Aaj Ka Choghadiya Kota Friday, 5 June 2026, की सुबह हो चुकी है, और राजस्थान के कोटा शहर में बहुत से लोग दिन का पहला काम शुरू करने से पहले एक चीज़ जरूर देखते हैं।
चौघड़िया।
कोई दुकान का शटर उठाने से पहले पूछता है, कोई सफर पर निकलने से पहले।
और यह आदत आज की नहीं, पुरानी है।
यहाँ मैंने कोटा के लिए आज के दिन और रात दोनों के चौघड़िया, राहुकाल, गुलिक काल, यमगंड और अभिजित मुहूर्त का समय एक जगह रखा है।
ये सभी समय पंचांग की गणना पर आधारित हैं और कोटा के स्थानीय सूर्योदय और सूर्यास्त समय को आधार मानकर तैयार किए गए हैं।
कोटा का सूर्योदय और सूर्यास्त, 5 जून 2026
चौघड़िया की पूरी गणना सूर्योदय और सूर्यास्त से जुड़ी होती है।
इसलिए पहले यह देख लेना जरूरी है कि आज कोटा में सूरज कब उगता है और कब ढलेगा।
| विवरण | समय |
|---|---|
| सूर्योदय (Sunrise) | 05:43 AM |
| सूर्यास्त (Sunset) | 07:17 PM |
| दिन की कुल अवधि | 13 घंटे 34 मिनट |
| वार | शुक्रवार |
| पंचांग स्रोत | द्रिक पंचांग आधारित |
कोटा राजस्थान में है, और जून की शुरुआत में सूर्योदय काफी जल्दी होता है।
सुबह 5 बजकर 43 मिनट पर दिन का पहला चौघड़िया शुरू हो जाता है।
आज का चौघड़िया मुहूर्त समय, कोटा, 5 जून 2026
दिन का चौघड़िया
| चौघड़िया | समय |
|---|---|
| चर | 05:43 AM – 07:17 AM |
| लाभ | 07:17 AM – 08:51 AM |
| अमृत | 08:51 AM – 10:25 AM |
| काल | 10:25 AM – 11:59 AM |
| शुभ | 11:59 AM – 01:33 PM |
| रोग | 01:33 PM – 03:07 PM |
| काल | 03:07 PM – 04:41 PM |
| लाभ | 04:41 PM – 06:15 PM |
रात का चौघड़िया
| चौघड़िया | समय |
|---|---|
| अमृत | 07:17 PM – 08:43 PM |
| चर | 08:43 PM – 10:09 PM |
| रोग | 10:09 PM – 11:35 PM |
| काल | 11:35 PM – 01:01 AM |
| लाभ | 01:01 AM – 02:27 AM |
| उद्वेग | 02:27 AM – 03:53 AM |
| शुभ | 03:53 AM – 05:19 AM |
| अमृत | 05:19 AM – 05:43 AM |
शुक्रवार को शुक्र ग्रह का दिन माना जाता है।
इस दिन अमृत और शुभ चौघड़िया को पारंपरिक रूप से अनुकूल माना जाता है , खासकर व्यापार और घरेलू कामों के लिए।
राहुकाल, यमगंड और गुलिक काल, कोटा, 5 जून 2026
पंचांग में तीन समय ऐसे होते हैं जिन्हें परंपरागत रूप से नए कामों के लिए टाला जाता है।
राहुकाल, यमगंड और गुलिक काल।
इनका मतलब यह नहीं कि इस समय कुछ भी नहीं होगा, लेकिन कई लोग इस दौरान कोई नया काम शुरू करने से बचते हैं।
| काल का नाम | समय |
|---|---|
| राहुकाल | 10:25 AM – 12:00 PM |
| यमगंड | 03:07 PM – 04:41 PM |
| गुलिक काल | 07:17 AM – 08:51 AM |
शुक्रवार को राहुकाल सुबह करीब साढ़े दस बजे से दोपहर तक रहता है।
जो लोग इस परंपरा को मानते हैं, वे इस दौरान बैंक जाना, गाड़ी खरीदना या कोई नया अनुबंध साइन करने जैसे काम टाल देते हैं।
अभिजित मुहूर्त और इसका महत्व
अभिजित मुहूर्त को पंचांग में काफी अच्छा समय माना जाता है।
यह हर दिन दोपहर में लगभग 48 मिनट का होता है, और इसे कई लोग विभिन्न कार्यों के लिए उपयुक्त मानते हैं।
| मुहूर्त | समय |
|---|---|
| अभिजित मुहूर्त | 11:53 AM – 12:47 PM |
दोपहर का यह समय उन लोगों के लिए काम का है जो सुबह का कोई शुभ समय चूक जाते हैं।
चौघड़िया के नाम और उनका सामान्य अर्थ
अगर आप पहली बार चौघड़िया देख रहे हैं, तो यह टेबल आपके काम आएगी।
