हमारे घर में एक बुजुर्ग दादी थीं। जब भी कोई नया काम शुरू करना होता, वो पहले पंचांग उठातीं। फिर धीरे से कहतीं, "बेटा, जरा चौघड़िया देख लो।"
तब समझ नहीं आता था। अब आता है।
चौघड़िया सिर्फ एक परंपरा नहीं है। यह समय को समझने का एक पुराना और सोचा-समझा तरीका है जो सदियों से भारतीय जनजीवन में रचा-बसा है।
चौघड़िया का मतलब क्या होता है?
"चौघड़िया" शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है: "चौ" यानी चार, और "घड़िया" यानी घड़ी। मतलब यह हुआ कि हर चौघड़िया लगभग डेढ़ घंटे का एक समय खंड होता है।
पूरे दिन को सूर्योदय से सूर्यास्त तक 8 भागों में बांटा जाता है। रात को भी 8 भागों में। तो कुल 16 चौघड़िया रोज बनते हैं।
हर भाग पर एक ग्रह का प्रभाव माना जाता है। और उसी प्रभाव से तय होता है कि वह समय शुभ है या अशुभ।
सात चौघड़िया कौन से हैं?
कुल सात तरह के चौघड़िया होते हैं। हर एक किसी न किसी ग्रह से जुड़ा है।
सातों चौघड़िया और उनका प्रभाव
अमृत
सबसे शुभ। चंद्रमा का समय।
शुभ
बृहस्पति का समय। बहुत अच्छा।
लाभ
बुध का समय। व्यापार के लिए अच्छा।
चर
शुक्र का समय। यात्रा के लिए सही।
काल
शनि का समय। बचना बेहतर।
रोग
मंगल का समय। अशुभ माना जाता है।
उद्वेग
सूर्य का समय। सरकारी काम छोड़ बाकी से बचें।
चर चौघड़िया को लेकर एक बात
बहुत लोग "चर" को नज़रअंदाज करते हैं क्योंकि वो शुभ की लिस्ट में नहीं आता। पर यह यात्रा, गाड़ी खरीदना, या कोई भी गतिशील काम शुरू करने के लिए काफी अच्छा माना जाता है।
हर चौघड़िया हर काम के लिए एक जैसा नहीं होता। यह बात समझ में आ जाए तो चौघड़िया का असली इस्तेमाल शुरू होता है।
दिन का चौघड़िया कैसे निकालते हैं?
दिन का चौघड़िया सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को 8 बराबर हिस्सों में बांटकर निकाला जाता है।
मान लीजिए सूर्योदय सुबह 6 बजे है और सूर्यास्त शाम 6 बजे है। तो कुल 12 घंटे हुए। इनसे 8 से भाग करें तो हर चौघड़िया 1 घंटा 30 मिनट का होगा।
हर वार यानी सप्ताह के दिन के हिसाब से पहले चौघड़िया का ग्रह अलग होता है। उसके बाद सात ग्रहों की एक तय क्रम से बारी आती है।
वार के अनुसार पहला दिन चौघड़िया
रात का चौघड़िया अलग होता है क्या?
हां, होता है।
रात का चौघड़िया सूर्यास्त से अगले सूर्योदय तक निकाला जाता है। इसका तरीका वही है, पर पहले ग्रह का क्रम थोड़ा बदल जाता है। रात के चौघड़िया में भी "अमृत" और "शुभ" सबसे अच्छे माने जाते हैं।
बहुत से लोग सिर्फ दिन का चौघड़िया देखते हैं। पर जिन्हें रात में काम शुरू करना हो, जैसे किसी यात्रा पर निकलना, उनके लिए रात का चौघड़िया उतना ही जरूरी है।
चौघड़िया किस काम के लिए देखें?
काम के अनुसार सही चौघड़िया
व्यापार / दुकान खोलना
लाभ, अमृत, शुभ
नया घर / गृह प्रवेश
अमृत, शुभ
सरकारी काम
उद्वेग (केवल सरकारी कामों के लिए ठीक)
इनसे बचें
रोग, काल, उद्वेग (सामान्य कामों में)
क्या चौघड़िया देखना जरूरी है?
कुछ लोग इसे बहुत गंभीरता से लेते हैं। कुछ लोग इसे महज एक पुरानी परंपरा मानते हैं। दोनों की अपनी जगह है।
पर एक बात जो मुझे ठीक लगती है वो यह है कि अगर आप किसी काम को एक सही समय पर, तैयारी के साथ शुरू करते हैं, तो उसका एक मनोवैज्ञानिक असर भी होता है। आप खुद को ज्यादा तैयार और आश्वस्त महसूस करते हैं।
चाहे आप चौघड़िया मानें या नहीं, यह ज्ञान अपने पास रखना बुरा नहीं है।
चौघड़िया कहां से देखें?
