सोमवार की सुबह जब कोई नया काम शुरू करना हो, कोई यात्रा पर निकलना हो, या घर में कोई शुभ कार्य करना हो, तो सबसे पहले जो सवाल मन में आता है वो यही है, "कौन सा समय सही रहेगा?" हमारे बुजुर्ग बिना सोचे यह जान लेते थे। वो चौघड़िया देखते थे। और उसी हिसाब से दिन की शुरुआत करते थे।
यह भारतीय ज्योतिष का एक पुराना और व्यवस्थित समय-गणना तरीका है, जिसे सदियों से लोग रोज़मर्रा की ज़िंदगी में इस्तेमाल करते आए हैं।
चौघड़िया होता क्या है?
"चौघड़िया" दो शब्दों से बना है। "चौ" यानी चार, और "घड़िया" यानी घड़ी। हिंदी की पुरानी समय गणना में एक घड़ी करीब 24 मिनट की होती थी। तो चार घड़ी मिलकर एक चौघड़िया बनाती हैं, यानी करीब डेढ़ घंटे का एक समय खंड।
दिन को सूर्योदय से सूर्यास्त तक 8 चौघड़ियों में बांटा जाता है। रात को सूर्यास्त से अगले सूर्योदय तक फिर 8 चौघड़ियों में। हर चौघड़िया का अपना नाम है और हर नाम का अपना स्वभाव।
कुल सात चौघड़िया प्रकार होते हैं: अमृत, शुभ, लाभ, चर, काल, रोग, और उद्वेग।
सात चौघड़ियों का स्वभाव
हर चौघड़िया एक ग्रह से जुड़ा होता है और हर ग्रह का अपना असर होता है। जानते हैं कि कौन सा चौघड़िया किस काम के लिए सही है।
अमृत सबसे शुभ माना जाता है। चंद्रमा से जुड़ा है। हर तरह के काम के लिए उत्तम रहता है।
शुभ गुरु यानी बृहस्पति का चौघड़िया है। विवाह, धार्मिक काम और नई शुरुआत के लिए बढ़िया।
लाभ बुध से जुड़ा है। व्यापार, पढ़ाई और आर्थिक काम के लिए अच्छा।
चर शुक्र का चौघड़िया है। यात्रा के लिए सबसे उपयुक्त।
काल शनि का चौघड़िया है। सामान्यतः अशुभ माना जाता है, पर लोहे से जुड़े कामों में कुछ लोग इसे मानते हैं।
रोग मंगल से जुड़ा है। इसमें नए काम शुरू करना सही नहीं है।
उद्वेग सूर्य का चौघड़िया है। सरकारी काम और नेतृत्व से जुड़े मामलों में ठीक है, पर नया काम शुरू करने के लिए नहीं।
सोमवार का चौघड़िया क्यों अलग है?
सोमवार चंद्रमा का दिन है। हिंदी में ही देखें तो "सोम" यानी चंद्रमा। इसीलिए इस दिन चंद्रमा का प्रभाव ज़्यादा होता है।
और जब अमृत चौघड़िया आए, जो खुद चंद्रमा का ही चौघड़िया है, उस समय को कई लोग अधिक शुभ मानते हैं । सोमवार को भगवान शिव और माँ पार्वती की पूजा का दिन भी माना जाता है। तो इस दिन शुभ मुहूर्त में की गई कई लोग इसे शुभ शुरुआत के लिए अच्छा मानते हैं , ऐसा माना जाता है।
सोमवार का दिन चौघड़िया (सामान्य समय सारणी)
नीचे दी गई समय सारणी सामान्य सूर्योदय यानी सुबह 6:00 बजे के आधार पर बनाई गई है। असली समय आपके शहर और तारीख पर थोड़ा बदल सकता है।
कौन सा काम किस चौघड़िया में करें?
यह सबसे ज़रूरी सवाल है। सिर्फ "शुभ समय" जानना काफी नहीं। यह भी जानना ज़रूरी है कि उस समय में कौन सा काम सबसे सही बैठता है।
अमृत में कोई भी नया काम शुरू करें। दवाई लेना, पूजा, व्यापार, निवेश, बच्चे की पहली पढ़ाई, सफर। सब चलता है।
शुभ में विवाह संबंधी बातचीत, गृह प्रवेश, मंदिर जाना, धार्मिक कार्य। यह चौघड़िया बृहस्पति का है, तो बड़े फैसले यहीं लें।
लाभ में दुकान खोलना, बैंक का काम, पैसे का लेन-देन, नई नौकरी पर जाना। व्यापार के लिए यही सबसे सधा हुआ समय है।
चर में यात्रा करना। बस, ट्रेन, हवाई जहाज, कहीं भी जाना हो तो इस समय निकलना ठीक रहता है।
काल, रोग और उद्वेग में नया काम शुरू करने से बचें। हाँ, रोज़मर्रा के काम जैसे खाना, ऑफिस जाना, इन्हें रोकने की ज़रूरत नहीं।
सोमवार को अमृत चौघड़िया की खास बात
सोमवार की सुबह पहला चौघड़िया अमृत का होता है। सूर्योदय के साथ जो समय शुरू होता है, वो करीब डेढ़ घंटे तक चलता है।
यह संयोग हर दिन नहीं मिलता। सोमवार और बुधवार की सुबह पहले चौघड़िया से ही शुभ शुरुआत होती है। इसलिए जिन्हें कोई ज़रूरी काम शुरू करना हो, उनके लिए सोमवार की सुबह 6 से 7:30 बजे का समय बहुत अच्छा माना जाता है।
मेरी माँ हमेशा कहती थीं कि सोमवार की सुबह उठो, नहाओ और जो पहला काम करो, वो अच्छे मन से करो। शायद यही चौघड़िया की असली समझ है, सही समय पर सही मन से काम करना।
