Ahoi Ashtami Kab Hai? तिथि, मुहूर्त और विधि

Ahoi Ashtami Kab Hai? तिथि, मुहूर्त और विधि
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हर साल दिवाली नज़दीक आते ही एक ही सवाल बार-बार पूछा जाता है — इस साल Ahoi Ashtami कब है। सवाल छोटा लगता है, लेकिन जवाब में उलझन बड़ी होती है, क्योंकि अलग-अलग पंचांग और अलग-अलग वेबसाइट कई बार अलग-अलग तारीख दिखा देती हैं।

इस लेख में सीधा जवाब भी है और वो वजह भी, जिससे तारीख को लेकर कन्फ्यूज़न बनता है।

2026 में अहोई अष्टमी रविवार, 1 नवंबर को है। यह तारीख कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष अष्टमी तिथि पर आधारित है, और दिल्ली पंचांग के हिसाब से गणना की गई है।

नीचे इस लेख में तिथि, मुहूर्त, पूजा विधि, सामग्री और व्रत खोलने के सही समय — सब कुछ क्रम से समझाया गया है।

2026 में अहोई अष्टमी रविवार, 1 नवंबर को है।

अहोई अष्टमी 2026 की सही तिथि और समय

अष्टमी तिथि खुद कब शुरू होती है और कब खत्म होती है, यह जानना ज़रूरी है क्योंकि पूजा और व्रत का पूरा हिसाब इसी तिथि पर टिका होता है। दिल्ली के पंचांग के अनुसार समय इस तरह है:

विवरण

समय (दिल्ली, 2026)

अहोई अष्टमी की तारीख

रविवार, 1 नवंबर 2026

हिन्दू मास

कार्तिक, कृष्ण पक्ष

अष्टमी तिथि प्रारंभ

1 नवंबर, दोपहर लगभग 2:51 बजे

अष्टमी तिथि समाप्त

2 नवंबर, दोपहर लगभग 1:10 बजे

सूर्योदय (व्रत आरंभ का संदर्भ)

सुबह लगभग 6:36 बजे

तारे देखने का समय (सांझ)

शाम लगभग 6:00 बजे

स्रोत: यह समय Drik Panchang और Prokerala की दिल्ली पंचांग गणना पर आधारित है। आपके शहर के हिसाब से सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्रोदय के समय में कुछ मिनट का अंतर आ सकता है, इसलिए अपने शहर का स्थानीय पंचांग एक बार ज़रूर देख लें।

एक बात ध्यान देने वाली है — अष्टमी तिथि दो दिन तक फैली हुई दिखती है (1 नवंबर दोपहर से 2 नवंबर दोपहर तक), लेकिन व्रत उसी दिन रखा जाता है जिस दिन सूर्योदय के समय अष्टमी तिथि विद्यमान हो या प्रधान रूप से मानी जाए।

यही वजह है कि अधिकतर पंचांग 1 नवंबर को ही मुख्य व्रत दिवस मानते हैं।

अहोई अष्टमी क्यों मनाई जाती है

यह व्रत मुख्य रूप से माताएं अपनी संतान की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए रखती हैं।

पारंपरिक मान्यता के अनुसार अहोई माता की पूजा इस दिन की जाती है, और इससे जुड़ी एक लोककथा भी प्रचलित है जिसमें एक स्त्री से अनजाने में किसी जीव के बच्चे को नुकसान पहुंचता है और फिर सच्चे मन से की गई पूजा से संतान की रक्षा होती है।

यह कहानी एक पारंपरिक लोककथा है, ऐतिहासिक घटना नहीं। अलग-अलग क्षेत्रों में इस कथा को थोड़े अलग तरीके से सुनाया जाता है, इसलिए इसे सांस्कृतिक विश्वास के रूप में ही समझना ठीक रहेगा, न कि किसी प्रमाणित इतिहास के रूप में।

कुछ परिवारों में यह मान्यता भी है कि यह व्रत उन महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखता है जिन्हें संतान प्राप्ति में कठिनाई रही हो। यह पूरी तरह एक पारंपरिक आस्था है — इसे वैज्ञानिक तथ्य के तौर पर नहीं, बल्कि सांस्कृतिक परंपरा के तौर पर देखा जाना चाहिए।

