अगर आप गूगल पर "Mavas Kab Hai" या "अमावस्या कब है" टाइप करके यहां पहुंचे हैं, तो सीधा जवाब यह है कि पंचांग के अनुसार अमावस्या तिथि 10 सितंबर 2026 की सुबह करीब 10:33 बजे शुरू होकर 11 सितंबर 2026 की सुबह लगभग 8:56 से 8:58 बजे तक रहती है।
इस वजह से कई पंचांगों में अमावस्या की तारीख 10 सितंबर लिखी मिलती है और कुछ में 11 सितंबर, क्योंकि हिंदू पंचांग में दिन की गिनती सूर्योदय से होती है, तिथि से नहीं।
यही उलझन सबसे ज्यादा लोगों को परेशान करती है। कोई एक वेबसाइट कुछ और तारीख बताती है, कोई दूसरी कुछ और, और आम आदमी सोच में पड़ जाता है कि आखिर सही तारीख कौन सी मानें।
इस लेख में मैं यह उलझन आसान भाषा में सुलझाने की कोशिश कर रहा हूं, साथ ही यह भी बताऊंगा कि अमावस्या तिथि निकाली कैसे जाती है, इसका असली मतलब क्या है और साल 2026 में बाकी अमावस्याएं कब-कब पड़ेंगी।
सितंबर 2026 की अमावस्या सही तारीख और समय
भाद्रपद माह की यह अमावस्या "पितोरी अमावस्या" के नाम से भी जानी जाती है। नीचे दी गई टेबल में तिथि शुरू और खत्म होने का समय दिया गया है, जो उज्जैन के समय अनुसार गिना गया है — अन्य शहरों में यह समय कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकता है।
विवरण | जानकारी |
|---|---|
तिथि | भाद्रपद कृष्ण अमावस्या (पितोरी अमावस्या) |
तिथि प्रारंभ | 10 सितंबर 2026, सुबह लगभग 10:33 बजे |
तिथि समाप्त | 11 सितंबर 2026, सुबह लगभग 8:56–8:58 बजे |
व्रत/पूजा का दिन | गुरुवार, 10 सितंबर 2026 (पितोरी व्रत हेतु) |
पंचांग अनुसार अमावस्या दिवस | शुक्रवार, 11 सितंबर 2026 |
स्थान संदर्भ | उज्जैन, भारत (अन्य शहरों में समय अलग हो सकता है) |
(यह समय पंचांग गणना पर आधारित है। अपने शहर की सटीक टाइमिंग के लिए स्थानीय पंचांग या दृक पंचांग जैसी वेबसाइट पर एक बार जरूर देख लें, क्योंकि सूर्योदय-सूर्यास्त का समय बदलने से तिथि का हिसाब भी थोड़ा बदल जाता है।)
एक बात ध्यान देने वाली है — पितोरी अमावस्या का व्रत ज्यादातर परिवारों में 10 सितंबर को ही रखा जाता है, क्योंकि यह व्रत बच्चों की सलामती और परिवार की खुशहाली के लिए माताओं द्वारा रखा जाने वाला व्रत है, और इसका संबंध शाम की पूजा से जुड़ा है।
वहीं तर्पण या पितृ-कर्म जैसे काम आमतौर पर उस दिन किए जाते हैं जिस दिन सूर्योदय के समय अमावस्या तिथि चल रही हो, यानी इस बार 11 सितंबर की सुबह।
अमावस्या का मतलब क्या होता है, यह कैसे तय होती है
अमावस्या शब्द संस्कृत के "अमावास्या" से आया है, और इसका सीधा मतलब है वह रात जब चांद आसमान में दिखता ही नहीं।
गुजराती और राजस्थानी-मारवाड़ी बोली में इसी को "मावस" या "अमास" कहा जाता है — यह बस क्षेत्रीय बोलचाल का फर्क है, अर्थ वही रहता है, यानी नए चंद्रमा का दिन।
