November Mein Ekadashi Kab Hai 2026 Start Date तिथि शुरू होने का समय जानना क्यों जरूरी है?

November Mein Ekadashi Kab Hai 2026 Start Date तिथि शुरू होने का समय जानना क्यों जरूरी है?
Table of Contents / विषय सूची

November Mein Ekadashi Kab Hai 2026 Start Date, यह सवाल हर उस व्यक्ति के मन में आता है जो एकादशी व्रत को पूरे नियम से रखना चाहता है।

सही तिथि और समय जाने बिना व्रत का संकल्प अधूरा रह सकता है।

नवंबर महीने में दो एकादशी पड़ती हैं। पहली रमा एकादशी और दूसरी देवउठनी एकादशी, जिसे प्रबोधिनी एकादशी भी कहते हैं।

दोनों का अपना अलग धार्मिक महत्व है।

नवंबर 2026 में एकादशी का सीधा उत्तर

नवंबर 2026 में पहली एकादशी रमा एकादशी 5 नवंबर, गुरुवार को है। कृष्ण पक्ष एकादशी तिथि 4 नवंबर को प्रातः 11:03 बजे शुरू होकर 5 नवंबर को प्रातः 10:36 बजे समाप्त होती है। दूसरी देवउठनी एकादशी 20 नवंबर, शुक्रवार को है। शुक्ल पक्ष एकादशी तिथि 20 नवंबर को प्रातः 07:16 बजे शुरू होकर 21 नवंबर को प्रातः 06:32 बजे समाप्त होती है। पारण समय 21 नवंबर दोपहर 12:08 बजे से है।

नवंबर 2026 में एकादशी की पूरी तारीख और समय सूची

नवंबर 2026 में दोनों एकादशी की तिथि, पक्ष, नाम और समय नीचे तालिका में दिया गया है।

एकादशी विवरण जानकारी
एकादशी का नाम रमा एकादशी (कृष्ण पक्ष)
व्रत तारीख 5 नवंबर 2026, गुरुवार
तिथि आरंभ 4 नवंबर 2026 को प्रातः 11:03 बजे
तिथि समाप्त 5 नवंबर 2026 को प्रातः 10:36 बजे
पक्ष कृष्ण पक्ष, कार्तिक मास
पारण 6 नवंबर को सूर्योदय के बाद द्वादशी तिथि में

एकादशी विवरण जानकारी
एकादशी का नाम देवउठनी एकादशी / प्रबोधिनी एकादशी (शुक्ल पक्ष)
स्मार्त व्रत तारीख 20 नवंबर 2026, शुक्रवार
वैष्णव व्रत तारीख 21 नवंबर 2026, शनिवार
तिथि आरंभ 20 नवंबर 2026 को प्रातः 07:16 बजे
तिथि समाप्त 21 नवंबर 2026 को प्रातः 06:32 बजे
पारण समय 21 नवंबर को दोपहर 12:08 बजे से 22 नवंबर को प्रातः 04:56 बजे तक
पक्ष शुक्ल पक्ष, कार्तिक मास

यह समय नई दिल्ली के पंचांग के अनुसार है। अलग-अलग शहरों में सूर्योदय का समय बदलता है, स्थान के अनुसार समय में अंतर संभव है।

रमा एकादशी क्या है और नवंबर में इसका क्या महत्व है

रमा एकादशी कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी होती है।

रमा शब्द का अर्थ लक्ष्मी से है। इसलिए इस व्रत को भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी की उपासना का अवसर माना जाता है। 

कई परिवारों में इस दिन विशेष पूजा-अर्चना की परंपरा है।

पारंपरिक मान्यताओं में कहा जाता है कि यह व्रत करने से पापों का नाश होता है।

हालांकि यह आस्था और परंपरा पर आधारित विश्वास है, न कि कोई सिद्ध तथ्य।

नवंबर 2026 में रमा एकादशी 5 तारीख, गुरुवार को पड़ रही है।

गुरुवार भगवान विष्णु से जुड़ा दिन माना जाता है, इसलिए परंपरा में इस संयोग को शुभ माना जाता है।

देवउठनी एकादशी का विशेष महत्व क्यों है

देवउठनी एकादशी, जिसे प्रबोधिनी एकादशी भी कहते हैं, नवंबर 2026 में 20 और 21 तारीख को पड़ रही है।