करवा चौथ और दिवाली के बीच अहोई अष्टमी कहां आती है

बहुत से लोग यह पूछते हैं कि अहोई अष्टमी करवा चौथ के पहले आती है या बाद में। जवाब साफ है — अहोई अष्टमी करवा चौथ के चार दिन बाद और दिवाली के लगभग आठ दिन पहले आती है।

2026 में यह क्रम इस तरह बनता है:

  1. करवा चौथ — पहले मनाई जाती है

  2. अहोई अष्टमी — करवा चौथ के 4 दिन बाद, यानी 1 नवंबर 2026

  3. धनतेरस और दिवाली — अहोई अष्टमी के करीब एक हफ्ते बाद

अगर आप करवा चौथ की व्रत विधि और मुहूर्त को लेकर भी जानकारी चाहती हैं, तो करवा चौथ व्रत विधि और मुहूर्त पर हमारा विस्तृत लेख भी पढ़ सकती हैं, जहां तिथि से जुड़ी हर बारीकी अलग से समझाई गई है।

पूजा मुहूर्त कब से कब तक करें पूजा

अहोई अष्टमी की पूजा शाम के समय, तारे दिखने के आसपास शुरू की जाती है। नीचे दी गई सारणी दिल्ली के लिए संकेतक समय बताती है:

मुहूर्त विवरण

समय

पूजा मुहूर्त प्रारंभ

शाम लगभग 5:36 बजे

पूजा मुहूर्त समाप्त

शाम लगभग 6:54 बजे

कुल अवधि

लगभग 1 घंटा 18 मिनट

तारे दिखने का समय

शाम लगभग 6:00 बजे

चंद्रोदय (जो परिवार चांद देखकर व्रत खोलते हैं)

रात लगभग 11:35-11:40 बजे

यहां एक अंतर साफ दिखता है — तारे दिखने का समय और चांद निकलने के समय के बीच लगभग पांच से छह घंटे का फासला है। यही इस व्रत को लेकर सबसे ज़्यादा पूछा जाने वाला सवाल बनता है, जिसे अगले हिस्से में विस्तार से समझाया गया है।

पूजा मुहूर्त कब से कब तक करें पूजा

तारे देखकर व्रत खोलें या चांद का इंतज़ार करें

यह सवाल हर साल बहुत महिलाओं को उलझाता है, और सच यह है कि इसका एक ही "सही" जवाब नहीं है — यह परिवार और क्षेत्र की परंपरा पर निर्भर करता है।

  • कुछ परिवारों में सांझ के समय तारे दिखने पर ही व्रत खोल लिया जाता है, क्योंकि यह पुरानी और ज़्यादा प्रचलित परंपरा मानी जाती है।

  • कुछ परिवार करवा चौथ की तरह ही चांद निकलने का इंतज़ार करते हैं, जो रात के करीब साढ़े ग्यारह बजे के आसपास होता है।

  • दोनों तरीके अलग-अलग परिवारों में सालों से चले आ रहे हैं, इसलिए इसे किसी एक "नियम" के बजाय क्षेत्रीय और पारिवारिक परंपरा के तौर पर समझना बेहतर है।

अगर घर में बड़ों से पहले कभी यह तरीका तय नहीं हुआ है, तो सबसे सीधा उपाय है — तारे दिखने के समय व्रत खोल लेना, क्योंकि यह समय ज़्यादातर पंचांगों में मुख्य संदर्भ के तौर पर दिया जाता है।

पूजा विधि — स्टेप बाय स्टेप

अहोई अष्टमी की पूजा विधि ज़्यादातर परिवारों में करीब-करीब एक जैसी होती है, हालांकि छोटी-छोटी बातों में क्षेत्रीय अंतर हो सकता है। सामान्य क्रम इस तरह रहता है:

  1. सुबह स्नान करके व्रत का संकल्प लिया जाता है, और पूरे दिन निर्जल या फलाहार व्रत रखा जाता है (यह भी परिवार की परंपरा पर निर्भर करता है)।

  2. शाम को दीवार पर या कागज़ पर अहोई माता और उनके सात पुत्रों का चित्र बनाया या टांगा जाता है।

