जून 2026 में अमावस्या सोमवार, 15 जून को पड़ रही है। बहुत से लोग महीनों पहले से यह जानना चाहते हैं कि June Mein Amavasya Kab Hai 2026, ताकि वे पितृ तर्पण, व्रत और पूजा की तैयारी सही समय पर कर सकें।
अमावस्या तिथि 14 जून 2026 को दोपहर लगभग 12:19 बजे शुरू होगी और 15 जून 2026 को सुबह लगभग 08:23 बजे समाप्त होगी।
यह दिन सोमवार को पड़ रहा है, इसीलिए इसे सोमवती अमावस्या कहा जाता है।
और इस साल इसमें एक और खास बात जुड़ी है, जो आगे विस्तार से समझाई गई है।
सीधा जवाब: जून 2026 में सोमवती अमावस्या 15 जून, सोमवार को मनाई जाएगी।
अमावस्या तिथि 14 जून को दोपहर 12:19 बजे शुरू होगी और 15 जून को सुबह 08:23 बजे समाप्त होगी।
2026 में हिंदू पंचांग में अधिक मास भी है, जो इस अमावस्या को और भी खास बनाता है।
पितृ तर्पण और भगवान शिव की पूजा के संदर्भ में इस दिन का उल्लेख कई परंपराओं में मिलता है।
जून 2026 अमावस्या तिथि और समय की पूरी जानकारी
अमावस्या तिथि 14 जून 2026 को दोपहर 12:19 बजे शुरू होगी और 15 जून 2026 को सुबह 08:23 बजे समाप्त होगी।
कुल अवधि लगभग 20 घंटे 4 मिनट की है। ये सभी तिथियां और समय दिल्ली/एनसीआर के स्थानीय समय (IST)
पर आधारित हैं। विभिन्न स्थानों में समय में थोड़ा अंतर हो सकता है।
| पंचांग विवरण | जानकारी |
|---|---|
| अमावस्या तिथि | 15 जून 2026, सोमवार |
| तिथि आरंभ | 14 जून 2026, दोपहर 12:19 बजे (IST) |
| तिथि समाप्ति | 15 जून 2026, सुबह 08:23 बजे (IST) |
| कुल अवधि | लगभग 20 घंटे 4 मिनट |
| वार | सोमवार (सोम = चंद्रमा का दिन) |
| अमावस्या का नाम | सोमवती अमावस्या |
| हिंदू मास | ज्येष्ठ मास (अधिक मास सहित) |
| विक्रम संवत | 2083 |
| पक्ष | कृष्ण पक्ष |
| समय आधार | IST (भारतीय मानक समय, नई दिल्ली) |
क्या जून 2026 की अमावस्या सोमवती अमावस्या है
हां, बिल्कुल है। सोमवार को पड़ने वाली अमावस्या को सोमवती अमावस्या कहा जाता है।
और जून 2026 में अमावस्या ठीक सोमवार को पड़ रही है, इसलिए यह सोमवती अमावस्या है।
सोमवती अमावस्या को कई परंपराओं में भगवान शिव से जोड़कर देखा जाता है।
सोमवती अमावस्या तब होती है जब अमावस्या सोमवार को पड़े, यानी चंद्रमा और भगवान शिव के दिन।
इसे विशेष इसलिए माना जाता है क्योंकि सोमवार चंद्रमा और शिवजी दोनों से जुड़ा है।
2026 में जून की अमावस्या इतनी विशेष क्यों है
सिर्फ सोमवती होना ही काफी नहीं। इस साल इस अमावस्या के साथ एक अतिरिक्त संयोग भी जुड़ा है।
2026 में हिंदू पंचांग में एक दुर्लभ अधिक मास (मलमास) आया है। इस अतिरिक्त मास में पड़ने वाली अमावस्या को अधिका अमावस्या कहते हैं।
यह अमावस्या सोमवार को पड़ रही है, जिससे शिव पूजा के लिए सोमवती का शुभ संयोग भी बन रहा है।
धार्मिक परंपराओं में अधिक मास को विशेष महत्व दिया जाता है।
2026 में ज्येष्ठ मास (मई-जून) में यह अतिरिक्त चंद्र चरण जुड़ा है, जिससे इसे कई लोग विशेष धार्मिक अवधि के रूप में देखते हैं।
इस बार एक ही समय में कई पारंपरिक संयोगों का उल्लेख किया जाता है।अमावस्या, सोमवती और अधिक मास। ऐसा संयोग हर साल नहीं बनता।
2026 में साल भर की अमावस्या तिथियां
2026 में कुल 12 अमावस्या तिथियां हैं, हर चंद्र मास में एक।
| माह | अमावस्या तिथि | वार | विशेष नाम |
|---|---|---|---|
| जनवरी 2026 | 18 जनवरी | रविवार | मौनी अमावस्या |