परंपरागत मान्यता के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु चार माह की योगनिद्रा से जागते हैं। इसी के साथ चातुर्मास समाप्त होता है।

चातुर्मास देवशयनी एकादशी से देवउठनी एकादशी तक का काल होता है। इस अवधि में विवाह, मुंडन और नए व्यापार जैसे मांगलिक कार्य पारंपरिक रूप से टाले जाते हैं। देवउठनी एकादशी के बाद ये सब शुभ कार्य फिर शुरू हो सकते हैं।

कई परिवार इसी एकादशी के बाद विवाह की तारीखें तय करते हैं। यही वजह है कि नवंबर के बाद शादी का मौसम शुरू होता है।

स्मार्त परंपरा में यह व्रत 20 नवंबर को और वैष्णव परंपरा में 21 नवंबर को मनाया जाएगा।

तिथि शुरू होने का समय जानना क्यों जरूरी है

यह सबसे व्यावहारिक सवाल है जो ज्यादातर लोग पूछते हैं।

एकादशी व्रत सूर्योदय के समय जो तिथि होती है, उसी के आधार पर तय होता है।

इसलिए तिथि की शुरुआत और समाप्ति के समय जानना जरूरी हो जाता है।

अगर एकादशी तिथि सूर्योदय से पहले शुरू हो गई है, तो व्रत उसी दिन रखा जाता है।

अगर दो दिन सूर्योदय के समय एकादशी तिथि पड़ रही है, तो स्मार्त और वैष्णव परंपरा में अलग-अलग दिन तय होते हैं।

पारण का समय भी उतना ही जरूरी है। पारण यानी व्रत तोड़ने की क्रिया द्वादशी तिथि में सूर्योदय के बाद करनी होती है।

पारंपरिक नियमों में द्वादशी तिथि के भीतर पारण करने का उल्लेख मिलता है।

हरि वसर के दौरान पारण नहीं करना चाहिए। हरि वसर द्वादशी तिथि का पहला एक-चौथाई भाग होता है।

एकादशी व्रत का पूरा तीन दिवसीय क्रम

एकादशी व्रत असल में तीन दिन का क्रम होता है, सिर्फ एक दिन का नहीं।

  • दशमी — व्रत से एक दिन पहले। दोपहर में एक बार सात्विक भोजन लिया जाता है। चावल और अनाज से परहेज रहता है।
  • एकादशी — व्रत का मुख्य दिन। अनाज पूरी तरह वर्जित है। फल, दूध, साबूदाना, कुट्टू, सिंघाड़े का आटा और सेंधा नमक ले सकते हैं।
  • द्वादशी — पारण का दिन। सूर्योदय के बाद निर्धारित समय पर व्रत तोड़ा जाता है।

नवंबर 2026 में देवउठनी एकादशी का पारण 21 नवंबर को दोपहर 12:08 बजे से शुरू होगा।

नवंबर 2026 एकादशी व्रत में क्या खाएं, क्या नहीं

खाने योग्य चीजें

  • फल जैसे केला, सेब, अंगूर, आम
  • दूध और दूध से बने उत्पाद
  • साबूदाना और साबूदाना खिचड़ी
  • कुट्टू का आटा और सिंघाड़े का आटा
  • शकरकंद और सेंधा नमक
  • मेवे जैसे बादाम, काजू, मूंगफली

पूरी तरह वर्जित

  • चावल, गेहूं और सभी अनाज
  • दाल और दाल से बनी कोई भी चीज
  • तामसिक भोजन और मसालेदार खाना
  • प्याज और लहसुन

स्मार्त और वैष्णव एकादशी में अंतर क्यों होता है

यह बात कई लोगों को भ्रमित करती है।

दोनों परंपराएं सूर्योदय के समय की तिथि देखती हैं। लेकिन वैष्णव पंचांग अरुणोदय काल को भी जांचता है, जो सूर्योदय से पहले का समय होता है।

अगर उस समय दशमी तिथि चल रही हो, तो वैष्णव एकादशी एक दिन आगे खिसक जाती है।

यही कारण है कि देवउठनी एकादशी स्मार्त परंपरा में 20 नवंबर और वैष्णव परंपरा में 21 नवंबर को है।

