हर साल गणेश चतुर्थी खत्म होते-होते एक ही सवाल हर घर में गूंजने लगता है — गणेश विसर्जन कब है। कुछ लोग डेढ़ दिन में बप्पा को विदा कर देते हैं, कुछ पांचवें दिन, और बहुत से परिवार पूरे दस दिन बाद अनंत चतुर्दशी पर विसर्जन करते हैं।
इसी वजह से इंटरनेट पर कई अलग-अलग तारीखें दिख जाती हैं और कंफ्यूजन बढ़ जाता है।
सीधी बात करूं तो 2026 में गणेश उत्सव की मुख्य और सबसे बड़ी विसर्जन तारीख 25 सितंबर, शुक्रवार है, जो अनंत चतुर्दशी के दिन पड़ रही है। लेकिन अगर आपका परिवार डेढ़, तीन, पांच या सात दिन वाली परंपरा मानता है, तो आपकी तारीख इससे अलग होगी।
इस लेख में मैं दोनों तरह की जानकारी — मुख्य तारीख और बाकी सभी विकल्प — दोनों को साफ-साफ बताने वाला हूं, ताकि आप बिना किसी उलझन के अपने घर की तारीख तय कर सकें।
पंचांग की तारीखें और मुहूर्त शहर के हिसाब से थोड़े बदल सकते हैं, क्योंकि इनकी गणना सूर्योदय-सूर्यास्त पर आधारित होती है।
इस लेख में दी गई सभी तारीखें ड्रिक पंचांग जैसे मान्य स्रोतों पर आधारित नई दिल्ली के हिसाब से हैं, इसलिए अपने शहर के लिए स्थानीय पंचांग से एक बार पुष्टि कर लेना बेहतर रहेगा।
2026 में गणेश विसर्जन की मुख्य तारीख
गणेश चतुर्थी 2026 में 14 सितंबर, सोमवार से शुरू हो रही है। इसी दिन घरों और पंडालों में गणपति बप्पा की स्थापना होती है।
इसके बाद दस दिन की पूजा, आरती और उत्सव के बाद उत्सव का समापन अनंत चतुर्दशी, यानी 25 सितंबर 2026, शुक्रवार को होता है, और इसी दिन सबसे बड़ा और सार्वजनिक गणेश विसर्जन किया जाता है।
चतुर्थी तिथि की बात करें तो यह 14 सितंबर सुबह लगभग 7:06 बजे शुरू होकर 15 सितंबर सुबह लगभग 7:44 बजे तक रहती है।
यह समय दिल्ली के पंचांग के अनुसार है, और दूसरे शहरों में इसमें कुछ मिनटों का अंतर हो सकता है।
गणेश उत्सव से विसर्जन तक का पूरा शेड्यूल
यह समझना जरूरी है कि विसर्जन की एक नहीं, बल्कि कई तारीखें होती हैं।
परिवार अपनी परंपरा और सुविधा के हिसाब से इनमें से कोई भी दिन चुन सकते हैं। नीचे दी गई टेबल में मैंने पूरा शेड्यूल एक जगह रखा है, जिससे तुलना करना आसान हो जाए।
| विसर्जन की अवधि | तारीख (2026) | दिन | आम तौर पर कौन करता है |
|---|---|---|---|
| डेढ़ दिन (1.5 दिन) | 15 सितंबर | मंगलवार | जिन घरों में जगह की कमी हो या शुरुआती विसर्जन की परंपरा हो |
| तीसरा दिन | 16 सितंबर | बुधवार | छोटी मूर्ति रखने वाले परिवार |
| पांचवां दिन | 18 सितंबर | शुक्रवार | कई महाराष्ट्रीयन घर और सोसाइटी |
| सातवां दिन | 20 सितंबर | रविवार | कुछ पारंपरिक परिवार |
| दस दिन / अनंत चतुर्दशी | 25 सितंबर | शुक्रवार | सार्वजनिक पंडाल और मुख्य विसर्जन जुलूस |
ध्यान देने वाली बात यह है कि यह सभी दिन विषम संख्या (odd number) में आते हैं। पंचांग में इसके पीछे यह मान्यता बताई जाती है कि तिथियों की गणना में यह क्रम सही रहता है, हालांकि यह एक पारंपरिक व्यवहार है, वैज्ञानिक नियम नहीं।
अनंत चतुर्दशी और गणेश विसर्जन एक ही दिन क्यों पड़ते हैं
यह सवाल अक्सर लोगों को उलझाता है — अनंत चतुर्दशी और गणेश विसर्जन एक ही दिन क्यों होते हैं, क्या यह एक ही त्योहार है? जवाब है नहीं, यह दो अलग-अलग परंपराएं हैं जो संयोग से एक ही तिथि पर पड़ जाती हैं।
अनंत चतुर्दशी भाद्रपद माह की शुक्ल चतुर्दशी तिथि को मनाई जाती है, और इस दिन भगवान विष्णु के अनंत रूप की पूजा की जाती है।
कई परिवारों में इस दिन 14 गांठों वाला अनंत सूत्र हाथ में बांधने की परंपरा है, जो 14 लोकों का प्रतीक माना जाता है। यह पूरी तरह विष्णु से जुड़ा वृत (व्रत) है।
