चौघड़िया। यह शब्द सुनते ही पुरानी दादी की याद आती है, जो सुबह उठती ही पंचांग खोलती थी। हर काम से पहले पूछती थीं, "बेटा, चौघड़िया देखा?" उस वक्त बच्चे थे तो समझ नहीं आता था। लेकिन जब खुद घर बसाया, व्यापार शुरू किया, तब एहसास हुआ कि कई लोग इसे पारंपरिक समय-गणना की समझ मानते हैं। इसमें एक पुरानी और पक्की समझ है।
जैन परंपरा में चौघड़िया का उपयोग सदियों से होता आया है। जैन धर्म में समय की गणना और शुभ मुहूर्त का विशेष स्थान है। यहां हर काम के लिए सही समय देखा जाता है, चाहे वो व्यापार हो, यात्रा हो, या कोई धार्मिक अनुष्ठान।
चौघड़िया असल में क्या है
"चौघड़िया" दो शब्दों से बना है, चौ यानी चार और घड़िया यानी घड़ी। एक घड़ी करीब 24 मिनट की होती है। तो चार घड़ी मिलकर बनती हैं करीब डेढ़ घंटे का एक चौघड़िया।
दिन और रात को अलग-अलग 8-8 भागों में बांटा जाता है। हर भाग का अपना नाम होता है और हर नाम का अपना स्वभाव। कुछ शुभ होते हैं, कुछ मध्यम होते हैं, और कुछ अशुभ होते हैं।
जैन पंचांग में यह गणना सूर्योदय और सूर्यास्त के आधार पर होती है। इसीलिए हर शहर में समय थोड़ा अलग रहता है।
चौघड़िया के आठ प्रकार
चौघड़िया के आठ नाम होते हैं। हर एक का अपना फल होता है।
अमृत सबसे शुभ माना जाता है। इस समय शुरू किया गया कोई भी काम शुभ माना जाता है। व्यापार, विवाह, यात्रा सब के लिए उत्तम।
शुभ भी अच्छा माना जाता है। धार्मिक कार्य, पूजा और नए उद्यम के लिए यह समय ठीक रहता है।
लाभ का अर्थ ही लाभ है। व्यापारिक कार्यों के लिए यह बढ़िया माना जाता है।
चर का मतलब है गतिशील। यात्रा के लिए यह उपयुक्त समय है।
उद्वेग अशुभ है। सरकारी काम और कानूनी मामलों में इसे ठीक माना जाता है, बाकी कामों के लिए नहीं।
काल से बचना चाहिए। इसे सामान्यतः अशुभ माना जाता है।
रोग भी अशुभ है। किसी भी नए काम की शुरुआत इस समय नहीं करनी चाहिए।
वार वेला और काल रात्रि विशेष रूप से अशुभ होते हैं।
जैन परंपरा में चौघड़िया का विशेष स्थान
जैन धर्म में काल का विभाजन बहुत महीन और गहरा है। जैन आगम में समय की शुद्धता पर जोर दिया गया है। जैन साधु और श्रावक दोनों ही मुहूर्त का ध्यान रखते हैं।
जैन पर्यूषण पर्व, दीपावली, और महावीर जयंती जैसे अवसरों पर चौघड़िया देखकर ही पूजा और अनुष्ठान शुरू किए जाते हैं। गुजरात और राजस्थान में जैन व्यापारी आज भी अपना हिसाब-किताब और नया खाता शुभ चौघड़िया में ही खोलते हैं।
यह महज रिवाज नहीं है। इसके पीछे एक सोच है कि जब मन शांत हो और समय अनुकूल हो, तो काम बेहतर होता है।
आज का जैन चौघड़िया (सामान्य संदर्भ के लिए)
नीचे दिया गया चौघड़िया सामान्य सूर्योदय (लगभग 6 बजे) के आधार पर है। आपके शहर में सूर्योदय के अनुसार समय में 10 से 30 मिनट का अंतर हो सकता है। सटीक समय के लिए स्थानीय पंचांग देखें।