पंचांग में तिथि सूरज और चांद की स्थिति के फर्क से निकाली जाती है। चांद और सूरज के बीच का कोणीय अंतर जब 12 डिग्री बढ़ता है, तब एक तिथि बदल जाती है — इस तरह एक चंद्र महीने में कुल 30 तिथियां होती हैं।
जब यह अंतर लगभग 360 डिग्री यानी शून्य के करीब पहुंच जाता है, तब चांद और सूरज एक ही दिशा में आ जाते हैं, चांद की चमकीली सतह हमारी तरफ नहीं होती, और इसी रात को अमावस्या कहा जाता है।
यही वजह है कि अमावस्या हर हिंदू महीने में एक बार जरूर आती है — यह किसी खास साल या महीने की बात नहीं, बल्कि चांद और सूरज की नियमित खगोलीय गति का नतीजा है।
आज के समय में ज्यादातर पंचांग वेबसाइट और ऐप्स यह गणना कंप्यूटर के जरिए बहुत सटीक तरीके से करते हैं, जिसमें सूर्य और चंद्रमा की वास्तविक कक्षीय गति को ध्यान में रखा जाता है, न कि सिर्फ पुरानी अनुमानित तालिकाओं को।
इसीलिए अलग-अलग शहरों के लिए अमावस्या का शुरू और खत्म होने का समय कुछ मिनट अलग दिख सकता है, जबकि तारीख आमतौर पर एक ही रहती है।
पितोरी अमावस्या को खास क्यों माना जाता है
भाद्रपद माह की कृष्ण पक्ष अमावस्या को कुछ क्षेत्रों में पितोरी अमावस्या के नाम से मनाया जाता है। मान्यता के अनुसार इस दिन माताएं अपनी संतान की सलामती के लिए व्रत रखती हैं और मातृका देवियों की पूजा करती हैं।
यह एक क्षेत्रीय और पारिवारिक परंपरा है, जो हर जगह एक जैसे तरीके से नहीं मनाई जाती — कई घरों में यह व्रत बहुत सामान्य ढंग से किया जाता है, तो कुछ परिवारों में इसके लिए विशेष पूजा-विधि अपनाई जाती है।
यहां यह समझना जरूरी है कि यह एक धार्मिक-सांस्कृतिक परंपरा है, वैज्ञानिक तथ्य नहीं।
अगर आपके घर में यह व्रत परंपरा से चला आ रहा है, तो अपने परिवार के बड़ों से विधि जरूर पूछ लें, क्योंकि क्षेत्र के अनुसार पूजा का तरीका बदल सकता है।
साल 2026 की सभी अमावस्या तिथियां एक नजर में
अगर आप पूरे साल की योजना बनाना चाहते हैं — जैसे पितृ तर्पण, दान-पुण्य या किसी खास पूजा की तारीख तय करना — तो नीचे दी गई सूची आपके काम आएगी। यह सूची पंचांग आधारित है और भारत के सामान्य समय अनुसार दी गई है।
महीना | तारीख | दिन | नाम/खासियत |
|---|---|---|---|
जनवरी | 18 | रविवार | माघ अमावस्या (मौनी अमावस्या) |
फरवरी | 17 | मंगलवार | फाल्गुन अमावस्या |
मार्च | 19 | गुरुवार | चैत्र अमावस्या |
अप्रैल | 17 | शुक्रवार | वैशाख अमावस्या |
मई | 16 | शनिवार | ज्येष्ठ अमावस्या (शनि जयंती के आसपास) |
जून | 15 | सोमवार | अधिक ज्येष्ठ अमावस्या (सोमवती) |
जुलाई | 14 | मंगलवार | आषाढ़ अमावस्या |
अगस्त | 12 | बुधवार | श्रावण अमावस्या (हरियाली अमावस्या) |
सितंबर | 11 | शुक्रवार | भाद्रपद अमावस्या (पितोरी अमावस्या) |
अक्टूबर | 10 | शनिवार | आश्विन अमावस्या (सर्वपितृ/महालया अमावस्या) |
नवंबर | 9 | सोमवार | कार्तिक अमावस्या (दीपावली, लक्ष्मी पूजा) |