दूसरी तरफ गणेश उत्सव, गणेश चतुर्थी से शुरू होकर दस दिन चलता है, और उसका आखिरी दिन ठीक उसी चतुर्दशी तिथि पर आकर खत्म होता है।
यही वजह है कि दोनों त्योहार एक ही तारीख पर मनाए जाते हैं, लेकिन इनकी पूजा-विधि, कथा और मान्यता पूरी तरह अलग है। इसे लेकर अनंत चतुर्दशी व्रत कथा पर हमने अलग से विस्तार से लिखा है, जहां आप विष्णु पूजा की पूरी विधि पढ़ सकते हैं।
चतुर्दशी तिथि की शुरुआत और समाप्ति
25 सितंबर 2026 को चतुर्दशी तिथि की शुरुआत और खत्म होने का समय अलग-अलग पंचांग स्रोतों में थोड़ा अलग-अलग दिखाया गया है, जो शहर और गणना पद्धति के अंतर की वजह से होता है।
ज्यादातर प्रमुख पंचांग के अनुसार चतुर्दशी तिथि 24 सितंबर की रात से शुरू होकर 25 सितंबर की रात तक चलती है। इसीलिए मुख्य विसर्जन पूरे दिन 25 सितंबर को ही किया जाता है।
क्योंकि तिथि की सटीक शुरुआत और समाप्ति का समय शहर के हिसाब से कुछ घंटों तक बदल सकता है, इसलिए मैं हमेशा यही सुझाव देता हूं कि अंतिम पूजा मुहूर्त तय करने से पहले अपने शहर का पंचांग एक बार Drik Panchang जैसी भरोसेमंद वेबसाइट पर जरूर देख लें।
कई सालों से त्योहारों की तारीखें और मुहूर्त लिखते-जांचते हुए मैंने यह बात हमेशा महसूस की है कि एक ही तारीख पर भी शहर बदलने से मुहूर्त के समय में फर्क आ जाता है, इसलिए सिर्फ एक ही सोर्स पर भरोसा करना सही नहीं है।
गणेश विसर्जन 2026 का शुभ मुहूर्त (चौघड़िया)
चौघड़िया मुहूर्त एक पारंपरिक पंचांग पद्धति है जिसमें दिन और रात को शुभ और अशुभ अवधियों में बांटा जाता है।
विसर्जन के लिए आम तौर पर चर, लाभ, अमृत और शुभ चौघड़िया को अनुकूल माना जाता है। नीचे दी गई टेबल नई दिल्ली के पंचांग पर आधारित है, इसे केवल एक सामान्य दिशा-निर्देश के रूप में देखें।
| समय अवधि | चौघड़िया | अनुमानित समय (25 सितंबर) |
|---|---|---|
| सुबह | चर, लाभ, अमृत | सुबह 06:11 से 10:42 बजे तक |
| दोपहर | शुभ | दोपहर 12:13 से 01:43 बजे तक |
| शाम | चर | शाम 04:44 से 06:14 बजे तक |
| रात | लाभ | रात 09:14 से 10:43 बजे तक |
इन समयों में कुछ मिनटों का अंतर आपके शहर के हिसाब से आ सकता है, इसलिए सटीक समय के लिए स्थानीय पंचांग देखना बेहतर है।
एक व्यावहारिक बात भी बता दूं — बड़े शहरों में शाम और रात के मुहूर्त में भीड़ और ट्रैफिक ज्यादा होता है, इसलिए अगर आप घर पर या छोटे स्तर पर विसर्जन करना चाहते हैं तो सुबह का समय आमतौर पर ज्यादा शांत और सुविधाजनक रहता है।
विसर्जन विधि — घर पर या सार्वजनिक स्थान पर कैसे करें
विसर्जन से पहले उत्तर पूजा करना पारंपरिक रूप से जरूरी माना जाता है। यह एक तरह की विदाई पूजा होती है, जिसमें बप्पा से पूरे उत्सव के दौरान हुई किसी भी कमी के लिए क्षमा मांगी जाती है।
नीचे दिए स्टेप एक सामान्य क्रम में हैं, हालांकि परिवार और क्षेत्र के अनुसार इसमें छोटे-छोटे अंतर हो सकते हैं।
सबसे पहले घर की सफाई करें और पूजा स्थान को साफ करें।
गणपति बप्पा की आखिरी आरती करें और मोदक, फल व नैवेद्य का भोग लगाएं।
उत्तर पूजा करें — इसमें अक्षत, फूल, हल्दी-कुमकुम और दूर्वा चढ़ाकर बप्पा से विदाई मांगी जाती है।
मूर्ति को हल्के हाथों से हिलाकर उसकी दिशा घर की ओर मोड़ें, ताकि बप्पा घर को अंतिम बार देख सकें, ऐसी मान्यता है।
मूर्ति के साथ नारियल, फूल, चावल और कुछ सिक्के रखकर एक छोटी पोटली बनाएं।
मूर्ति को सम्मान के साथ उठाकर जल स्रोत तक ले जाएं।
"गणपति बप्पा मोरया, पुढच्या वर्षी लवकर या" का जाप करते हुए मूर्ति को धीरे-धीरे पानी में विसर्जित करें।