  3. पूजा स्थान पर जल से भरा कलश और दीपक रखा जाता है।

  4. अहोई माता की कथा सुनी या पढ़ी जाती है।

  5. तारे दिखने पर या चांद निकलने पर (जो परंपरा घर में चली आ रही हो) अर्घ्य दिया जाता है।

  6. इसके बाद व्रत खोला जाता है और प्रसाद बांटा जाता है।

पूजा सामग्री की सूची

पूजा शुरू करने से पहले यह सामान पास रखना ज़रूरी होता है:

  • अहोई माता की तस्वीर या चित्र

  • जल से भरा कलश

  • दीपक और घी या तेल

  • चावल, रोली और मौली

  • फल और मिठाई

  • चांदी या धातु की स्याहू (अगर परिवार में यह परंपरा रही हो)

  • हल्का सा दूध और जल अर्घ्य के लिए

व्रत के दौरान ध्यान रखने वाली बातें

व्रत रखते समय कुछ सावधानियां ध्यान में रखना फायदेमंद रहता है, खासकर सेहत से जुड़े मामलों में:

  • अगर किसी को शुगर, ब्लड प्रेशर या कोई पुरानी बीमारी है, तो निर्जला व्रत रखने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना ज़्यादा सही रहेगा।

  • गर्भवती महिलाओं को सख्त निर्जला व्रत के बजाय फलाहार वाला हल्का व्रत रखने की सलाह ज़्यादातर डॉक्टर देते हैं।

  • व्रत के दौरान शरीर में पानी की कमी न हो, इसके लिए दिन में हल्का तरल आहार लिया जा सकता है, अगर परिवार की परंपरा इसकी अनुमति देती हो।

  • छोटे बच्चों वाली माताओं को व्रत के साथ-साथ अपनी ऊर्जा का भी ध्यान रखना चाहिए, क्योंकि दिनभर की भागदौड़ भी साथ में चलती रहती है।

अमांत और पूर्णिमांत कैलेंडर का फर्क

यह एक ऐसी बात है जो अक्सर छोड़ दी जाती है, लेकिन समझने लायक है। उत्तर भारत में ज़्यादातर पूर्णिमांत कैलेंडर चलता है, जहां इस पर्व को कार्तिक मास की अष्टमी कहा जाता है।

लेकिन गुजरात, महाराष्ट्र और कुछ दक्षिणी राज्यों में अमांत कैलेंडर चलता है, जहां इसी तिथि को अश्विन मास की अष्टमी कहा जाता है।

तारीख (यानी 1 नवंबर 2026) दोनों जगह एक ही रहती है — सिर्फ महीने का नाम बदल जाता है। यह फर्क सिर्फ कैलेंडर पद्धति की वजह से है, तिथि अलग होने की वजह से नहीं।

पिछले और आने वाले वर्षों की तारीखें

अगर आप यह देखना चाहती हैं कि अहोई अष्टमी हर साल किस महीने में आती है, तो नीचे की सारणी मदद करेगी:

वर्ष

तारीख

दिन

2023

5 नवंबर

रविवार

2024

24 अक्टूबर

गुरुवार

2025

13 अक्टूबर

सोमवार

2026

1 नवंबर

रविवार

2027

22 अक्टूबर

शुक्रवार

2028

11 अक्टूबर

बुधवार

इस सारणी से साफ दिखता है कि तारीख हर साल बदलती है, क्योंकि यह चंद्र-सौर हिन्दू पंचांग के हिसाब से तय होती है, न कि किसी स्थिर ग्रेगोरियन तारीख पर।

अगर अलग-अलग वेबसाइट अलग तारीख दिखाएं तो क्या करें

कई बार पंचांग ऐप और वेबसाइट पर एक-दो घंटे के तिथि परिवर्तन के अंतर की वजह से अलग-अलग तारीख दिख जाती है। ऐसे में सबसे भरोसेमंद तरीका यह है कि अपने शहर का नाम डालकर स्थानीय पंचांग जांच लें, क्योंकि सूर्योदय और तिथि परिवर्तन का समय शहर के हिसाब से थोड़ा बदल सकता है।