दिसंबर | 8 | मंगलवार | मार्गशीर्ष अमावस्या (भौमवती) |
(तारीखें पंचांग गणना पर आधारित हैं, कुछ जगहों पर तिथि क्षय-वृद्धि के चलते एक दिन आगे-पीछे भी दिख सकती है। सटीक जानकारी के लिए अपने शहर का पंचांग चेक करें।)
सोमवती, भौमवती, शनि और मौनी अमावस्या में फर्क क्या है
अमावस्या हर महीने आती है, लेकिन जब यह किसी खास वार यानी दिन पर पड़ती है, तो उसे एक अलग नाम दिया जाता है।
यह नामकरण परंपरा और मान्यता पर आधारित है, न कि किसी अलग खगोलीय घटना पर — यानी अमावस्या की गणना वही रहती है, बस उस दिन के हिसाब से नाम और पूजा का स्वरूप बदल जाता है।
नाम | कब पड़ती है | पारंपरिक मान्यता |
|---|---|---|
सोमवती अमावस्या | सोमवार को पड़ने वाली अमावस्या | शिव पूजा और पीपल पूजन से जुड़ी मान्यता, कई परिवार इस दिन को शुभ मानते हैं |
भौमवती अमावस्या | मंगलवार को पड़ने वाली अमावस्या | हनुमान पूजा से जुड़ी परंपरा, कुछ क्षेत्रों में कर्ज से मुक्ति की मान्यता |
शनि अमावस्या | शनिवार को पड़ने वाली अमावस्या | शनि देव की पूजा, शनि दोष शांति की पारंपरिक मान्यता |
मौनी अमावस्या | माघ माह की अमावस्या | मौन व्रत और पवित्र नदी स्नान की परंपरा, ज्ञान और तप से जुड़ी मान्यता |
इन सभी नामों के पीछे सदियों पुरानी परंपराएं और लोक-मान्यताएं हैं, जिन्हें ज्योतिष और धार्मिक ग्रंथों के हवाले से बताया जाता है।
इन्हें वैज्ञानिक तथ्य के रूप में नहीं, बल्कि सांस्कृतिक विश्वास के तौर पर समझना बेहतर रहता है।
पितृ पक्ष और सर्वपितृ अमावस्या से इसका संबंध
अगर आप सितंबर की इस अमावस्या के बाद की योजना बना रहे हैं, तो एक जरूरी जानकारी यह है कि 2026 में पितृ पक्ष 26 सितंबर से शुरू होकर 10 अक्टूबर 2026 को सर्वपितृ अमावस्या (महालया अमावस्या) के साथ खत्म होगा।
यह सोलह दिन का वह समय है जिसमें परिवार अपने पूर्वजों को श्रद्धांजलि देने के लिए तर्पण और श्राद्ध जैसे कर्म करते हैं।
अमावस्या पर क्या करना उचित माना जाता है
कई परिवारों में अमावस्या को लेकर कुछ पारंपरिक बातें मानी जाती हैं। यह पूरी तरह क्षेत्र, परंपरा और व्यक्तिगत विश्वास पर निर्भर करता है, इसलिए इन्हें सुझाव के रूप में देखें, नियम के रूप में नहीं।
सुबह स्नान करके पितरों को जल और तिल मिलाकर तर्पण करना, ऐसा कई परिवारों में परंपरा से चला आ रहा है।
पीपल के पेड़ के नीचे दीप जलाना या जल चढ़ाना, विशेषकर सोमवती अमावस्या पर।
जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र या अन्न का दान करना।
घर की सफाई और सात्विक भोजन का ध्यान रखना, कुछ परिवार इस दिन प्याज-लहसुन से परहेज करते हैं।
नए और बड़े काम, जैसे गृह प्रवेश या नई शुरुआत, कुछ पारंपरिक पंचांगों में इस दिन के लिए टाला जाता है — हालांकि यह मान्यता है, कोई तय नियम नहीं।
क्या अमावस्या को अशुभ मानना सही है?
