हर साल सितंबर का महीना शुरू होते ही एक ही सवाल सबसे ज्यादा पूछा जाने लगता है — करवा चौथ कब है? दिलचस्प बात यह है कि जब आप यह सवाल गूगल पर डालते हैं, तो अलग-अलग वेबसाइट पर तारीख और मुहूर्त का समय थोड़ा-थोड़ा अलग नजर आता है।
इससे कई सुहागिन महिलाओं के मन में असमंजस बन जाता है कि आखिर सही जानकारी कौन सी है।
इस लेख में हम सिर्फ तारीख नहीं बताएंगे, बल्कि यह भी समझाएंगे कि अलग-अलग जगह अलग-अलग समय क्यों दिख रहा है, आपके शहर के हिसाब से चांद कब निकलेगा, पूजा किस तरह करनी चाहिए और व्रत को सेहत के लिहाज से सुरक्षित तरीके से कैसे पूरा किया जा सकता है।
करवा चौथ 2026 की सीधी और सटीक तारीख
साल 2026 में करवा चौथ का व्रत गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026 को रखा जाएगा। यह व्रत कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है, और इसे मुख्य रूप से उत्तर भारत के राज्यों — उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली, मध्य प्रदेश और उत्तराखंड — में विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुखी दांपत्य जीवन के लिए रखती हैं।
अगर आप दिल्ली या उसके आस-पास रहती हैं, तो नीचे दी गई टेबल में एक नजर में पूरी जानकारी देख सकती हैं।
| जानकारी | विवरण (दिल्ली के अनुसार) |
|---|---|
| व्रत की तारीख | गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026 |
| व्रत शुरू होने का समय (सूर्योदय) | लगभग सुबह 6:30 बजे |
| पूजा मुहूर्त | शाम लगभग 5:38 बजे से 6:56 बजे तक |
| चांद निकलने का अनुमानित समय | रात लगभग 8:15 से 8:20 बजे के बीच |
| व्रत की कुल अवधि | लगभग 13 से 14 घंटे (निर्जला) |
ध्यान दें: यह समय दिल्ली और आस-पास के क्षेत्र के लिए अनुमानित है। मुंबई, जयपुर, लखनऊ जैसे शहरों में चांद निकलने का समय अलग होगा, जिसकी जानकारी नीचे दी गई है।
अलग-अलग वेबसाइट पर मुहूर्त का समय अलग क्यों दिखता है?
यह सवाल बिल्कुल वाजिब है, और शायद सबसे कम समझाया जाने वाला हिस्सा है। जब मैंने खुद कई पंचांग स्रोतों को साथ रखकर देखा, तो पाया कि पूजा मुहूर्त 5:38 बजे से 6:56 बजे भी बताया गया है और कुछ जगह 5:51 बजे से 7:07 बजे भी। दोनों गलत नहीं हैं — फर्क सिर्फ इस बात का है कि गणना किस शहर की सूर्यास्त और चंद्रोदय स्थिति पर आधारित है।
पंचांग की गणना अक्षांश और देशांतर (Latitude-Longitude) पर निर्भर करती है, यानी आपका शहर जितना पूर्व या पश्चिम में होगा, सूर्यास्त और चांद निकलने का समय उतना बदलेगा।
इसलिए सबसे भरोसेमंद तरीका यह है कि आप अपने शहर के लिए स्थानीय पंचांग या किसी प्रमाणित पंचांग वेबसाइट जैसे Drik Panchang से समय जरूर क्रॉस-चेक कर लें।
चतुर्थी तिथि की गणना — शुरुआत और समाप्ति
पंचांग के अनुसार कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि 28 अक्टूबर 2026 की दोपहर से शुरू होकर 29 अक्टूबर 2026 की रात तक रहती है।
भारत में करवा चौथ का व्रत उस दिन रखा जाता है जब चतुर्थी तिथि प्रदोष काल (शाम) और चंद्रोदय के समय व्याप्त रहती है, इसलिए भारत के लिए तारीख 29 अक्टूबर तय होती है।
दिलचस्प बात यह है कि अमेरिका और कनाडा में समय क्षेत्र (Time Zone) अलग होने के कारण वहां रहने वाले भारतीय परिवार यह व्रत 28 अक्टूबर 2026 को रखते हैं, क्योंकि उनके स्थानीय समय के अनुसार चतुर्थी तिथि और चंद्रोदय उस दिन मेल खाते हैं।