किस चौघड़िया में क्या करें
यह सबसे जरूरी सवाल है। लोग अक्सर नाम तो जानते हैं, लेकिन उनका उपयोग कैसे करना है, यह नहीं जानते।
अमृत चौघड़िया में विवाह, व्यापार शुरू करना, दीक्षा लेना, नई दुकान का उद्घाटन सब किया जा सकता है। जैन समुदाय में अनेक परिवार आज भी अपना नया व्यवसाय अमृत चौघड़िया में ही शुरू करते हैं।
शुभ चौघड़िया में धार्मिक पूजा, जिनालय दर्शन और नए घर में प्रवेश शुभ माने जाते हैं।
लाभ चौघड़िया व्यापार और धन संबंधी कामों के लिए अच्छा है। खाते-बही खोलना, निवेश और कर्ज चुकाना इसमें किया जा सकता है।
चर चौघड़िया यात्रा के लिए सही है। रेलगाड़ी पकड़नी हो या कोई नई जगह जाना हो, इस समय निकलना ठीक रहता है।
काल, रोग, और उद्वेग में कोई नया काम शुरू करने से बचें। यह अशुभ माने जाते हैं।
वार के अनुसार चौघड़िया की शुरुआत
चौघड़िया का पहला भाग हर वार पर अलग होता है। यह वार के स्वामी ग्रह पर निर्भर करता है।
रविवार को दिन की शुरुआत उद्वेग से होती है। सोमवार को अमृत से। मंगलवार को रोग से। बुधवार को लाभ से। गुरुवार को शुभ से। शुक्रवार को चर से। शनिवार को काल से।
इसीलिए सोमवार और गुरुवार को शुरुआती चौघड़िया अच्छे होते हैं, और मंगलवार तथा शनिवार में सावधानी रखी जाती है।
जैन पंचांग और चौघड़िया की गणना
जैन पंचांग वीर निर्वाण संवत पर आधारित है। यह संवत भगवान महावीर के निर्वाण से गिना जाता है, जो इस वक्त जो वर्तमान जैन संवत के आसपास माना जाता है।
जैन परंपरा में तिथि, नक्षत्र, और करण के साथ चौघड़िया को भी देखा जाता है। चौघड़िया की गणना ज्योतिषीय है, लेकिन जैन धर्म ने इसे अपनी परंपराओं में इस तरह घोला है कि यह जीवनशैली का हिस्सा बन गया है।
आप Drikpanchang जैसी विश्वसनीय वेबसाइट पर अपने शहर के अनुसार आज का चौघड़िया देख सकते हैं। यह साइट भारत के अलग-अलग शहरों के लिए अलग-अलग समय देती है।
क्या चौघड़िया वाकई काम करता है
यह सवाल मैंने खुद कई बुजुर्गों से पूछा है। उनका जवाब हमेशा एक जैसा रहा। "बेटा, यह भरोसे का विषय है। जब भरोसे के साथ काम करते हो, तो मन शांत रहता है। और शांत मन से किया काम अच्छा होता है।"
इसमें एक मनोवैज्ञानिक सच्चाई है। जब आप तय समय पर, सोच-समझकर काम शुरू करते हैं, तो उसमें ज्यादा ध्यान लगता है। यह शुभ मुहूर्त उस ध्यान को एक अनुष्ठान का रूप देता है।
जो लोग ज्योतिष में विश्वास नहीं रखते, वो इसे एक अनुशासन की तरह देख सकते हैं। और जो रखते हैं, उनके लिए यह आस्था का विषय है। दोनों के लिए इसका अपना मूल्य है।
कुछ जरूरी सावधानियां
पहली बात, चौघड़िया सूर्योदय के आधार पर बदलता है। इसलिए अपने शहर का स्थानीय समय जरूर देखें।
दूसरी बात, अगर कोई काम बहुत जरूरी है और शुभ चौघड़िया का इंतजार संभव नहीं, तो जैन आचार्य यही कहते हैं कि नीयत साफ हो और काम ईमानदारी से किया जाए, यह भी एक तरह का शुभ है।
