंद्रमा बहुत क्षीण होता है। इसे मासिक शिवरात्रि भी कहते हैं। महाशिवरात्रि भी कृष्ण पक्ष चतुर्दशी को ही मनाई जाती है, इसलिए यह तिथि विशेष रूप से शिव उपासना के लिए जानी जाती है।
शुक्ल पक्ष चतुर्दशी पूर्णिमा से एक दिन पहले आती है। इस दिन चंद्रमा लगभग पूर्ण होता है। यह तिथि देवी के पूजन के लिए भी उपयुक्त मानी जाती है।
दोनों ही तिथियों पर शिव जी की पूजा का महत्व माना जाता है। बस कृष्ण पक्ष चतुर्दशी को विशेष महत्व दिया जाता है।
| तुलना बिंदु | विवरण |
|---|---|
| कृष्ण पक्ष चतुर्दशी | अमावस्या से पूर्व, मासिक शिवरात्रि, शिव पूजन हेतु विशेष |
| शुक्ल पक्ष चतुर्दशी | पूर्णिमा से पूर्व, शिव और देवी पूजन दोनों के लिए उपयुक्त |
| चंद्रमा की स्थिति | कृष्ण पक्ष में क्षीण, शुक्ल पक्ष में लगभग पूर्ण |
| महाशिवरात्रि | वार्षिक महाशिवरात्रि कृष्ण पक्ष चतुर्दशी को मनाई जाती है |
| व्रत का प्रकार | दोनों पर उपवास और जागरण किया जाता है |
प्रदोष काल और शिव पूजा का शुभ मुहूर्त
चतुर्दशी पर प्रदोष काल शिव पूजा के लिए महत्वपूर्ण समय माना जाता है।
प्रदोष काल सूर्यास्त के बाद लगभग 45 मिनट से 2 घंटे तक का समय होता है।
इस समय शिवलिंग का अभिषेक और आरती करना विशेष महत्व का माना जाता है।
जून 2026 में नई दिल्ली के आसपास सूर्यास्त लगभग शाम 07:15 से 07:20 बजे के आसपास रहता है।
इस हिसाब से प्रदोष पूजा का समय लगभग 07:15 बजे से 09:15 बजे के मध्य रहेगा।
अभिजित मुहूर्त जो दोपहर में लगभग 48 मिनट का होता है, वह भी शिव पूजन के लिए उपयुक्त माना जाता है।
स्थानीय सूर्यास्त के समय के अनुसार प्रदोष काल में थोड़ा अंतर हो सकता है। अपने शहर के पंचांग से समय अवश्य जांचें।
चतुर्दशी व्रत के दौरान क्या करें और क्या न करें
व्रत का पालन सही तरीके से करना जरूरी है।
करने योग्य बातें:
- प्रात:काल सूर्योदय से पहले उठें और स्नान करें
- शिवलिंग पर जलाभिषेक जरूर करें
- बेलपत्र और सफेद फूल अर्पित करें
- ओम नमः शिवाय या महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें
- संध्याकाल में प्रदोष पूजा करें
- सात्विक भोजन या फलाहार करें
न करने योग्य बातें:
- इस दिन तामसिक भोजन जैसे मांस, मछली, प्याज, लहसुन से दूर रहें
- क्रोध और कटु वचन से बचें
- झूठ बोलने से परहेज करें
- शिव जी को तुलसी न चढ़ाएं
- अशुद्ध मन से पूजा न करें
मासिक शिवरात्रि और चतुर्दशी का संबंध
बहुत से लोग मासिक शिवरात्रि और चतुर्दशी में भ्रमित हो जाते हैं।
दरअसल प्रत्येक महीने की कृष्ण पक्ष चतुर्दशी को ही मासिक शिवरात्रि कहा जाता है।
जिस प्रकार वर्ष में एक बार महाशिवरात्रि आती है, उसी प्रकार हर महीने कृष्ण चतुर्दशी को मासिक शिवरात्रि मनाई जाती है।
इस दिन शिव मंदिरों में विशेष भीड़ रहती है। कई भक्त रात भर जागरण करते हैं। रात के चार पहरों में शिव जी की विशेष पूजा की जाती है।
जून 2026 में 13 जून की रात और 14 जून का दिन इसी मासिक शिवरात्रि के लिए है।
जून 2026 में शिव पूजा के लिए अन्य शुभ दिन
चतुर्दशी के अलावा जून 2026 में कुछ और दिन शिव पूजा के लिए उपयुक्त माने जाते हैं।
- सोमवार के दिन शिव जी की पूजा विशेष फलदायक मानी जाती है
- प्रदोष व्रत भी त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है जो चतुर्दशी से एक दिन पहले होता है
- अमावस्या जो 15 जून 2026 को है, उस दिन भी शिव पूजन किया जाता है
- ज्येष्ठ अधिक मास में हर सोमवार को शिव जी का जलाभिषेक पारंपरिक रूप से विशेष माना जाता है
इस पूरे महीने शिव उपासना का वातावरण बना रहता है।
शिव जी को प्रिय चीजें और चतुर्दशी पर विशेष अर्पण
चतुर्दशी पर शिव जी को अर्पित की जाने वाली चीजों में बेलपत्र सबसे महत्वपूर्ण है।