पहले पंचांग से देखा जाता था। अब कई मोबाइल ऐप और वेबसाइट हैं जो रोजाना का चौघड़िया बताती हैं।
Drik Panchang एक भरोसेमंद वेबसाइट है जो रोज का चौघड़िया स्थान के हिसाब से बताती है। यह सूर्योदय और सूर्यास्त के सटीक समय पर आधारित होता है, इसलिए हर शहर का चौघड़िया थोड़ा अलग होता है।
मुंबई का चौघड़िया दिल्ली से अलग होगा। दोनों जगह सूर्योदय का समय अलग है, तो हिसाब भी अलग बनेगा।
काल चौघड़िया में कुछ नहीं होता क्या?
यह एक आम सवाल है। काल चौघड़िया में नए काम शुरू नहीं करने की सलाह दी जाती है। पर अगर पहले से चल रहा काम जारी रखना हो, तो उसमें कोई बाधा नहीं मानी जाती।
मतलब, काल चौघड़िया में ऑफिस का काम करना, रोजाना की दिनचर्या चलाना, पढ़ाई करना, यह सब ठीक है। बस कोई नई शुरुआत उस समय न करें।
यही बात रोग और उद्वेग पर भी लागू होती है।
चौघड़िया और राहुकाल में क्या फर्क है?
दोनों अलग चीजें हैं। अक्सर लोग इन्हें मिला देते हैं।
राहुकाल हर दिन लगभग डेढ़ घंटे का एक खास समय होता है जिसे अशुभ माना जाता है। यह राहु ग्रह से जुड़ा है।
चौघड़िया एक पूरी प्रणाली है जो पूरे दिन को 8 हिस्सों में बांटती है और हर हिस्से की गुणवत्ता बताती है।
राहुकाल उस दिन के किसी एक चौघड़िया के भीतर ही आता है। अगर राहुकाल और काल चौघड़िया दोनों एक साथ हों, तो कई लोग उस समय नई शुरुआत टालना पसंद करते हैं।
एक असली उदाहरण से समझें
मेरे एक परिचित ने अपनी दुकान का उद्घाटन सोमवार सुबह किया था। उस दिन का पहला चौघड़िया "अमृत" था।
उन्होंने कहा, "हमने पंडितजी से नहीं पूछा था। बस कैलेंडर में लिखा था 'अमृत', तो लगा सही रहेगा।" वो खुश थे, काम अच्छा चला।
अब यह चौघड़िया की वजह से हुआ या उनकी मेहनत की वजह से, यह मैं नहीं कह सकता। पर उस सुबह उन्होंने जो तैयारी और आत्मविश्वास के साथ काम शुरू किया, वो जरूर दिखा।
FAQ
चौघड़िया रोज बदलता है क्या?
हां, हर दिन का चौघड़िया बदलता है। वार बदलने से पहले चौघड़िया का ग्रह बदल जाता है और पूरा क्रम नया हो जाता है। इसीलिए रोज पंचांग या ऐप से देखना जरूरी है।
क्या रात को भी चौघड़िया देखते हैं?
बिल्कुल देखते हैं। रात के 8 चौघड़िया सूर्यास्त से अगले सूर्योदय तक होते हैं। जो लोग रात में यात्रा करते हैं या कोई काम शुरू करते हैं, उनके लिए रात का चौघड़िया उतना ही महत्वपूर्ण है।
क्या हर शहर का चौघड़िया अलग होता है?
हां। चौघड़िया सूर्योदय और सूर्यास्त के समय पर आधारित है। हर शहर में यह समय अलग होता है, इसलिए मुंबई, दिल्ली, जयपुर, चेन्नई सबका चौघड़िया थोड़ा अलग रहेगा।
अमृत और शुभ में से कौन सा बेहतर है?
दोनों बहुत अच्छे माने जाते हैं। सामान्यतः "अमृत" को सबसे शुभ कहा जाता है। पर काम के हिसाब से दोनों लगभग बराबर हैं। शादी-विवाह और बड़े कामों के लिए दोनों में से कोई भी चुन सकते हैं।
क्या चौघड़िया में वैज्ञानिक आधार है?
सीधे तौर पर नहीं। यह भारतीय ज्योतिष और पंचांग की परंपरा पर आधारित है। इसे वैज्ञानिक प्रमाण की नजर से परखना उचित नहीं है। यह आस्था और परंपरा की चीज है और इसी नजरिए से इसे समझना चाहिए।
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