शुक्रवार का दिन वैसे भी घर में एक अलग माहौल लेकर आता है। कुछ लोग इसे शुक्र का दिन मानते हैं, कुछ माँ लक्ष्मी का।
जयपुर में बहुत से परिवार सुबह उठकर पहले चौघड़िया देखते हैं, फिर दिन की शुरुआत करते हैं।
यह एक पुरानी सांस्कृतिक परंपरा है। यह एक पुरानी परंपरा है जो पीढ़ियों से चली आ रही है।
22 मई 2026 को जयपुर में सूर्योदय सुबह करीब 5:47 बजे होगा और सूर्यास्त शाम 7:18 बजे के आसपास रहेगा। इसी आधार पर दिन और रात के चौघड़िया की गणना होती है।
चौघड़िया क्या होता है, सीधे शब्दों में
चौघड़िया यानी "चार घड़ी" का समय। एक दिन को 8 बराबर हिस्सों में बाँटा जाता है, और हर हिस्से को एक चौघड़िया कहते हैं।
हर चौघड़िया किसी एक ग्रह से जुड़ा होता है और उसका अपना स्वभाव होता है।
कुछ शुभ माने जाते हैं, कुछ साधारण, और कुछ ऐसे जिनमें नया काम शुरू न करने की परंपरा है।
यह व्यवस्था वैदिक पंचांग से आती है। जयपुर जैसे शहर में आज भी दुकानदार, व्यापारी, और गृहस्थ इसे रोज़ाना देखते हैं।
जयपुर 22 मई 2026 दिन और रात का पूरा चौघड़िया
आज का राहुकाल जयपुर, 22 मई 2026
राहुकाल शुक्रवार को सुबह के हिसाब से बदलता है। जयपुर में 22 मई 2026 को राहुकाल सुबह 10:30 बजे से 12:00 बजे के बीच रहने का अनुमान है।
राहुकाल में नया काम न शुरू करने की परंपरा काफी पुरानी है।
शादी की बात करना, नई दुकान खोलना, बड़ा सौदा पक्का करना, इन सबके लिए लोग राहुकाल से बचते हैं। हालाँकि यह पूरी तरह व्यक्तिगत आस्था की बात है।
आज के सबसे अच्छे मुहूर्त कौन से हैं
22 मई 2026 शुक्रवार को जयपुर के लिए अमृत चौघड़िया दो बार आएगा। एक सुबह 8:30 से 9:51 के बीच, और एक शाम 5:59 से 7:18 के बीच। परंपरागत रूप से अमृत को पारंपरिक रूप से काफी शुभ माना जाता है।
शुभ चौघड़िया दोपहर 11:12 से 12:34 तक रहेगा। इस दौरान पूजा, यात्रा, या किसी भी नए शुभ कार्य की शुरुआत करना काफी उचित माना जाता है।
लाभ चौघड़िया सुबह 7:08 से 8:30 तक रहेगा। लाभ यानी फायदे का समय। व्यापारिक चर्चा या दुकान खोलने के लिए यह समय उपयुक्त माना जाता है।
चौघड़िया के आठों नाम और उनका अर्थ
बहुत लोगों को नाम तो पता होते हैं, पर असल मतलब नहीं। यहाँ सरल भाषा में समझाता हूँ।
जयपुर में शुक्रवार का महत्व
जयपुर की गलियों में शुक्रवार को एक अलग माहौल रहता है।
खासकर हवा महल के पास की दुकानें और गोविंद देव जी मंदिर में सुबह की भीड़।
बहुत से लोग शुक्रवार को माँ लक्ष्मी की पूजा करते हैं और अमृत या शुभ चौघड़िया में ही पूजा शुरू करते हैं।
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जयपुर का व्यापारी वर्ग, खासकर पुराने शहर में, चौघड़िया को आज भी काफी महत्व देता है।
मोती डूंगरी गणेश मंदिर पर शुक्रवार की सुबह जो भीड़ होती है, वो इस परंपरा की लोकप्रियता दिखाती है।
शुक्रवार को किन कामों के लिए चौघड़िया देखें
हर काम के लिए चौघड़िया ज़रूरी नहीं। पर कुछ खास मौकों पर लोग इसे देखना पसंद करते हैं।
नई दुकान या व्यापार की शुरुआत के लिए लाभ या अमृत चौघड़िया पारंपरिक रूप से उपयुक्त माना जाता है।
यात्रा शुरू करना हो तो चर चौघड़िया पारंपरिक रूप से उपयुक्त माना जाता है। गाड़ी निकालने से पहले लोग समय देखते हैं।
घर की खरीदारी या कोई बड़ा सौदा करना हो तो शुभ या अमृत में करना कई लोग उपयुक्त मानते हैं।
पूजा या धार्मिक काम के लिए अमृत और शुभ दोनों उपयुक्त माने जाते हैं।
रोग, काल, और उद्वेग में नए काम न शुरू करने की परंपरा है, पर रोज़मर्रा के साधारण काम इनमें भी होते रहते हैं।
चौघड़िया की गणना कैसे होती है
यह थोड़ा तकनीकी है, पर समझना मुश्किल नहीं।
हर दिन का पहला चौघड़िया उस दिन के स्वामी ग्रह से तय होता है। शुक्रवार का स्वामी शुक्र ग्रह है।
शुक्र से जुड़ा चौघड़िया है "चर"। इसीलिए शुक्रवार को दिन का पहला चौघड़िया "चर" होता है।
उसके बाद एक निश्चित क्रम चलता है: चर, लाभ, अमृत, काल, शुभ, रोग, उद्वेग। यह क्रम हर दिन एक ही रहता है, बस शुरुआत बदलती है।
दिन की कुल अवधि को 8 बराबर भागों में बाँटते हैं।
जयपुर में 22 मई को दिन करीब 13 घंटे 31 मिनट का है, तो हर चौघड़िया करीब 1 घंटा 41 मिनट का होता है।
