Din Ka Choghadiya Kya Hota Hai? शुभ समय पहचानने की आसान गाइड

Din Ka Choghadiya Kya Hota Hai? शुभ समय पहचानने की आसान गाइड
Table of Contents / विषय सूची
मेरी दादी हर सुबह एक छोटी सी डायरी खोलती थीं। उसमें कुछ लिखा होता था: समय, नाम और एक छोटा सा निशान। बाद में पता चला वो चौघड़िया देखती थीं। कोई भी बड़ा काम, दुकान खोलना हो, सफर पर निकलना हो, या किसी से पहली बार मिलना हो, पहले चौघड़िया देखना जरूरी था उनके लिए।

तब मैंने सोचा था, ये तो बस पुरानी बात है। लेकिन जब खुद समझा तो लगा,  इसमें समय को समझने की एक गहरी पारंपरिक सोच है। वक्त को टुकड़ों में बांटना, हर टुकड़े का अपना स्वभाव होना, ये सोच बहुत गहरी है। 

तो आज इस पूरी चीज़ को सीधे, बिना उलझाए, समझाने की कोशिश है।

चौघड़िया होता क्या है असल में?

"चौघड़िया" शब्द दो हिस्सों से बना है। "चौ" यानी चार, और "घड़िया" यानी घड़ी या समय का हिस्सा। हर चौघड़िया लगभग डेढ़ घंटे का होता है।

दिन को सूर्योदय से सूर्यास्त तक 8 बराबर हिस्सों में बांटा जाता है। रात को भी 8 हिस्से मिलते हैं। कुल 16 चौघड़िया होते हैं हर दिन, 8 दिन के और 8 रात के।

हर चौघड़िया किसी एक ग्रह के प्रभाव में होता है। उसी ग्रह के स्वभाव के हिसाब से उस समय को शुभ, अशुभ या मध्यम माना जाता है।

सात चौघड़िया के नाम और उनका मतलब

कुल सात चौघड़िया होते हैं जो बारी-बारी से आते रहते हैं।
सात चौघड़िया: नाम, ग्रह और स्वभाव
अमृत
ग्रह: चंद्रमा
सर्वश्रेष्ठ शुभ
हर काम के लिए बेहतरीन
शुभ
ग्रह: बृहस्पति
बहुत शुभ
धार्मिक और शुभ कार्य
लाभ
ग्रह: बुध
शुभ
व्यापार और कमाई के काम
चर
ग्रह: शुक्र
शुभ
यात्रा के लिए अच्छा
काल
ग्रह: शनि
अशुभ
शुभ कार्य टालें
उद्वेग
ग्रह: सूर्य
अशुभ
नए काम मत शुरू करें
रोग
ग्रह: मंगल
अशुभ
स्वास्थ्य सावधानी जरूरी
सोमवार को सुबह उठते ही पहला चौघड़िया अमृत का मिलता है। यही वजह है कि सोमवार की सुबह हिंदू परंपरा में का फी शुभ माना जाता है।

दिन का चौघड़िया किस काम के लिए देखते हैं?


हर काम का अपना चौघड़िया होता है। मेरे एक परिचित का कपड़ों का व्यापार है। वो हर नया माल मंगाने से पहले लाभ या अमृत का चौघड़िया जरूर देखते हैं। उनका मानना है कि इससे व्यापार में नुकसान कम होता है।
दिन का चौघड़िया किस काम के लिए देखते हैं
मैं पूरी तरह यही कहूँ कि ये सच है तो शायद ज़्यादा होगा। लेकिन ये भी सच है कि जब आप किसी शुभ समय पर काम शुरू करते हैं तो मन में एक सकारात्मक भाव होता है। और वो भाव खुद एक बड़ी ताकत है।