अगर आपके रिश्तेदार विदेश में रहते हैं, तो उन्हें यह अंतर पहले से बता देना अच्छा रहेगा, ताकि व्रत की तारीख को लेकर परिवार में कोई कन्फ्यूजन न हो।
शहर के अनुसार चांद निकलने का अनुमानित समय
चांद निकलने का सही समय जानना करवा चौथ व्रत का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है, क्योंकि व्रत का पारण (खोलना) चांद देखने के बाद ही होता है। नीचे दी गई टेबल में कुछ प्रमुख शहरों का अनुमानित समय दिया गया है।
| शहर | अनुमानित चांद निकलने का समय (29 अक्टूबर 2026) |
|---|---|
| दिल्ली | रात लगभग 8:17 बजे |
| जयपुर | रात लगभग 8:29 बजे |
| लखनऊ | रात लगभग 8:08 बजे |
| चंडीगढ़ | रात लगभग 8:14 बजे |
| मुंबई | रात लगभग 9:00 बजे |
ये समय अनुमानित हैं और मौसम, बादल या स्थानीय भौगोलिक स्थिति के कारण कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकते हैं।
सरगी क्या है और इसे कब खाया जाता है
करवा चौथ व्रत की शुरुआत सूर्योदय से पहले सरगी खाने के साथ होती है। परंपरा के अनुसार सास अपनी बहू को सरगी देती है, जिसमें फल, मेवे, हल्का भोजन और कुछ श्रृंगार का सामान शामिल होता है।
यह सिर्फ एक रस्म नहीं है — व्यावहारिक रूप से यह शरीर को पूरे दिन के निर्जला व्रत के लिए ऊर्जा देने का भी एक तरीका है।
अगर घर में यह परंपरा नहीं है या सास मौजूद नहीं हैं, तो कई परिवारों में महिलाएं खुद सरगी तैयार कर लेती हैं, जिसमें आमतौर पर ये शामिल किया जाता है:
फेनी या सेवई (दूध में पकी हुई)
सूखे मेवे — बादाम, काजू, किशमिश
ताजे फल जैसे केला, सेब या अनार
एक गिलास दूध या नारियल पानी
हल्का पराठा या पूरी-सब्जी
सरगी सूर्योदय से पहले खाई जाती है, इसके बाद पूरे दिन कुछ भी खाया-पिया नहीं जाता, जब तक कि रात में चांद के दर्शन न हो जाएं।
करवा चौथ पूजा विधि — सुबह से रात तक चरणबद्ध तरीका
पूजा विधि हर घर में थोड़ी अलग हो सकती है, लेकिन ज्यादातर परिवारों में इसका सामान्य क्रम इस तरह रहता है:
सुबह सूर्योदय से पहले स्नान करके सरगी ग्रहण करें और व्रत का संकल्प लें।
दिनभर निर्जला व्रत रखते हुए साधारण घरेलू काम करें, अधिक धूप और भारी मेहनत से बचें।
दोपहर के बाद स्नान करके 16 श्रृंगार करें और साफ वस्त्र पहनें।
शाम को पूजा मुहूर्त के समय एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर माता पार्वती, भगवान शिव, भगवान गणेश और करवा माता की स्थापना करें।
पूजा सामग्री से विधिवत पूजा करें और करवा चौथ की व्रत कथा सुनें या पढ़ें।
रात में चांद निकलने पर पहले छलनी से चांद देखें, फिर उसी छलनी से पति का चेहरा देखें।
चांद को जल और अक्षत से अर्घ्य दें, दीपक जलाकर आरती करें।
पति के हाथ से पानी पीकर या मिठाई खाकर व्रत का पारण करें।
पूजा सामग्री की पूरी लिस्ट
पूजा के दिन आखिरी समय पर सामान इकट्ठा करने की भागदौड़ से बचने के लिए, एक दिन पहले ही यह लिस्ट तैयार कर लेना सुविधाजनक रहता है।
मिट्टी या पीतल का करवा (कलश)
छलनी
दीपक (घी या तेल का) और अगरबत्ती-धूप
रोली, हल्दी, कुमकुम, अक्षत (चावल)
करवा माता की तस्वीर या मूर्ति
सुपारी, लौंग, इलायची और पान के पत्ते
फूल, फलों की थाली और मिठाई
सिंदूर, चूड़ियां, बिंदी जैसी सुहाग सामग्री
करवा चौथ व्रत कथा की पुस्तक
जल से भरा कलश या लोटा
छलनी से चांद देखने की परंपरा — मान्यता या तथ्य?