पुराणों में बताया गया है कि बेलपत्र शिव जी को बहुत प्रिय है।
इसके अलावा कुछ और चीजें जो इस दिन विशेष रूप से अर्पित की जाती हैं:
- भांग जिसे शिव प्रसाद भी कहते हैं
- धतूरा जो शिव जी को प्रिय माना जाता है
- आक के फूल विशेषकर सफेद रंग के
- कच्चा दूध जिसे ठंडा ही शिवलिंग पर चढ़ाया जाता है
- काले तिल जो कृष्ण पक्ष चतुर्दशी पर विशेष रूप से उपयोगी माने जाते हैं
- रुद्राक्ष माला से की गई पूजा
इन चीजों की उपलब्धता और व्यक्ति की श्रद्धा दोनों ही पूजा को पूर्ण बनाते हैं।
चतुर्दशी पर मंत्र जाप और उनका महत्व
इस दिन मंत्र जाप को विशेष महत्व दिया जाता है।
सबसे सरल और प्रसिद्ध मंत्र ओम नमः शिवाय है। इसे पंचाक्षरी मंत्र भी कहते हैं।
इसके अलावा महामृत्युंजय मंत्र का जाप भी बहुत किया जाता है।
कई श्रद्धालु 108 बार या रुद्राक्ष माला पर जाप करते हैं।
शिव पुराण के अनुसार चतुर्दशी तिथि पर किया गया मंत्र जाप अधिक प्रभावशाली बताया गया है, ऐसी पारंपरिक मान्यता है।
यह सत्य या झूठ का प्रश्न नहीं, यह श्रद्धा और एकाग्रता का विषय है।
जून 2026 की चतुर्दशी और अधिक मास का संयोग
जून 2026 में एक विशेष बात यह है कि यह महीना अधिक मास है।
अधिक मास यानी लीप महीना हिंदू कैलेंडर में कुछ वर्षों में एक बार आता है।
इस बार ज्येष्ठ मास का अधिक मास आया है।
पारंपरिक मान्यताओं में अधिक मास को विष्णु जी का महीना कहा जाता है।
लेकिन इस महीने की चतुर्दशी पर शिव जी की पूजा का महत्व भी बना रहता है क्योंकि तिथि के स्वामी शिव ही हैं।
कुछ विद्वान यह भी मानते हैं कि अधिक मास में किए गए व्रत और पूजा का विशेष महत्व बताया जाता है।
राहुकाल और अशुभ समय की जानकारी
कई परंपराओं में राहुकाल का ध्यान रखा जाता है।
राहुकाल में नए कार्य शुरू करना शुभ नहीं माना जाता। लेकिन शिव पूजा और व्रत पालन राहुकाल में भी जारी रखा जा सकता है।
नई दिल्ली के अनुसार विभिन्न वारों में राहुकाल का समय अलग-अलग रहता है।
| वार | राहुकाल (अनुमानित, नई दिल्ली) |
|---|---|
| सोमवार | प्रात: 07:30 से 09:00 बजे तक |
| मंगलवार | दोपहर 03:00 से 04:30 बजे तक |
| बुधवार | दोपहर 12:00 से 01:30 बजे तक |
| गुरुवार | दोपहर 01:30 से 03:00 बजे तक |
| शुक्रवार | प्रात: 10:30 से 12:00 बजे तक |
| शनिवार (13 जून) | प्रात: 09:00 से 10:30 बजे तक |
| रविवार (28 जून) | सायं 04:30 से 06:00 बजे तक |
राहुकाल सूर्योदय और सूर्यास्त के समय के आधार पर बदलता है।
स्थान के अनुसार समय में अंतर संभव है। प्रकाशन से पहले समय पुनः सत्यापित करें क्योंकि स्थानीय गणना में अंतर हो सकता है।
चतुर्दशी व्रत से जुड़ी पारंपरिक मान्यताएं
इस व्रत को लेकर समाज में कई मान्यताएं प्रचलित हैं।
बहुत से परिवारों में यह व्रत सदियों से चला आ रहा है।
कुछ लोग सोमवार के साथ-साथ चतुर्दशी का भी व्रत रखते हैं।
शिवपुराण में उल्लेख है कि जो व्यक्ति चतुर्दशी पर श्रद्धापूर्वक शिव जी की उपासना करता है, उसके जीवन में मानसिक शांति और स्थिरता आती है।
यह धर्मशास्त्र की बात है, न कि कोई गारंटी।
अनेक वृद्ध महिलाएं और पुरुष इस व्रत को जीवनभर निरंतर रखते हैं।
सटीक समय के लिए विश्वसनीय स्रोत
तिथि और समय की सटीक जानकारी के लिए हमेशा विश्वसनीय स्रोतों का उपयोग करें।
भारत में Drik Panchang एक जाना-माना पंचांग वेबसाइट है जहां तिथि, नक्षत्र, योग, राहुकाल और अन्य पंचांग जानकारी शहर के अनुसार मिलती है।
अपने शहर के अनुसार समय में अंतर हो सकता है। नई दिल्ली, मुंबई, अहमदाबाद, लखनऊ, चेन्नई जैसे अलग-अलग शहरों में सूर्योदय के समय फर्क के कारण तिथि की शुरुआत और समाप्ति का समय थोड़ा बदल जाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
जून 2026 में चतुर्दशी कब है?