| फरवरी 2026 | 17 फरवरी | मंगलवार | फाल्गुन / भौमवती अमावस्या |
| मार्च 2026 | — | — | — |
| जून 2026 | 15 जून | सोमवार | सोमवती अमावस्या (अधिक मास) |
| जुलाई 2026 | 14 जुलाई | मंगलवार | आषाढ़ / भौमवती अमावस्या |
| नवंबर 2026 | 9 नवंबर | सोमवार | सोमवती अमावस्या |
सोमवती अमावस्या का पारंपरिक महत्व
अमावस्या वह समय होता है जब चंद्रमा दिखाई नहीं देता, जो मौन और आंतरिक शुद्धि का प्रतीक माना जाता है।
जब यह शांत अमावस्या सोमवार को पड़ती है तो इसे पूजा और आध्यात्मिक साधना के लिए विशेष महत्व का माना जाता है।
प्राचीन हिंदू ग्रंथों में कहा गया है कि अमावस्या पर पवित्र नदियों में स्नान से शरीर के साथ-साथ आध्यात्मिक शुद्धि के प्रतीक के रूप में देखा जाता है।
सोमवती अमावस्या, जो सोमवार को पड़ती है, विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जाती है।
कई विवाहित महिलाएं पारंपरिक रूप से सोमवती अमावस्या व्रत रखती हैं।
कई परिवारों में यह परंपरा पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही है। घर की बड़ी महिलाएं इस दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करती हैं और पीपल के पेड़ की परिक्रमा करती हैं।
सोमवती अमावस्या की पूजा विधि
इस दिन की पूजा के लिए कुछ परंपरागत विधियां प्रचलित हैं।
इनका पालन कई परिवारों में परंपरा के रूप में किया जाता है।
इस दिन सुबह मौन रहते हुए पवित्र नदियों जैसे गंगा, यमुना, सरस्वती में स्नान करना महत्वपूर्ण माना जाता है।
यदि गंगा नदी तक जाना संभव न हो, तो घर पर नहाने के पानी में गंगाजल मिलाया जा सकता है।
पूजा विधि में मुख्यतः ये कार्य किए जाते हैं:
- ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें।
- भगवान शिव की पूजा करें और जल अर्पण करें।
- पीपल के वृक्ष की परिक्रमा करें।
- पितृ तर्पण और श्राद्ध कर्म करें।
- जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या दान दें।
- दीप जलाएं और मंत्र जप करें।
दोपहर तक हवन और पूजा की जाती है। सूर्यास्त के बाद भक्त महामृत्युंजय मंत्र का जप करते हैं और व्रत पूजा व पितृ अर्पण के बाद ही तोड़ा जाता है।
पितृ तर्पण क्यों करते हैं इस दिन
अमावस्या को पवित्र नई चंद्रमा का दिन माना जाता है, जब यह विश्वास किया जाता है कि पूर्वजों की आत्माएं पृथ्वी के करीब आती हैं।
इसी कारण लोग पितृ तर्पण करते हैं और अपने पूर्वजों को श्रद्धांजलि देते हैं। ऐसी मान्यता है कि इन अनुष्ठानों से
इसे पूर्वजों के सम्मान और स्मरण से जोड़कर देखा जाता है।
गरुड़ पुराण के अनुसार भगवान विष्णु ने कहा है कि पूर्वज अमावस्या के दिन पृथ्वी पर आते हैं।
यदि उनके वंशज भोजन और प्रार्थना अर्पण न करें तो यह मान्यता कुछ धार्मिक ग्रंथों में वर्णित है।
इसलिए श्रद्धा व्यक्त करने के लिए प्रार्थना और अर्पण करना चाहिए।
अधिक मास में अमावस्या का महत्व
2026 की जून अमावस्या इसलिए और भी खास है क्योंकि यह अधिक मास में पड़ रही है।
अधिक मास को पुरुषोत्तम मास भी कहते हैं क्योंकि यह भगवान विष्णु को समर्पित है।
अधिक मास की गणना चंद्र वर्ष (354 दिन) और सौर वर्ष (365 दिन) के अंतर के आधार पर होती है। सरल शब्दों में यह हिंदू कैलेंडर में एक अतिरिक्त चंद्र मास होता है।
अधिक मास को कई परंपराओं में विशेष धार्मिक महत्व दिया जाता है।
इस दौरान भागवत गीता, विष्णु सहस्रनाम का पाठ और दान-पुण्य विशेष रूप से अनुशंसित है।