विसर्जन के बाद इस्तेमाल हुए फूल-पत्तों (निर्मल्य) को पानी में न बहाएं, बल्कि उन्हें अलग से इकट्ठा करें और खाद या मिट्टी में मिला दें।
पर्यावरण के अनुकूल विसर्जन कैसे करें
पिछले कुछ सालों में नदियों और तालाबों में प्रदूषण की समस्या को देखते हुए इको-फ्रेंडली विसर्जन का चलन तेजी से बढ़ा है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) ने मूर्ति निर्माण और विसर्जन को लेकर समय-समय पर दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिनमें प्लास्टर ऑफ पेरिस (POP), प्लास्टिक और थर्मोकोल जैसी सामग्री के इस्तेमाल पर रोक की बात कही गई है। अधिक जानकारी के लिए CPCB की आधिकारिक वेबसाइट पर दिशा-निर्देश देखे जा सकते हैं।
घर पर छोटे स्तर पर इको-फ्रेंडली विसर्जन करना काफी आसान है:
मिट्टी (शाडू) से बनी मूर्ति ही खरीदें, इससे विसर्जन के दौरान पानी में घुलना आसान होता है।
एक बड़ी बाल्टी या टब में साफ पानी भरें।
उत्तर पूजा और आरती पहले की तरह ही पूरी करें।
मूर्ति को बाल्टी में रखें और उसे कुछ घंटों से एक दिन तक धीरे-धीरे घुलने दें।
घुली हुई मिट्टी को किसी पेड़ या तुलसी के गमले में डाल दें, इससे मिट्टी वापस प्रकृति में लौट जाती है।
यह तरीका खासतौर पर उन परिवारों के लिए उपयोगी है जो फ्लैट या अपार्टमेंट में रहते हैं और नदी या तालाब तक जाना मुश्किल होता है।
डेढ़, तीन, पांच और सात दिन का विसर्जन अलग-अलग क्यों होता है
यह जरूरी नहीं कि हर घर दस दिन तक ही गणपति रखे। परंपरा, जगह की उपलब्धता और परिवार की सुविधा के अनुसार विसर्जन की अवधि बदलती रहती है।
कुछ पारंपरिक ग्रंथों और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मूर्ति में स्थापित की गई ऊर्जा एक दिन के बाद कम होने लगती है, इसलिए कई परिवार जल्दी विसर्जन करते हैं। यह एक धार्मिक मान्यता है, इसे वैज्ञानिक तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
मुंबई और पुणे जैसे शहरों में डेढ़ दिन और पांच दिन का विसर्जन ज्यादा लोकप्रिय माना जाता है, जबकि बड़े सार्वजनिक पंडाल आमतौर पर पूरे दस दिन उत्सव मनाकर अनंत चतुर्दशी पर ही विसर्जन करते हैं।
यह पूरी तरह क्षेत्रीय परंपरा और स्थानीय रीति पर निर्भर करता है, इसलिए किसी एक तरीके को "सही" या "गलत" कहना उचित नहीं होगा।
कुछ जरूरी सावधानियां
मूर्ति ले जाते समय बच्चों को पानी के पास बिना निगरानी के न छोड़ें।
गहरे या तेज बहाव वाले पानी में खुद जाकर विसर्जन करने से बचें, स्थानीय प्रशासन द्वारा बनाए गए विसर्जन कुंड का इस्तेमाल करें।
मूर्ति के साथ इस्तेमाल हुए प्लास्टिक की सजावट, थर्मोकोल आदि को पानी में न बहाएं।
यदि परिवार में कोई सूतक या सोयर की स्थिति हो, तो पूजा और विसर्जन को लेकर स्थानीय पंडित या परिवार की परंपरा से सलाह लेना बेहतर रहता है।
सार्वजनिक पंडालों में भीड़ अधिक होने पर बुजुर्गों और बच्चों का खास ध्यान रखें।
लोग विसर्जन के दौरान अक्सर क्या गलतियां कर देते हैं
कई बार लोग जल्दी में उत्तर पूजा को छोड़ देते हैं और सीधे मूर्ति उठा लेते हैं, जबकि उत्तर पूजा को विदाई का सबसे अहम हिस्सा माना जाता है। कुछ लोग सजावट में इस्तेमाल हुई प्लास्टिक और थर्मोकोल की चीजें मूर्ति के साथ ही पानी में बहा देते हैं, जो पर्यावरण के लिए हानिकारक है।
एक और सामान्य गलती यह है कि लोग मुहूर्त देखे बिना ही किसी भी समय विसर्जन कर देते हैं, जबकि थोड़ा समय निकालकर उस दिन का उचित चौघड़िया देख लेना ज्यादा बेहतर रहता है, खासकर जब सार्वजनिक जुलूस की योजना बनाई जा रही हो।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
गणेश विसर्जन 2026 में सबसे बड़ी और मुख्य तारीख कौन सी है?
