चौघड़िया की शुरुआत कहाँ से हुई? हमारे पुराने लोग समय को बहुत गंभीरता से लेते थे। कोई भी बड़ा काम शुरू करने से पहले वे पूछते थे, "मुहूर्त कैसा है?" यही सोचकर चौघड़िया की परंपरा बनी।
चौघड़िया असल में दो शब्दों से बना है, "चौ" यानी चार और "घड़िया" यानी घड़ी। तो एक चौघड़िया मतलब लगभग डेढ़ घंटे का एक समय-खंड। दिन के सूर्योदय से सूर्यास्त तक 8 चौघड़िए होते हैं और रात के सूर्यास्त से अगले सूर्योदय तक भी 8 चौघड़िए।
यह पूरी व्यवस्था वैदिक ज्योतिष पर टिकी है। हर चौघड़िए का एक स्वामी ग्रह होता है और उसी से तय होता है कि वह समय शुभ है या नहीं।
दिन रात का चौघड़िया कितने प्रकार का होता है?
कुल 7 तरह के चौघड़िए होते हैं। हर एक का अपना अलग स्वभाव है।
1. अमृत - सबसे उत्तम। चंद्रमा का चौघड़िया। हर काम के लिए बेहतरीन।
2. शुभ - बृहस्पति का। विवाह, पूजा, व्यापार शुरू करने के लिए अच्छा।
3. लाभ - बुध का। नया काम, पढ़ाई, व्यापार के लिए उपयुक्त।
4. चर - शुक्र का। यात्रा के लिए सही माना जाता है।
5. काल - शनि का। इसमें कोई शुभ काम शुरू करना ठीक नहीं।
6. रोग - मंगल का। इसमें विशेष सावधानी रखें, खासकर स्वास्थ्य संबंधी काम में।
7. उद्वेग - सूर्य का। इसे भी अशुभ माना जाता है।
तो अमृत, शुभ, लाभ और चर शुभ चौघड़ियाँ हैं। काल, रोग और उद्वेग अशुभ।
दिन का चौघड़िया और रात का चौघड़िया कैसे अलग होते हैं?
दिन का चौघड़िया सूर्योदय से शुरू होता है। मान लीजिए सूर्योदय सुबह 6 बजे है और सूर्यास्त शाम 6 बजे है, तो 12 घंटों को 8 बराबर हिस्सों में बाँटें। हर हिस्सा डेढ़ घंटे का है।
रात का चौघड़िया सूर्यास्त के बाद शुरू होता है। उसी तरह रात के 12 घंटों को 8 हिस्सों में बाँटते हैं।
हर वार यानी सप्ताह के दिन के हिसाब से पहला चौघड़िया बदलता है। जैसे रविवार को दिन का पहला चौघड़िया उद्वेग होता है। सोमवार को पहला अमृत। यही कारण है कि सोमवार की सुबह को
काफी शुभ माना जाता है।
वारवार चौघड़िया तालिका
नीचे दिए गए चौघड़िया क्रम को ध्यान से देखें। यह दिन के चौघड़िए का क्रम है, सूर्योदय से शुरू होकर।
दिन का चौघड़िया - वार अनुसार पहला मुहूर्त
आज का दिन रात चौघड़िया कैसे देखते हैं?
उदाहरण: सोमवार का दिन और रात चौघड़िया
दिन का चौघड़िया
उद्वेग
12:00 - 01:30 दोपहर
रात का चौघड़िया
उद्वेग
03:00 - 04:30 सुबह
यह उदाहरण सूर्योदय 6 बजे और सूर्यास्त 6 बजे मानकर बनाया गया है। आपके शहर के हिसाब से समय थोड़ा अलग होगा। सटीक समय के लिए Drikpanchang पर अपना शहर चुनकर देखें। किस काम के लिए कौन सा चौघड़िया सही है?
व्यापार, यात्रा और पूजा के लिए सही चौघड़िया हो, सुबह की रोशनी में।
यह सवाल सबसे ज़्यादा पूछा जाता है। तो सीधे बात करते हैं।
व्यापार शुरू करना हो तो अमृत, शुभ या लाभ चौघड़िया चुनें। गुरुवार की सुबह का शुभ चौघड़िया बहुत अच्छा माना जाता है।
यात्रा पर निकलना हो तो चर चौघड़िया सबसे उपयुक्त है। शुक्र का यह चौघड़िया गति और बदलाव का प्रतीक है।
विवाह, सगाई या गृह प्रवेश के लिए अमृत और शुभ सबसे पहली पसंद हैं।
परीक्षा या पढ़ाई शुरू करना हो तो लाभ और अमृत दोनों काम करते हैं।
काल, रोग और उद्वेग में कोई नया काम शुरू करने से बचें। पहले से चल रहे काम जारी रख सकते हैं, बस नई शुरुआत टालें।
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क्या रात के चौघड़िए दिन से अलग होते हैं?
हाँ, थोड़े अलग होते हैं। रात का चौघड़िया क्रम दिन से थोड़ा बदलता है। हर वार के लिए रात का पहला चौघड़िया अलग होता है।
एक ज़रूरी बात, रात का अमृत चौघड़िया भी उतना ही शुभ है जितना दिन का। जो लोग रात को काम शुरू करते हैं, जैसे व्यापारी, किसान या ट्रक चालक, वे रात के चौघड़िए को देखकर यात्रा या काम शुरू करते हैं।
वैदिक ज्योतिष के अनुसार दोनों का महत्व बराबर है। बस समय का हिसाब सूर्यास्त से रखना होता है।
चौघड़िया और राहु काल में क्या फर्क है?