यह सवाल बहुत आम है, और इसका जवाब भी बहुत सीधा नहीं है। खगोलीय नजरिए से अमावस्या सिर्फ वह रात है जब चांद पृथ्वी और सूरज के बीच आ जाता है, इसलिए उसकी रोशनी हमें दिखाई नहीं देती — यह पूरी तरह एक प्राकृतिक और नियमित घटना है, न कि कोई अशुभ संकेत।
धार्मिक और सांस्कृतिक नजरिए से अलग-अलग परंपराओं में अलग राय है।
कुछ मान्यताओं में इसे पितरों को याद करने और आत्मचिंतन का दिन बताया गया है, जो शुभ माना जाता है, जबकि कुछ लोक-परंपराओं में इसे नई शुरुआत के लिए उपयुक्त नहीं माना जाता।
दोनों ही राय आस्था और परंपरा पर आधारित हैं, इसलिए किसी एक को पूरी तरह सही या गलत कहना उचित नहीं होगा। बेहतर यही है कि आप अपने परिवार और क्षेत्र की परंपरा के अनुसार फैसला लें।
व्यावहारिक उदाहरण शहर के हिसाब से समय क्यों बदलता है
मान लीजिए दिल्ली में रहने वाला कोई व्यक्ति और चेन्नई में रहने वाला कोई व्यक्ति एक ही दिन पूजा का मुहूर्त निकालना चाहें।
दोनों के लिए तिथि की तारीख अक्सर एक ही रहती है, लेकिन तिथि शुरू और खत्म होने का ठीक समय कुछ मिनट अलग हो सकता है, क्योंकि यह सूर्योदय के स्थानीय समय पर निर्भर करता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
मावस और अमावस्या में क्या फर्क है?
कोई फर्क नहीं है। "मावस" या "अमास" गुजराती, राजस्थानी और मारवाड़ी बोली में इसी अमावस्या को कहने का क्षेत्रीय तरीका है, जो संस्कृत शब्द अमावास्या से ही निकला है।
सितंबर 2026 में पितोरी व्रत किस दिन रखा जाएगा?
ज्यादातर पंचांगों और समाचार स्रोतों के अनुसार पितोरी व्रत 10 सितंबर 2026, गुरुवार को रखा जाएगा, क्योंकि तिथि उसी दिन दोपहर से शुरू हो रही है।
क्या अमावस्या हर महीने एक ही तारीख को आती है?
नहीं। अमावस्या चांद के हिसाब से तय होती है, इसलिए हर हिंदू महीने में इसकी तारीख अंग्रेजी कैलेंडर के हिसाब से बदलती रहती है। यही वजह है कि हर महीने अलग तारीख पर अमावस्या पड़ती है।
सर्वपितृ अमावस्या 2026 में कब है?
2026 में सर्वपितृ अमावस्या (महालया अमावस्या) 10 अक्टूबर, शनिवार को पड़ रही है, जो पितृ पक्ष की आखिरी और सबसे महत्वपूर्ण तिथि मानी जाती है।
अमावस्या पर तर्पण किस समय करना उचित माना जाता है?
परंपरा के अनुसार तर्पण सुबह स्नान के बाद और सूर्योदय के आसपास किया जाता है, क्योंकि यह समय पितरों की पूजा के लिए उचित माना जाता है। सटीक समय के लिए अपने शहर का पंचांग देखना बेहतर रहेगा।
आखिरी बात
अगर आपका सवाल सिर्फ यह था कि "Mavas Kab Hai", तो इस महीने का जवाब है — भाद्रपद अमावस्या 10-11 सितंबर 2026 को है, और तिथि के हिसाब से पितोरी व्रत 10 सितंबर को रखा जाएगा।
इसके आगे साल भर की जो तारीखें ऊपर दी गई हैं, वे आपकी पूजा और पारिवारिक परंपराओं की योजना बनाने में मदद करेंगी।
हर परिवार और क्षेत्र की अपनी परंपरा होती है, इसलिए किसी भी व्रत-पूजा से पहले अपने घर के पंचांग या पुरोहित से एक बार जरूर पुष्टि कर लें।
स्रोत और संदर्भ: तिथि गणना संबंधी जानकारी दृक पंचांग (Drik Panchang) की सार्वजनिक पंचांग तालिका पर आधारित है — drikpanchang.com। पितृ पक्ष से जुड़ी सामान्य जानकारी के लिए विकिपीडिया का लेख भी संदर्भ के रूप में देखा जा सकता है।
लेखक और संपादकीय जानकारी: यह लेख choghadiyas.in की संपादकीय टीम द्वारा पंचांग स्रोतों की जांच के बाद तैयार किया गया है। सभी धार्मिक और पारंपरिक जानकारी को मान्यता के रूप में प्रस्तुत किया गया है, न कि स्थापित वैज्ञानिक तथ्य के रूप में। तारीख और समय में स्थानीय पंचांग के अनुसार मामूली अंतर संभव है।
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