यह परंपरा करवा चौथ का सबसे भावनात्मक हिस्सा मानी जाती है। मान्यता है कि छलनी के हजारों छोटे छिद्र पति की लंबी उम्र और सौभाग्य के प्रतीक हैं, और पहले चांद को देखकर फिर पति को देखने से व्रत पूर्ण माना जाता है।
यह पूरी तरह एक सांस्कृतिक और पारंपरिक विश्वास है, इसे वैज्ञानिक तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए — यह परंपरा परिवार और क्षेत्र के अनुसार अलग-अलग तरीके से निभाई जाती है।
करवा चौथ व्रत कथा — संक्षिप्त परिचय
करवा चौथ की कथा में वीरवती नाम की एक स्त्री और उसके सात भाइयों की कहानी सबसे ज्यादा सुनाई जाती है, जिसमें पति की लंबी आयु के लिए किए गए त्याग और विश्वास को दर्शाया गया है।
यह कथा धार्मिक परंपरा का हिस्सा है और सदियों से मुख-दर-मुख आगे बढ़ी है, इसलिए इसके ऐतिहासिक प्रमाण के बजाय इसे एक सांस्कृतिक
निर्जला व्रत को सुरक्षित तरीके से कैसे पूरा करें
करवा चौथ अक्टूबर के महीने में आता है, जब तापमान गर्मी के मुकाबले काफी कम होता है, इसलिए यह व्रत आमतौर पर ज्येष्ठ महीने की निर्जला एकादशी जितना कठिन नहीं माना जाता।
फिर भी बिना पानी के लंबे समय तक रहना शरीर के लिए एक चुनौती है, और स्वास्थ्य विशेषज्ञ आमतौर पर कुछ सामान्य सावधानियां बरतने की सलाह देते हैं।
व्रत से एक दिन पहले शरीर को अच्छी तरह हाइड्रेट रखें और पानी की मात्रा बढ़ाएं।
दिनभर तेज धूप में बाहर निकलने और अधिक मेहनत वाले काम से बचें।
व्रत खोलते समय एक साथ बहुत ज्यादा पानी न पिएं, घूंट-घूंट कर पानी लें।
पारण के समय हल्का भोजन लें, भारी और तेल-मसाले वाला खाना तुरंत न खाएं।
गर्भवती महिलाएं, स्तनपान कराने वाली माताएं, बुजुर्ग, डायबिटीज या हृदय रोग से जुड़ी समस्या वाले लोग व्रत रखने से पहले अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
यदि दिनभर के दौरान चक्कर आना, अत्यधिक कमजोरी या घबराहट महसूस हो, तो श्रद्धा से समझौता किए बिना व्रत तोड़कर तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।
यह जानकारी सामान्य सुझाव के तौर पर दी गई है और इसे पेशेवर चिकित्सा सलाह का विकल्प नहीं समझा जाना चाहिए।
भारत और विदेश में तारीख में अंतर क्यों होता है
जैसा ऊपर बताया गया, भारत के लिए करवा चौथ 29 अक्टूबर 2026 को है, जबकि उत्तर अमेरिका के कई हिस्सों में यह 28 अक्टूबर 2026 को मनाया जा सकता है।
यह अंतर किसी गलती की वजह से नहीं, बल्कि समय क्षेत्र और चंद्रोदय की स्थानीय गणना की वजह से आता है।
अगर आपका परिवार एक से ज्यादा देशों में फैला है, तो दोनों तारीखों का ध्यान रखना उपयोगी रहेगा।
करवा चौथ 2026 से जुड़े सामान्य सवाल
क्या करवा चौथ का व्रत सिर्फ विवाहित महिलाएं ही रखती हैं?