     यह भी पढ़ें

कुछ काम और उनके लिए सही चौघड़िया:
  1. नई दुकान या व्यापार शुरू करना: लाभ या अमृत
  2. विवाह संबंधी बात या मुहूर्त: शुभ या अमृत
  3. लंबी यात्रा पर निकलना: चर या लाभ
  4. बैंक या कानूनी काम: लाभ
  5. धार्मिक कार्य या पूजा: शुभ या अमृत
  6. घर में कुछ नया लाना: अमृत या लाभ
रोग, काल और उद्वेग में कोई नया और बड़ा काम शुरू करना ठीक नहीं माना जाता। लेकिन रोज़मर्रा के छोटे काम जैसे खाना बनाना, पढ़ना, घर का काम, इनके लिए चौघड़िया देखना जरूरी नहीं।

काल चौघड़िया को लेकर एक जरूरी बात

 काल चौघड़िया को पूरी तरह बेकार मत समझिए। एक पुरानी मान्यता है कि काल चौघड़िया में सूर्य देव से जुड़ी पूजा और सरकारी काम करना ठीक रहता है। शनि ग्रह के प्रभाव में ये समय कुछ खास कामों के लिए फायदेमंद माना जाता है।

तो ये इतना आसान नहीं कि बस शुभ में करो, अशुभ में मत करो। थोड़ी समझ चाहिए।

चौघड़िया कैसे निकालते हैं खुद से?

मैं आपको एक सरल तरीका बताता हूँ। मान लीजिए आज सोमवार है। सूर्योदय मान लीजिए सुबह 6 बजे हुआ। सूर्यास्त शाम 6 बजे होगा। तो दिन का कुल समय 12 घंटे है। इसे 8 से भाग दें तो 1.5 घंटे, यानी डेढ़ घंटा हर चौघड़िया।

सोमवार का पहला चौघड़िया अमृत है।

तो क्रम ऐसे चलेगा:

  1. सुबह 6:00 से 7:30 बजे तक: अमृत
  2. सुबह 7:30 से 9:00 बजे तक: काल
  3. सुबह 9:00 से 10:30 बजे तक: शुभ
  4. सुबह 10:30 से 12:00 बजे तक: रोग
  5. दोपहर 12:00 से 1:30 बजे तक: उद्वेग
  6. दोपहर 1:30 से 3:00 बजे तक: चर
  7. शाम 3:00 से 4:30 बजे तक: लाभ
   शाम 4:30 से 6:00 बजे तक: अमृत

यानी सोमवार की सुबह और शाम दोनों अमृत से शुरू और खत्म होती हैं। इसीलिए सोमवार को हिंदू ज्योतिष में बहुत खास जगह मिली हुई है। हर वार का यही हिसाब बदलता रहता है।

रात का चौघड़िया अलग होता है

रात का चौघड़िया सूर्यास्त से शुरू होता है और अगले सूर्योदय तक चलता है। रात के भी 8 हिस्से होते हैं।

रात में जो पहला चौघड़िया आता है वो दिन के पहले चौघड़िया से अलग होता है। रात में यात्रा, सफर, या रात के शुभ काम के लिए रात का चौघड़िया देखते हैं।

अगर किसी को रात को कहीं निकलना हो, किसी की तबीयत खराब हो और अस्पताल ले जाना हो तो रात का चौघड़िया देखना व्यावहारिक नहीं। उस वक्त बस काम करो। ये परंपरा जीवन को सुगम बनाने के लिए है, रोकने के लिए नहीं।

अभिजित मुहूर्त और चौघड़िया का संबंध और उनका चौघड़िया से क्या रिश्ता है?