तीसरी बात, केवल चौघड़िया देखकर बैठ जाना और मेहनत न करना किसी काम का नहीं। यह एक साधन है, अंतिम उपाय नहीं।
राजस्थान और गुजरात के जैन परिवारों की परंपरा
राजस्थान के जोधपुर, जयपुर और जैसलमेर में जैन व्यापारी आज भी दीपावली पर नए बही-खाते अमृत या लाभ चौघड़िया में खोलते हैं। गुजरात के अहमदाबाद और सूरत में यह परंपरा और भी गहरी है।
वहां शादियों में मुहूर्त के साथ चौघड़िया भी देखा जाता है। कई लोग इसे अतिरिक्त सावधानी और संतोष से जोड़कर देखते हैं।
यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है। इसे आधुनिक पीढ़ी भी मान रही है, क्योंकि अपनी परंपराओं से जुड़ाव महसूस होता है।
भारतीय ज्योतिष और पंचांग के बारे में अधिक जानकारी के लिए आप भारतीय ज्योतिष संस्थान की सामग्री भी देख सकते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल:
जैन चौघड़िया और सामान्य चौघड़िया में क्या फर्क है?
मूल गणना दोनों में एक जैसी है। फर्क सिर्फ इतना है कि जैन परंपरा में इसे जैन पंचांग, जैन तिथियों और जैन पर्वों के साथ जोड़कर देखा जाता है। जैन आचार्य और पंडित कभी-कभी कुछ विशेष तिथियों पर अलग विचार भी देते हैं।
क्या रात का चौघड़िया भी उतना ही मान्य है जितना दिन का?
हां, रात का चौघड़िया पूरी तरह मान्य है। जो काम दिन में नहीं हो पाए, उनके लिए रात का शुभ चौघड़िया देखा जाता है। विशेष रूप से धार्मिक अनुष्ठान, मंत्र जाप, और परिवार के महत्वपूर्ण फैसलों के लिए रात का चौघड़िया भी उतना ही उपयोगी है।
अगर मेरे शहर में सूर्योदय 6:15 बजे है तो क्या समय बदल जाएगा?
बिल्कुल बदल जाएगा। पहला चौघड़िया 6:15 से शुरू होगा और फिर हर डेढ़ घंटे बाद अगला। इसीलिए हमेशा अपने शहर के स्थानीय सूर्योदय का समय जांचें। मुंबई और कोलकाता में 30 से 40 मिनट का अंतर हो सकता है।
क्या चौघड़िया में यात्रा करना जरूरी है?
जरूरी तो नहीं। लेकिन जो लोग इस परंपरा को मानते हैं, उनके लिए चर चौघड़िया यात्रा सबसे अनुकूल माना जाता है। अगर चर का समय नहीं मिला, तो अमृत या लाभ में भी यात्रा शुरू की जा सकती है।
उद्वेग चौघड़िया में क्या एकदम कुछ नहीं करना चाहिए?
ऐसा नहीं है। उद्वेग सरकारी कामों के लिए ठीक माना जाता है। पुलिस, अदालत, या सरकारी दफ्तर के काम इस समय करना कुछ पारंपरिक मान्यताओं में उपयुक्त माना गया है। बस नए व्यापार, विवाह, या धार्मिक उद्घाटन इसमें न करें।
चौघड़िया एक पुरानी भारतीय सोच का हिस्सा है जो समय को सम्मान देना सिखाती है। जैन परंपरा ने इसे अपनी आस्था और जीवन दर्शन के साथ बहुत बारीकी से बुना है। इसे मानना या न मानना व्यक्तिगत विषय है। लेकिन इसे समझना, अपनी संस्कृति को समझना है।
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