अभिजित मुहूर्त एक और ज़रूरी बात
चौघड़िया के साथ एक और चीज़ का ज़िक्र ज़रूरी है, वो है अभिजित मुहूर्त।
दोपहर 12 बजे के आसपास करीब 48 मिनट का एक समय होता है जिसे अभिजित मुहूर्त कहते हैं। अभिजित मुहूर्त को पारंपरिक रूप से शुभ माना जाता है। अलग-अलग पंचांगों में इसके समय और मान्यता में थोड़ा अंतर हो सकता है।
सोमवार को दोपहर में जब चौघड़िया अमृत का हो और अभिजित मुहूर्त भी उस समय पड़े, तो वो समय खास हो जाता है।
भारतीय ज्योतिष के बारे में अधिक जानकारी के लिए Drikpanchang.com पर जाएँ, जहाँ हर दिन का चौघड़िया आपके शहर के सूर्योदय के हिसाब से मिलता है।
राहुकाल से बचाव चौघड़िया का एक और पहलू
चौघड़िया देखते वक्त राहुकाल का ध्यान रखना भी ज़रूरी है।
सोमवार को राहुकाल सुबह 7:30 से 9:00 बजे के बीच होता है। इस समय कोई नया काम शुरू करना ठीक नहीं माना जाता। यह समय रोज़ बदलता नहीं, पर शहर के हिसाब से थोड़ा आगे-पीछे हो सकता है।
राहुकाल और चौघड़िया दोनों मिलाकर देखें। जो चौघड़िया शुभ हो और राहुकाल में न पड़े, उसे अधिक अनुकूल समय माना जाता है।
शहर के हिसाब से समय बदलता है
यह बात बहुत ज़रूरी है और अक्सर लोग भूल जाते हैं।
दिल्ली में सूर्योदय सुबह 6:15 पर होगा तो चौघड़िया 6:15 से शुरू होगा। मुंबई में सूर्योदय 6:40 बजे होगा, तो वहाँ से। चेन्नई, कोलकाता, अहमदाबाद, सब जगह अलग।
इसलिए ऊपर दी गई समय सारणी एक आधार है। अपने शहर का सही समय जानने के लिए timeanddate.com पर अपना शहर डालें और सूर्योदय का सही समय देखें।
हर दिन का पहला चौघड़िया उस दिन के स्वामी ग्रह से तय होता है। इसे याद रखने का सबसे आसान तरीका यह है:
रविवार: उद्वेग से शुरू। सोमवार: अमृत से शुरू। मंगलवार: रोग से शुरू। बुधवार: लाभ से शुरू। गुरुवार: शुभ से शुरू। शुक्रवार: चर से शुरू। शनिवार: काल से शुरू।
इसके बाद हर दिन एक तय क्रम में चौघड़िया बदलते हैं। एक बार यह क्रम याद हो गया तो बिना किसी ऐप के भी चौघड़िया निकाला जा सकता है।
क्या चौघड़िया मानना ज़रूरी है?
यह एक सीधा सवाल है।
कोई ज़बरदस्ती नहीं। कोई डर नहीं। चौघड़िया एक परंपरागत समय-बोध है जो भारतीय जीवनशैली का हिस्सा रहा है। इसे मानने वाले लोग अपनी शुरुआत को एक अच्छे मन के साथ जोड़ते हैं।
मनोविज्ञान की भाषा में कहें तो जब हम किसी काम को सोच-समझकर, सही वक्त पर करते हैं, तो उसमें हमारी एकाग्रता और इरादा दोनों मजबूत होते हैं। शायद यही असली फायदा है।
(FAQ)
सोमवार का सबसे शुभ चौघड़िया कौन सा है?
सोमवार की सुबह का पहला चौघड़िया अमृत होता है, जो सूर्योदय से डेढ़ घंटे तक चलता है। इसे काफी शुभ माना जाता है। दोपहर 12 बजे भी अमृत चौघड़िया आता है।
क्या रात में भी चौघड़िया देखना ज़रूरी है?
हाँ, अगर रात को कोई यात्रा करनी हो या कोई ज़रूरी काम हो, तो रात का चौघड़िया देखना कई लोग उपयोगी मानते हैं। रात को लाभ, शुभ और अमृत चौघड़िया में काम करें।
काल और रोग चौघड़िया में क्या बिल्कुल काम नहीं करना चाहिए?
रोज़ के ज़रूरी काम जैसे खाना खाना, ऑफिस जाना, बच्चों को स्कूल छोड़ना, इनके लिए चौघड़िया की ज़रूरत नहीं। सिर्फ कोई नई शुरुआत, निवेश, यात्रा या शुभ कार्य में ध्यान रखें।
हर शहर में चौघड़िया का समय अलग क्यों होता है?
सूर्योदय का समय हर शहर में अलग होता है। चूँकि चौघड़िया सूर्योदय से शुरू होता है, इसलिए शहर बदलते ही समय बदल जाता है। दिल्ली और मुंबई में 20 से 25 मिनट का फर्क हो सकता है।
क्या बिना पंचांग के चौघड़िया पता किया जा सकता है?
हाँ। हर दिन का पहला चौघड़िया और उनका क्रम तय होते हैं। अपने शहर का सूर्योदय का समय पता करें और उसमें डेढ़-डेढ़ घंटे जोड़ते जाएं। हर सोमवार पहला चौघड़िया अमृत से शुरू होता है।
सोमवार का यह चौघड़िया ज्ञान आपकी रोज़ की योजना में एक छोटी पर सोची-समझी मदद कर सकता है। बाकी, भरोसा और मेहनत तो आपकी अपनी ही रहेंगी।
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