अभिजित मुहूर्त क्या होता है

अभिजित मुहूर्त दोपहर के वक्त आता है, लगभग 11:36 से 12:24 के बीच। ये हर रोज होता है और इसे सबसे शुभ माना जाता है।

 शास्त्रों में लिखा है कि  पारंपरिक मान्यता में इसे बहुत शुभ माना जाता है। बुधवार को दोपहर का ये समय थोड़ा कम प्रभावी माना जाता है, बाकी सब दिन ये बेहद शुभ है।

अगर आप किसी दिन चौघड़िया नहीं देख पा रहे हैं, तो बस अभिजित मुहूर्त पकड़ लीजिए।  कई लोग इसे पर्याप्त मानते हैं ।

पंचांग से चौघड़िया देखना आसान है

हर हिंदी पंचांग में, चाहे वो कागज़ का हो या मोबाइल ऐप, चौघड़िया का पूरा विवरण होता है। ड्रिक पंचांग जैसी साइट पर आप आज का चौघड़िया बिल्कुल मुफ्त देख सकते हैं। वहां आपके शहर के हिसाब से, सूर्योदय के सटीक समय के अनुसार, पूरा चार्ट मिलता है।

 यह उन लोगों के लिए बहुत काम की साइट है जो खुद गणना करना नहीं जानते।

हिंदू ज्योतिष की गहरी समझ के लिए विकिपीडिया का हिंदू ज्योतिष पृष्ठ भी एक अच्छा शुरुआती संदर्भ है।

क्या चौघड़िया सच में काम करता है?

ये सवाल हर किसी के मन में आता है। और ईमानदारी से कहूँ तो इसका एक सीधा जवाब मेरे पास नहीं है।

विज्ञान इसे ग्रहों के प्रभाव के तौर पर नहीं मानता। लेकिन  लंबे समय से चली आ रही परंपरा, जो आज भी करोड़ों लोग मानते हैं, उसे बस अंधविश्वास कहकर उड़ाना भी ठीक नहीं लगता।

मेरा अपना नजरिया ये है: चौघड़िया देखकर काम करने से एक मानसिक तैयारी होती है।

 FAQ

चौघड़िया कितने प्रकार के होते हैं?
सात। अमृत, शुभ, लाभ, चर, काल, उद्वेग और रोग। इनमें से 4 शुभ माने जाते हैं और 3 अशुभ।

क्या हर छोटे काम के लिए चौघड़िया देखना जरूरी है?
बिल्कुल नहीं। रोज़ के सामान्य काम जैसे खाना बनाना, बच्चे को स्कूल भेजना, या दफ्तर जाना, इन सबके लिए चौघड़िया देखना ज़रूरी नहीं है। ये सिर्फ बड़े और महत्वपूर्ण कामों के लिए है।

क्या आपातकाल में अशुभ चौघड़िया में काम रोकना चाहिए?
नहीं। अगर कोई जरूरी या आपात स्थिति हो तो चौघड़िया इंतज़ार नहीं करता और आपको भी नहीं करना चाहिए। परंपरा जीवन की सेवा के लिए है, जीवन परंपरा की सेवा के लिए नहीं।

सबसे शुभ चौघड़िया कौन सा है?
अमृत। इसमें शुरू किया गया काम सबसे अच्छा माना जाता है। सोमवार की सुबह इसी से शुरू होती है।

क्या रात का चौघड़िया दिन के चौघड़िया से अलग होता है?
हां, अलग होता है। रात का पहला चौघड़िया वार के हिसाब से बदलता है और सूर्यास्त के समय से गिना जाता है। रात के कामों के लिए रात का चौघड़िया देखना चाहिए।

चौघड़िया एक पुरानी, सोची-समझी व्यवस्था है। इसे समझना मुश्किल नहीं है। बस एक बार इसका ढांचा पकड़ में आ जाए तो खुद भी निकाल सकते हैं। और अगर हर रोज़ इतना नहीं करना तो कई लोग पंचांग में अमृत या शुभ का समय देखकर उसी दौरान काम शुरू करना पसंद करते हैं।

दादी हमेशा कहती थीं, "वक्त की इज्जत करो, वक्त तुम्हारी इज्जत करेगा।" शायद यही पूरे चौघड़िया का असली मतलब है।

यह लेख साझें

AD

Administrator

सत्यापित
admin

टिप्पणी छोड़ें