सामान्य तौर पर, जिस दिन सूर्योदय के समय अष्टमी तिथि मौजूद होती है, उस दिन को ही मुख्य व्रत दिवस माना जाता है।

संक्षेप में पूरी जानकारी

  • अहोई अष्टमी 2026 की तारीख: रविवार, 1 नवंबर

  • हिन्दू मास: कार्तिक, कृष्ण पक्ष अष्टमी

  • पूजा मुहूर्त: शाम लगभग 5:36 से 6:54 बजे तक

  • तारे दिखने का समय: शाम लगभग 6:00 बजे

  • करवा चौथ के बाद और दिवाली से पहले आने वाला व्रत

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

अहोई अष्टमी और करवा चौथ में क्या फर्क है?

करवा चौथ पति की लंबी उम्र के लिए रखा जाने वाला व्रत है, जबकि अहोई अष्टमी माताएं अपनी संतान के लिए रखती हैं। दोनों व्रतों के बीच लगभग चार दिन का अंतर रहता है।

क्या यह व्रत सिर्फ बेटों के लिए है, बेटियों के लिए नहीं?

परंपरागत कथा में सात पुत्रों का ज़िक्र आता है, लेकिन आज के समय में ज़्यादातर परिवार यह व्रत अपनी सभी संतानों — बेटे और बेटी दोनों — की सलामती के लिए रखते हैं।

व्रत किस समय खोलना ज़्यादा सही माना जाता है — तारे देखकर या चांद देखकर?

इसका कोई एक तय नियम नहीं है। यह परिवार और क्षेत्र की परंपरा पर निर्भर करता है। ज़्यादातर परिवार तारे दिखने पर ही व्रत खोल लेते हैं, जबकि कुछ चांद निकलने का इंतज़ार करते हैं।

2026 में अहोई अष्टमी दिवाली से कितने दिन पहले है? 2026 में अहोई अष्टमी 1 नवंबर को है और इसी साल दिवाली इसके करीब एक हफ्ते बाद मनाई जा रही है, यानी यह पर्व दिवाली से लगभग एक सप्ताह पहले आता है।

गर्भवती महिला को यह व्रत रखना चाहिए या नहीं?

यह पूरी तरह व्यक्तिगत सेहत और डॉक्टर की सलाह पर निर्भर करता है। अगर व्रत रखना ही हो, तो निर्जला व्रत के बजाय फलाहार वाला हल्का विकल्प चुनना ज़्यादा सुरक्षित माना जाता है।

स्रोत और आगे की जानकारी

तिथि और मुहूर्त से जुड़े आंकड़े Drik Panchang की अहोई अष्टमी तिथि पेज से क्रॉस-चेक किए गए हैं। पंचांग से जुड़ी हर बारीकी समझने के लिए हमारा पंचांग और तिथि कैसे पता करें वाला लेख भी उपयोगी रहेगा, और दिवाली पूजा मुहूर्त की जानकारी के लिए दिवाली पूजा मुहूर्त लेख देखा जा सकता है।


लेखक और संपादकीय जानकारी: यह लेख Choghadiyas.in की संपादकीय टीम द्वारा लिखा गया है। तिथि और मुहूर्त से जुड़े आंकड़े प्रमुख पंचांग स्रोतों (Drik Panchang, Prokerala) से मिलाकर जांचे गए हैं।

धार्मिक मान्यताओं और लोककथाओं को परंपरा के तौर पर प्रस्तुत किया गया है, वैज्ञानिक तथ्य के तौर पर नहीं। स्थानीय पंचांग और पारिवारिक परंपरा में अंतर हो सकता है, इसलिए अंतिम निर्णय अपने क्षेत्र के पंचांग और परिवार की परंपरा के अनुसार लें।

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Shiv Kumar Pandit

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मैं, शिव कुमार पंडित, इस प्लेटफ़ॉर्म का Co-Founder और वरिष्ठ कंटेंट रिसर्चर हूं। मुझे भारतीय संस्कृति, शुभ मुहूर्त, चोघड़िया, पंचांग और पारंपरिक ज्ञान से जुड़े विषयों पर रिसर्च करना और सरल भाषा में जानकारी साझा करना पसंद है, ताकि हर पाठक आसानी से सही जानकारी समझ सके।

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