इस अधिक मास की अमावस्या को धर्म के साथ पुनः जुड़ने और दैवीय कृपा प्राप्त करने का एक शक्तिशाली अवसर माना जाता है।
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार अमावस्या तिथि और पुरुषोत्तम मास के संयुक्त प्रभाव से इस दिन की गई प्रार्थना, मंत्र और दान को विशेष महत्व दिया जाता है।
व्रत और उपवास के नियम
1 बहुत से श्रद्धालु इस दिन पूरा उपवास रखते हैं और केवल फल या जल ग्रहण करते हैं।
व्रत से जुड़े कुछ प्रचलित नियम इस प्रकार हैं:
- सूर्योदय से पहले उठें और शुद्ध जल से स्नान करें।
- व्रत का स्वरूप व्यक्ति और परंपरा के अनुसार अलग-अलग हो सकता है।
- क्रोध और नकारात्मक विचारों से दूर रहें।
- दिन में यथासंभव मौन रहने का प्रयास करें।
- शाम को दीपक जलाएं और घर को स्वच्छ रखें।
जैसे-जैसे शाम होती है, भक्त घर और मंदिरों में दीपक जलाते हैं। परिवार "ॐ पितृभ्यो नमः" जैसे मंत्रों का जप करते हुए ब्राह्मणों को भोजन कराते हैं।
कई परिवारों में यह भी प्रचलन है कि इस दिन कौओं को खीर-पूरी खिलाई जाती है।
यह अनुष्ठान पूर्वजों के सम्मान की भावना से किया जाता है।
इस दिन क्या न करें
परंपरागत रूप से कुछ कार्यों से इस दिन परहेज किया जाता है। हालांकि ये मान्यताएं हैं, कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।
- नए कार्यों या व्यापार का आरंभ इस दिन टाला जाता है।
- यात्रा शुरू करने से भी बहुत से लोग बचते हैं।
अमावस्या पर नए उद्यम या बड़े कार्य शुरू करना —कुछ परंपराओं में इससे परहेज किया जाता है।
- मांसाहार और मदिरा से परहेज किया जाता है।
- पूजा या अर्पण को इस दिन अनदेखा करना उचित नहीं माना जाता।
कुछ परिवार यात्रा शुरू करने से पहले शुभ समय देखना पसंद करते हैं। और कई व्यापारी आज भी इस दिन दुकान खोलने से पहले पंचांग देखते हैं।
अमावस्या पर दान का महत्व
अमावस्या पर जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र या आवश्यक सामग्री दान करना काफी शुभ माना जाता है।
मान्यता है कि भोजन, वस्त्र, काले तिल और अन्य जरूरी वस्तुओं का दान करने से इसे पूर्वजों के सम्मान से जोड़कर देखा जाता है।
पितरों की स्मृति में जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र और आवश्यक सामग्री दान करना सबसे पुण्यकारी माना जाता है।
दान के लिए सूर्योदय से दोपहर के बीच का समय पारंपरिक रूप से उचित माना जाता है। ज्योतिषीय गणना के आधार पर कुछ परंपराओं में अभिजित मुहूर्त का उल्लेख मिलता है।
2026 में दूसरी सोमवती अमावस्या कब है
2026 में दूसरी सोमवती अमावस्या 9 नवंबर 2026, सोमवार को पड़ेगी। इसकी तिथि 8 नवंबर 2026 को दोपहर 11:27 बजे शुरू होगी और 9 नवंबर 2026 को दोपहर 12:31 बजे समाप्त होगी।
2026 में दो सोमवती अमावस्याएं पड़ रही हैं। पहली 15 जून और दूसरी 9 नवंबर को।
अमावस्या का आध्यात्मिक और मानसिक पक्ष
2026 में अमावस्या की चंद्रहीन रात शून्यता (सुन्यता) का प्रतीक है, जो नई सृष्टि का मूल स्रोत मानी जाती है। पवित्र जल में स्नान और इस दिन मौन रहना
इसे आत्मचिंतन और आध्यात्मिक अभ्यास से जोड़कर देखा जाता है।
यद्यपि रात अंधकारमय है, लेकिन यह अंधकार से प्रकाश की ओर, अज्ञान से ज्ञान की ओर और सामान्य जीवन से आध्यात्मिक मुक्ति की यात्रा का प्रतीक माना जाता है।
अमावस्या को कई लोग आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानते हैं।