बहुत लोग इन दोनों को मिला देते हैं। राहु काल हर दिन एक बार आता है, करीब डेढ़ घंटे के लिए। यह हर वार पर अलग-अलग समय पर होता है। राहु काल में शुभ काम नहीं करते।
चौघड़िया पूरे दिन और रात में 16 बार बदलता है। इसमें शुभ और अशुभ दोनों तरह के मुहूर्त होते हैं।
दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं। समझदारी यह है कि राहु काल से बचें और साथ में शुभ चौघड़िया देखें। अगर कोई काम राहु काल के बाहर है और चौघड़िया भी अच्छा है, तो कई लोग इसे अधिक शुभ मानते हैं।
क्या चौघड़िया सिर्फ ज्योतिष में काम आता है?
बहुत लोग सोचते हैं यह सिर्फ पंडितों की बात है। लेकिन गाँवों में आज भी किसान बीज बोने का समय चौघड़िया देखकर तय करते हैं। व्यापारी दुकान का शुभारंभ इसी से करते हैं।
यह परंपरा असल में एक तरह की टाइम मैनेजमेंट थी। पुराने ज़माने में घड़ी नहीं थी। लेकिन सूरज था। और उसी के हिसाब से समय बाँटा गया।
वैदिक ज्योतिष पर शोध करने वाले कई विद्वान मानते हैं कि
कुछ पारंपरिक मान्यताओं में ग्रहों की स्थिति को महत्वपूर्ण माना जाता है।
कई लोग इसे अनुभव-आधारित पारंपरिक ज्ञान मानते हैं। विकिपीडिया पर
वैदिक ज्योतिष का इतिहास पढ़ सकते हैं।
चौघड़िया देखने का सबसे आसान तरीका
एक स्मार्टफोन की स्क्रीन पर हिंदी पंचांग ऐप खुला हो, चौघड़िया टाइमिंग दिख रही हो।
आजकल यह बहुत आसान हो गया है।
- पंचांग देखें। कोई भी हिंदी पंचांग, चाहे किताब हो या ऐप, रोज़ के चौघड़िए देता है।
- ऑनलाइन वेबसाइट। drikpanchang.com पर अपना शहर और तारीख डालें। वहाँ दिन और रात दोनों के चौघड़िए का पूरा विवरण मिलता है।
- मोबाइल ऐप। "हिंदू कैलेंडर" या "पंचांग" नाम के कई ऐप मुफ्त में मिलते हैं। उन्हें एक बार सेट करें, हर दिन सुबह की जानकारी मिलती रहेगी।
- अपने पंडित जी से पूछें। अगर कोई बड़ा काम है, जैसे गृह प्रवेश या व्यापार शुरू करना, तो स्थानीय पंडित से मुहूर्त निकलवाना
अधिक उपयोगी माना जाता है। वे सूर्योदय का सही समय और आपकी जन्मकुंडली देखकर बताते हैं।
कुछ लोगों का सवाल होता है, क्या चौघड़िया माना ज़रूरी है?
यह आस्था का विषय है। हर कोई इसे मानने के लिए बाध्य नहीं है। लेकिन जो लोग भारतीय परंपरा और वैदिक ज्ञान में विश्वास रखते हैं, उनके लिए यह एक गाइड की तरह काम करता है। सही समय पर सही काम करना, यह सोच किसी भी धर्म में बुरी नहीं है।
मेरा अपना मानना यह है कि अगर किसी काम की शुरुआत अच्छे मन और शुभ माहौल में हो, तो उस काम में
एक सकारात्मक मानसिक प्रभाव महसूस होता है। चौघड़िया उसी मानसिक तैयारी में मदद करता है।
FAQ
चौघड़िया का मतलब क्या होता है?
चौघड़िया का मतलब है चार घड़ी का समय, यानी करीब डेढ़ घंटे का एक समय-खंड। वैदिक ज्योतिष में हर चौघड़िए का एक ग्रह स्वामी होता है जो उसे शुभ या अशुभ बनाता है।
कौन सा चौघड़िया सबसे शुभ माना जाता है?
अमृत चौघड़िया को सामान्यतः सबसे शुभ माना जाता है। विवाह, व्यापार, पूजा और नई शुरुआत जैसे कामों के लिए बहुत लोग इसे प्राथमिकता देते हैं।
क्या हर दिन चौघड़िया अलग होता है?
हाँ। हर वार पर पहला चौघड़िया अलग होता है, इसलिए पूरा क्रम अलग-अलग दिन अलग-अलग समय पर आता है। सोमवार और बुधवार को दिन की शुरुआत अमृत और लाभ से होती है, इसलिए ये दिन काम शुरू करने के लिए अच्छे माने जाते हैं।
काल चौघड़िया में क्या करना चाहिए और क्या नहीं?
पहले से चल रहे काम जारी रख सकते हैं। बस नई शुरुआत, नया निवेश, नया समझौता या शुभ संस्कार काल चौघड़िया में टालना बेहतर है।
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