जून 2026 में दो बार चतुर्दशी है। कृष्ण पक्ष चतुर्दशी 13 जून 2026 को दोपहर 04:08 बजे शुरू होकर 14 जून 2026 को दोपहर 12:20 बजे समाप्त होगी। शुक्ल पक्ष चतुर्दशी 28 जून 2026 को रात 02:25 बजे से 29 जून 2026 को रात 04:23 बजे तक रहेगी। यह समय भारतीय मानक समय (IST) के अनुसार है।
चतुर्दशी पर शिव पूजा का सबसे शुभ समय कौन सा है?
चतुर्दशी पर शिव पूजा के लिए प्रदोष काल सबसे उपयुक्त माना जाता है। यह सूर्यास्त के बाद लगभग 45 मिनट से 2 घंटे तक का समय होता है। इसके अलावा प्रात:काल का ब्रह्ममुहूर्त भी शिव अभिषेक के लिए पारंपरिक रूप से उत्तम बताया गया है। स्थानीय सूर्यास्त के समय के अनुसार यह बदलता रहता है।
क्या कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष चतुर्दशी दोनों पर व्रत रखा जा सकता है?
हां, दोनों तिथियों पर शिव व्रत रखने की परंपरा है। कृष्ण पक्ष चतुर्दशी को मासिक शिवरात्रि के रूप में मनाया जाता है और इसे थोड़ा अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है। शुक्ल पक्ष चतुर्दशी पर भी शिव पूजा होती है। दोनों में से कौन सा व्रत रखें, यह व्यक्ति की परंपरा, शक्ति और श्रद्धा पर निर्भर करता है।
ज्येष्ठ अधिक मास में चतुर्दशी व्रत का विशेष महत्व है?
जून 2026 में ज्येष्ठ अधिक मास चल रहा है। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार अधिक मास में किए गए व्रत और पूजन का विशेष महत्व माना जाता है। अधिक मास कुछ वर्षों में एक बार आता है, इसलिए यह संयोग दुर्लभ है। हालांकि यह पारंपरिक मान्यता है, इसे गारंटी नहीं माना जाना चाहिए।
क्या चतुर्दशी पर राहुकाल में शिव पूजा की जा सकती है?
राहुकाल में नए शुभ कार्य शुरू करना वर्जित माना जाता है। लेकिन शिव पूजा और व्रत पालन नित्य कर्म की श्रेणी में आते हैं। इसलिए राहुकाल में भी पूजा जारी रखी जा सकती है। नए कार्यों जैसे यात्रा शुरू करना या कोई महत्वपूर्ण निर्णय लेना राहुकाल में टालना चाहिए।
निष्कर्ष
जून 2026 में चतुर्दशी कब है, इसका जवाब अब बिल्कुल स्पष्ट है।
कृष्ण पक्ष चतुर्दशी 13 जून 2026 को और शुक्ल पक्ष चतुर्दशी 28 जून 2026 को पड़ रही है।
दोनों ही दिन शिव उपासना के लिए उपयुक्त हैं।
इस महीने ज्येष्ठ अधिक मास होने के कारण धार्मिक महत्व और बढ़ जाता है।
व्रत, पूजा विधि और मंत्र जाप को श्रद्धापूर्वक करें। अपने शहर के स्थानीय पंचांग से समय अवश्य मिलान करें।
यह जानकारी विश्वसनीय पंचांग स्रोतों से ली गई है और आपकी साधना में सहायक बने यही उद्देश्य है।
नोट: यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी और सांस्कृतिक संदर्भ के लिए है। यह लेख पारंपरिक मान्यताओं और सांस्कृतिक परंपराओं पर आधारित है। तिथि और समय स्थानीय पंचांग के अनुसार थोड़े भिन्न हो सकते हैं। स्थान के अनुसार सधार्मिक परंपराएं क्षेत्र और परिवार के अनुसार अलग-अलग हो सकती हैं।मय में अंतर संभव है।
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