चंद्रमा के न दिखने के कारण इसे नकारात्मकता दूर करने, पूर्वजों का सम्मान करने और आत्मचिंतन के लिए उपयुक्त समय माना जाता है।
अमावस्या से जुड़ी गलत धारणाएं
बहुत से लोग गलती से मान लेते हैं कि अमावस्या अशुभ होती है। वास्तव में यह
मनन और पूर्वजों के स्मरण से जोड़कर देखा जाता है।
कुछ परंपराओं में नए कार्य टाले जाते हैं, लेकिन गंगा स्नान जैसी परंपराएं प्रार्थना, दान और आध्यात्मिक विकास के लिए काफी शुभ मानी जाती हैं।
तो यह न तो डर का दिन है और न ही अनदेखा करने का। बस इसे सही भावना से मनाने की जरूरत है।
अमावस्या पर पवित्र नदी स्नान की परंपरा
बहुत से श्रद्धालु सूर्योदय के समय गंगा, यमुना या गोदावरी जैसी पवित्र नदियों में स्नान करते हैं।
सोमवती अमावस्या पर भगवान शिव की पूजा, उपवास और पवित्र स्नान से समृद्धि, वैवाहिक सौहार्द और आध्यात्मिक विकास की प्राप्ति होती है, ऐसी पारंपरिक मान्यता है।
मान्यता है कि इस दिन पवित्र स्नान से यह पारंपरिक मान्यताओं में वर्णित है।
निष्कर्ष
जून 2026 में अमावस्या 15 जून, सोमवार को पड़ रही है।
यह सोमवती अमावस्या है और इस साल का अधिक मास इसे और अधिक महत्वपूर्ण बनाता है।
तिथि 14 जून दोपहर 12:19 बजे शुरू होकर 15 जून सुबह 08:23 बजे समाप्त होगी।
पितृ तर्पण, दैनिक पंचांग पालन, शुभ मुहूर्त में पूजा और दान, इन सब के लिए यह दिन पारंपरिक रूप से उत्तम माना जाता है।
विश्वसनीय पंचांग जानकारी के लिए आप Drik Panchang की वेबसाइट देख सकते हैं।
विश्वसनीय पंचांग जानकारी के लिए आप Drik Panchang की वेबसाइट देख सकते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
जून 2026 में अमावस्या कब है
जून 2026 में अमावस्या 15 जून, सोमवार को है। तिथि 14 जून को दोपहर 12:19 बजे शुरू होकर 15 जून को सुबह 08:23 बजे समाप्त होगी। यह सोमवार को पड़ रही है, इसलिए इसे सोमवती अमावस्या कहा जाता है।
क्या जून 2026 की अमावस्या सोमवती अमावस्या है?
हां, बिल्कुल। सोमवती अमावस्या वह होती है जो सोमवार के दिन पड़ती है। जून 2026 में अमावस्या ठीक सोमवार को है, इसलिए यह सोमवती अमावस्या है। इस दिन का भगवान शिव से गहरा संबंध माना जाता है।
सोमवती अमावस्या पर क्या करना चाहिए?
इस दिन भगवान शिव की पूजा, उपवास और पवित्र स्नान का परंपरागत महत्व माना जाता है। पितृ तर्पण करें, ध्यान और मंत्र जप करें, और सात्विक भोजन ग्रहण करें या उपवास रखें।
दान और सेवा का उल्लेख कई परंपराओं में मिलता है।
2026 में सोमवती अमावस्या कितनी बार आती है?
2026 में दो सोमवती अमावस्याएं पड़ रही हैं। पहली 15 जून 2026 को और दूसरी 9 नवंबर 2026 को। दोनों ही दिन सोमवार को हैं।
क्या जून 2026 की अमावस्या पर अधिक मास का भी प्रभाव है?
हां, 2026 में हिंदू पंचांग में एक दुर्लभ अधिक मास आया है। इस अतिरिक्त मास में पड़ने वाली अमावस्या को अधिका अमावस्या कहते हैं।
इस मास को कई परंपराओं में विशेष महत्व दिया जाता है। इसलिए इस बार की सोमवती अमावस्या तीन संयोगों से मिलकर बनी है।
अस्वीकरण: यह लेख पारंपरिक मान्यताओं, सांस्कृतिक प्रचलनों और सामान्य पंचांग जानकारी पर आधारित है। यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी और सांस्कृतिक संदर्भ के लिए है। धार्मिक परंपराएं क्षेत्र और परिवार के अनुसार अलग-अलग हो सकती हैं।
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