पंचांग और चौघड़िया में फर्क
यह सवाल बहुत लोग पूछते हैं। पंचांग एक पूरी व्यवस्था है, जिसमें तिथि, वार, नक्षत्र, योग, और करण पाँचों शामिल होते हैं।
चौघड़िया इसी पंचांग का एक हिस्सा है, पर यह सिर्फ समय की गुणवत्ता बताता है।
पंचांग ज़्यादा विस्तृत जानकारी देता है। शादी, नामकरण या बड़े संस्कार के लिए पंचांग देखा जाता है।
रोज़मर्रा के कामों के लिए चौघड़िया को कई लोग पर्याप्त मानते हैं।
जयपुर में ज्योतिष संस्थान और पंडित जी पंचांग की जानकारी के लिए लोकप्रिय संदर्भ स्रोत माने जाते हैं।
Drik Panchang जैसी वेबसाइट पर भी तिथि और मुहूर्त की जानकारी मिलती है।
आज का अभिजित मुहूर्त
अभिजित मुहूर्त हर दिन दोपहर के समय आता है। यह सूर्य के मध्य आकाश के करीब होता है।
22 मई 2026 को जयपुर में अभिजित मुहूर्त करीब 11:53 बजे से 12:45 बजे तक रहने का अनुमान है।
शुक्रवार को अभिजित मुहूर्त कुछ मान्यताओं में कुछ परंपराओं में कम महत्व दिया जाता है, पर यह पूरी तरह परंपरागत धारणा है।
ज़्यादातर कामों के लिए यह समय ठीक माना जाता है।
दिशाशूल शुक्रवार को कौन सी दिशा में यात्रा
शुक्रवार को पश्चिम दिशा में यात्रा शुरू करना कुछ मान्यताओं में ठीक नहीं माना जाता।
जयपुर से अजमेर की तरफ जाना हो (जो पश्चिम में है) तो कुछ लोग पहले एक कदम किसी और दिशा में रखते हैं।
यह एक पारंपरिक लोक मान्यता है, ज़रूरी नहीं कि हर कोई इसे माने।
मुहूर्त देखकर काम करना एक व्यावहारिक नज़रिया
मैं यह मानता हूँ कि चौघड़िया एक मार्गदर्शक है, जीवन में मार्गदर्शन का एक पारंपरिक तरीका है।
कई बार काम की मजबूरी होती है, समय नहीं मिलता। उस हालत में शुभ चौघड़िया का इंतज़ार करना व्यावहारिक नहीं।
पर जहाँ लचीलापन हो, जहाँ आप थोड़ा वक्त इधर-उधर कर सकते हों, वहाँ चौघड़िया देखकर काम शुरू करने मेंकई लोग इसे उपयोगी मानते हैं।
यह एक सांस्कृतिक अभ्यास है जो मन को शांति और विश्वास देता है। और कई लोग मानते हैं कि मानसिक शांति से काम पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
Timeanddate.com पर जयपुर के सूर्योदय और सूर्यास्त का सटीक समय देख सकते हैं।
FAQ: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल:
चौघड़िया हर शहर में अलग-अलग क्यों होता है?
क्योंकि चौघड़िया की गणना सूर्योदय और सूर्यास्त के समय पर आधारित है। जयपुर में सूर्योदय दिल्ली या मुंबई से थोड़ा अलग समय पर होता है। इसलिए हर शहर का चौघड़िया उसी के स्थानीय समय के अनुसार तय होता है।
राहुकाल और चौघड़िया में क्या फर्क है?
राहुकाल एक अलग गणना है जो राहु ग्रह से जुड़ी मानी जाती है। यह हर दिन करीब डेढ़ घंटे का होता है। चौघड़िया पूरे दिन को 8 हिस्सों में बाँटता है और उनकी गुणवत्ता बताता है। दोनों पंचांग परंपरा का हिस्सा हैं, पर अलग-अलग उद्देश्य से देखे जाते हैं।
क्या रात के चौघड़िया दिन के जितने ही मान्य और उपयोगी माने जाते हैं?
परंपरागत रूप से दिन के चौघड़िया को ज़्यादा महत्व दिया जाता है, पर रात के चौघड़िया भी मान्य माने जाते हैं। जो लोग रात में काम शुरू करते हैं या यात्रा करते हैं, वे रात के चौघड़िया देखते हैं।
शुभ और अमृत में कौन सा बेहतर माना जाता है?
कई मान्यताओं में अमृत को शुभ से थोड़ा ऊपर माना जाता है। अमृत को कई शुभ कार्यों के लिए उपयुक्त बताया जाता है। शुभ भी काफी अनुकूल माना जाता है, खासकर धार्मिक कामों के लिए। दोनों में काम करना परंपरागत रूप से ठीक माना जाता है।
क्या काल चौघड़िया में कोई काम नहीं करना चाहिए?
परंपरा कहती है कि नया काम, खासकर बड़े फैसले, काल चौघड़िया में टालें। पर रोज़मर्रा के काम जैसे खाना, पढ़ाई, ऑफिस जाना, इनके लिए कोई रोक नहीं है। यह पूरी तरह व्यक्तिगत आस्था की बात है।
अस्वीकरण: यह लेख पारंपरिक मान्यताओं, लोक परंपराओं और सांस्कृतिक जानकारी पर आधारित है। इसे केवल सामान्य जानकारी और शैक्षिक उद्देश्य के लिए लिखा गया है। किसी भी महत्वपूर्ण निर्णय के लिए किसी योग्य ज्योतिषी या पंडित से सलाह लें।
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