अपने परिवार की परंपरा और कुल की मान्यता के अनुसार तारीख तय करना सबसे उचित रहता है।

नवंबर 2026 की दोनों एकादशी का तुलनात्मक विवरण

विवरण रमा एकादशी देवउठनी एकादशी
तारीख 5 नवंबर 2026 20/21 नवंबर 2026
पक्ष कृष्ण पक्ष शुक्ल पक्ष
तिथि आरंभ 4 नव. प्रातः 11:03 बजे 20 नव. प्रातः 07:16 बजे
तिथि समाप्त 5 नव. प्रातः 10:36 बजे 21 नव. प्रातः 06:32 बजे
पारण 6 नवंबर सूर्योदय बाद 21 नव. दोपहर 12:08 से
विशेषता लक्ष्मी-विष्णु पूजा चातुर्मास समाप्ति

पारण में देरी हो जाए तो क्या करें

कई बार लोगों का पारण सही समय पर नहीं हो पाता। इसके बारे में परंपरागत मार्गदर्शन यह है।

पारण प्रातःकाल करना सबसे उत्तम माना गया है। अगर किसी कारण से सुबह नहीं हो सका, तो मध्याह्न के बाद करें।

द्वादशी तिथि समाप्त होने के बाद पारण करना उचित नहीं माना जाता।

देवउठनी एकादशी के बाद का पारण 21 नवंबर दोपहर 12:08 से 22 नवंबर प्रातः 04:56 के बीच करना चाहिए।

एकादशी व्रत से जुड़ी कुछ जरूरी बातें

कुछ व्यावहारिक बातें जो व्रत रखने वालों को ध्यान में रखनी चाहिए।

  • व्रत का संकल्प दशमी की रात या एकादशी की सुबह लिया जाता है।
  • रात्रि जागरण कई परंपराओं में किया जाता है। भजन-कीर्तन होती है।
  • तुलसी भगवान विष्णु की पूजा में विशेष मानी जाती है। एकादशी पर तुलसी के पत्ते चढ़ाना शुभ माना जाता है।
  • विष्णु सहस्रनाम का पाठ इस दिन पारंपरिक रूप से किया जाता है।
  • व्रत का प्रकार अपनी शारीरिक क्षमता और परंपरा के अनुसार तय करें।

कई घरों में आज भी यह परंपरा है कि एकादशी की सुबह बुजुर्ग सबसे पहले उठकर संकल्प लेते हैं।

युवा पीढ़ी भी धीरे-धीरे इस परंपरा को समझने लगी है।

चातुर्मास और देवउठनी एकादशी का संबंध

देवशयनी एकादशी 25 जुलाई 2026 को थी। उसी दिन से चातुर्मास शुरू हुआ था।

20 नवंबर 2026 को देवउठनी एकादशी के साथ यह काल समाप्त होगा।

चार महीने में कुल 16 से अधिक एकादशियां पड़ती हैं।

इस पूरे काल में पारंपरिक रूप से विवाह, मुंडन, यज्ञोपवीत और गृह प्रवेश जैसे मांगलिक संस्कार टाले जाते हैं।

देवउठनी के बाद शुभ कार्यों का सिलसिला फिर शुरू होता है। इसीलिए नवंबर के अंत से विवाह मुहूर्त निकलने लगते हैं।

नवंबर 2026 एकादशी की संपूर्ण समय-रेखा

दिन / तारीख क्या करें
4 नवंबर (बुधवार) दशमी — दोपहर में एक बार सात्विक भोजन, रात से अनाज त्यागें
5 नवंबर (गुरुवार) रमा एकादशी — सूर्योदय से व्रत शुरू, पूजा-पाठ, रात्रि जागरण
6 नवंबर (शुक्रवार) द्वादशी — सूर्योदय के बाद पारण, व्रत समाप्त
19 नवंबर (गुरुवार) दशमी — देवउठनी से पहले एक सात्विक भोजन, संध्या से संयम
20 नवंबर (शुक्रवार) देवउठनी एकादशी (स्मार्त) — व्रत, तुलसी विवाह, चातुर्मास समाप्ति
21 नवंबर (शनिवार) वैष्णव एकादशी — पारण दोपहर 12:08 बजे से, व्रत समाप्त

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नवंबर 2026 में एकादशी कितनी बार आती है?