परंपरागत रूप से यह व्रत विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए रखती हैं, हालांकि कुछ परिवारों में अविवाहित लड़कियां भी अपने भावी जीवनसाथी के लिए यह व्रत रखती हैं।
यह पूरी तरह पारिवारिक और क्षेत्रीय परंपरा पर निर्भर करता है।
अगर मेरे शहर में बादल की वजह से चांद न दिखे तो व्रत कैसे खोलें?
कई परिवारों में इस स्थिति में तय चंद्रोदय समय के अनुसार पूजा पूरी कर ली जाती है, और कुछ जगह तारों को देखकर भी व्रत खोलने की परंपरा है।
यह विषय पूरी तरह पारिवारिक मान्यता पर निर्भर करता है, इसलिए अपने परिवार के पुरोहित या बड़ों से सलाह लेना उचित रहेगा।
क्या करवा चौथ और सुहागिन तीज एक ही चीज हैं?
नहीं, दोनों अलग व्रत हैं। तीज सावन या भाद्रपद महीने में आती है, जबकि करवा चौथ कार्तिक मास की चतुर्थी को रखा जाता है। दोनों का उद्देश्य पति की लंबी उम्र से जुड़ा है, लेकिन तिथि, कथा और पूजा विधि अलग हैं।
अगर तबीयत ठीक न हो तो क्या निर्जला व्रत जरूरी है?
नहीं। कई महिलाएं फलाहार या जल सहित व्रत रखकर भी अपनी श्रद्धा पूरी करती हैं। स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना गलत नहीं माना जाता, और यह पूरी तरह व्यक्ति की शारीरिक स्थिति पर निर्भर फैसला है।
पूजा मुहूर्त निकल जाए तो क्या पूजा नहीं हो सकती?
पूजा मुहूर्त सबसे शुभ समय माना जाता है, लेकिन अगर किसी कारण से यह निकल जाए, तो चांद निकलने से पहले तक पूजा और कथा पूरी की जा सकती है। ज्यादातर परिवार चांद के दर्शन तक पूजा का समय लचीला रखते हैं।
अंत में — व्रत की तैयारी जल्दी शुरू करें
करवा चौथ की तारीख और मुहूर्त जानने के बाद अगला जरूरी काम है समय पर तैयारी करना — पूजा सामग्री, सरगी और श्रृंगार का सामान त्योहार से एक-दो दिन पहले ही इकट्ठा कर लें, ताकि व्रत के दिन आराम से पूजा पर ध्यान दिया जा सके।
हर शहर में चांद निकलने का समय अलग होता है, इसलिए अपने शहर का सही समय जरूर जांच लें और तय समय से थोड़ा पहले ही तैयार रहें।
लेखकीय एवं संपादकीय जानकारी: यह लेख करवा चौथ 2026 की तारीख, पूजा मुहूर्त और पूजा विधि पर उपलब्ध पंचांग स्रोतों, प्रचलित परंपराओं और सामान्य स्वास्थ्य सलाह के आधार पर तैयार किया गया है।
धार्मिक मुहूर्त और चंद्रोदय का समय शहर और वर्ष के अनुसार बदल सकता है, इसलिए पूजा से पहले अपने स्थानीय पंचांग से समय जरूर पुष्टि करें। लेख में दी गई स्वास्थ्य संबंधी जानकारी सामान्य सुझाव है, चिकित्सा सलाह का विकल्प नहीं।
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