2026 में मुख्य और सबसे बड़ी विसर्जन तारीख 25 सितंबर, शुक्रवार है, जो अनंत चतुर्दशी के दिन पड़ रही है। इस दिन ज्यादातर सार्वजनिक पंडाल और बड़े जुलूस विसर्जन करते हैं।
क्या अनंत चतुर्दशी और गणेश विसर्जन एक ही त्योहार है?
नहीं। अनंत चतुर्दशी विष्णु से जुड़ा एक अलग व्रत है, जबकि गणेश विसर्जन गणेश उत्सव का आखिरी दिन है। दोनों संयोग से एक ही तिथि पर आते हैं, लेकिन इनकी पूजा-विधि और मान्यता अलग-अलग है।
अगर मैं मुहूर्त वाले समय पर विसर्जन नहीं कर पाया, तो क्या यह अशुभ माना जाएगा?
चौघड़िया मुहूर्त एक पारंपरिक सुझाव है, जो शुभ समय चुनने में मदद करता है। अगर किसी वजह से आप उस समय पर विसर्जन नहीं कर पाते, तो श्रद्धा और सम्मान के साथ किया गया विसर्जन ज्यादा महत्व रखता है, ऐसा ज्यादातर पंडित और धार्मिक ग्रंथ बताते हैं।
घर पर विसर्जन करने के लिए किस तरह की मूर्ति सही रहती है?
घर पर बाल्टी या टब में विसर्जन के लिए मिट्टी (शाडू मिट्टी) से बनी छोटी मूर्ति सबसे उपयुक्त रहती है, क्योंकि यह पानी में आसानी से घुल जाती है और प्लास्टर ऑफ पेरिस जितनी हानिकारक नहीं होती।
क्या डेढ़ दिन में विसर्जन करना पूरे दस दिन रखने से कम शुभ है?
नहीं। यह पूरी तरह परिवार की परंपरा और सुविधा पर निर्भर करता है। धार्मिक दृष्टि से किसी भी अवधि को दूसरे से कम या ज्यादा शुभ नहीं बताया गया है, बल्कि यह क्षेत्रीय रीति-रिवाज का हिस्सा है।
निष्कर्ष
अगर सीधी भाषा में कहूं, तो 2026 में गणेश विसर्जन की मुख्य तारीख 25 सितंबर, शुक्रवार यानी अनंत चतुर्दशी है, जबकि परिवार अपनी परंपरा के अनुसार 15, 16, 18 या 20 सितंबर को भी विसर्जन कर सकते हैं।
सबसे जरूरी बात यह है कि विसर्जन सम्मान, श्रद्धा और थोड़ी सावधानी के साथ किया जाए, ताकि यह त्योहार खुशी के साथ पूरा हो और पर्यावरण को भी नुकसान न पहुंचे।
मुहूर्त और तिथि की सटीक जानकारी के लिए हमेशा अपने शहर का पंचांग एक बार जरूर देख लें, और अगर स्थापना और पूजा विधि की पूरी जानकारी चाहिए तो गणेश चतुर्थी 2026 तिथि और पूजा विधि पर हमारा विस्तृत लेख पढ़ सकते हैं।
लेखक और संपादकीय जानकारी: यह लेख Choghadiyas.in की संपादकीय टीम द्वारा तैयार किया गया है, जो कई सालों से पंचांग, तिथि और मुहूर्त से जुड़ी जानकारी को शोध कर, कई भरोसेमंद पंचांग स्रोतों से तुलना करके प्रकाशित करती है।
तारीख और मुहूर्त क्षेत्रीय पंचांग भेद के कारण थोड़े बदल सकते हैं, इसलिए अंतिम पुष्टि के लिए स्थानीय पंडित या पंचांग से सलाह लेने की सलाह दी जाती है।
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