नवंबर 2026 में कुल दो एकादशी आती हैं। पहली रमा एकादशी 5 नवंबर को और दूसरी देवउठनी एकादशी 20 नवंबर को है। एक कृष्ण पक्ष में और दूसरा शुक्ल पक्ष में। दोनों का धार्मिक महत्व अलग-अलग है और दोनों कार्तिक मास में पड़ती हैं।

रमा एकादशी और देवउठनी एकादशी में क्या फर्क है?

रमा एकादशी कृष्ण पक्ष की एकादशी है, जो माता लक्ष्मी और विष्णु पूजा से जुड़ी मानी जाती है। देवउठनी एकादशी शुक्ल पक्ष की है और इसे चातुर्मास के अंत का प्रतीक माना जाता है। पारंपरिक मान्यता के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु योगनिद्रा से जागते हैं और मांगलिक कार्य फिर शुरू होते हैं।

देवउठनी एकादशी का पारण कब है?

नवंबर 2026 में देवउठनी एकादशी का पारण 21 नवंबर को दोपहर 12:08 बजे से शुरू होगा और 22 नवंबर को प्रातः 04:56 बजे तक है। यह समय नई दिल्ली के पंचांग के अनुसार है। अन्य शहरों में स्थानीय सूर्योदय के अनुसार थोड़ा अंतर हो सकता है।

एकादशी के दिन क्या खाना वर्जित है?

कई परंपराओं में एकादशी के दिन चावल, गेहूं, दाल और अन्य अनाजों से परहेज किया जाता है।फल, दूध, साबूदाना, कुट्टू, सिंघाड़े का आटा, शकरकंद और सेंधा नमक खाया जा सकता है। तामसिक भोजन, प्याज और लहसुन भी इस दिन नहीं खाए जाते।

क्या स्मार्त और वैष्णव एकादशी की तारीख अलग होती है?

हां, कभी-कभी अलग होती है। देवउठनी एकादशी 2026 में स्मार्त परंपरा में 20 नवंबर और वैष्णव परंपरा में 21 नवंबर को है। यह अंतर इसलिए होता है क्योंकि वैष्णव पंचांग सूर्योदय से पहले के अरुणोदय काल को भी ध्यान में रखता है। इसलिए अपनी परंपरा के अनुसार तारीख तय करना जरूरी है।

निष्कर्ष

नवंबर 2026 में एकादशी दो बार आती है। रमा एकादशी 5 नवंबर और देवउठनी एकादशी 20 नवंबर को। दोनों का अपना संदर्भ और परंपरा है।

तिथि शुरू होने का समय जानना इसलिए जरूरी है क्योंकि व्रत का दिन, संकल्प और पारण सब कुछ इसी पर निर्भर करता है।

पारंपरिक मान्यताओं में पारण का समय महत्वपूर्ण माना जाता है।

समय की जानकारी, परंपरा की समझ और थोड़ी-सी तैयारी मिलकर एकादशी व्रत को पूर्ण बनाते हैं।

यहां दी गई जानकारी सामान्य संदर्भ के लिए है।

स्थानीय पंचांग के अनुसार समय थोड़ा अलग हो सकता है।

अस्वीकरण: यह लेख केवल सामान्य जानकारी और सांस्कृतिक संदर्भ के लिए है। इसमें दी गई तिथि, समय और व्रत संबंधी जानकारी पारंपरिक मान्यताओं और पंचांग गणना पर आधारित है। यह किसी धार्मिक परिणाम की गारंटी नहीं है। व्रत और पूजा-पाठ से जुड़े निर्णय अपनी परंपरा, कुल रीति और श्रद्धा के अनुसार लें।

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Shiv Kumar Pandit

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मैं, शिव कुमार पंडित, इस प्लेटफ़ॉर्म का Co-Founder और वरिष्ठ कंटेंट रिसर्चर हूं। मुझे भारतीय संस्कृति, शुभ मुहूर्त, चोघड़िया, पंचांग और पारंपरिक ज्ञान से जुड़े विषयों पर रिसर्च करना और सरल भाषा में जानकारी साझा करना पसंद है, ताकि हर पाठक आसानी से सही जानकारी समझ सके।

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