हर चौघड़िया का एक नाम होता है और उसे परंपरागत रूप से किसी न किसी ग्रह से जोड़ा जाता है।
| चौघड़िया नाम | परंपरागत अर्थ | किस काम के लिए |
|---|---|---|
| अमृत | पारंपरिक रूप से काफी अनुकूल माना जाता है | हर तरह के काम |
| शुभ | पारंपरिक रूप से अनुकूल माना जाता है | विवाह, शिक्षा, धार्मिक काम |
| लाभ | व्यापार और लेन-देन से जुड़े कार्यों के लिए अनुकूल माना जाता है | व्यापार, नई शुरुआत |
| चर | सामान्य श्रेणी, यात्रा के लिए उपयुक्त | यात्रा, सफर |
| काल | कम अनुकूल माना जाता है | नए काम से बचें |
| रोग | अशुभ माना जाता है | टालने की सलाह दी जाती है |
| उद्वेग | अशुभ माना जाता है | महत्त्वपूर्ण कार्यों के लिए सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है |
यह समझना जरूरी है कि ये परंपरागत मान्यताएं हैं।
हर व्यक्ति इन्हें अपनी आस्था और जरूरत के हिसाब से देखता है।
शुक्रवार और शुक्र ग्रह का चौघड़िया से रिश्ता
शुक्रवार का दिन शुक्र ग्रह से जुड़ा माना जाता है।
पंचांग की गणना में हर वार का पहला चौघड़िया उस दिन के स्वामी ग्रह से तय होता है।
| वार | स्वामी ग्रह | पहला दिन चौघड़िया |
|---|---|---|
| सोमवार | चंद्र | अमृत |
| मंगलवार | मंगल | रोग |
| बुधवार | बुध | लाभ |
| गुरुवार | गुरु | शुभ |
| शुक्रवार | शुक्र | चर |
| शनिवार | शनि | काल |
| रविवार | सूर्य | उद्वेग |
शुक्रवार का पहला दिन चौघड़िया "चर" से शुरू होता है।
इसीलिए आज सुबह का पहला चौघड़िया चर है, जिसे यात्रा के लिए उपयुक्त माना जाता है।
कोटा में चौघड़िया देखने की परंपरा
कोटा सिर्फ शिक्षा का शहर नहीं है।
यहाँ व्यापारी परिवार, किसान और नौकरीपेशा लोग, सभी किसी न किसी रूप में पंचांग से जुड़े हैं।
हाड़ौती क्षेत्र में दुकान खोलने का मुहूर्त हो, बच्चे का नामकरण हो, या गाड़ी की डिलीवरी लेनी हो, लोग अक्सर समय देखकर ही काम शुरू करते हैं।
यह एक पुरानी सांस्कृतिक परंपरा मानी जाती है जो पीढ़ियों से चली आ रही है।
पंचांग और चौघड़िया की जानकारी के लिए आप द्रिक पंचांग जैसी लोकप्रिय संदर्भ स्रोत से भी पुष्टि कर सकते हैं।आज के शुभ समय में क्या करें, क्या टालें
यहाँ कुछ सामान्य बातें हैं जो परंपरागत मान्यताओं पर आधारित हैं।
पारंपरिक रूप से अनुकूल माने जाने वाले समय में:
- नई दुकान या व्यवसाय शुरू करना
- बच्चे का पहला दिन स्कूल में
- गृह प्रवेश या नई जगह रहने जाना
- लंबी यात्रा पर निकलना
- कोई महत्त्वपूर्ण दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करना
राहुकाल और काल चौघड़िया में:
- कोई नया काम शुरू करने से परंपरागत रूप से बचा जाता है
- जरूरी बात हो तो कई लोग राहुकाल समाप्त होने के बाद कार्य शुरू करना उपयुक्त मानते हैं
- दैनिक काम जैसे खाना बनाना, पढ़ना, ऑफिस जाना इस दौरान भी होते रहते हैं
यह ध्यान रखना जरूरी है कि ये केवल पारंपरिक मान्यताएं हैं।
कोई भी निर्णय अपनी समझ और परिस्थिति के हिसाब से लें।
चौघड़िया की गणना कैसे होती है, संक्षेप में
बहुत से लोग यह जानना चाहते हैं कि ये समय कहाँ से आते हैं।
चौघड़िया की गणना सरल मानी जाती है।
दिन के सूर्योदय से सूर्यास्त तक का कुल समय 8 बराबर हिस्सों में बाँटा जाता है।
हर हिस्से को एक चौघड़िया कहते हैं, यानी लगभग "सवा घड़ी" या करीब 90 मिनट का समय।
रात के लिए भी यही तरीका है, बस सूर्यास्त से अगले दिन के सूर्योदय तक के समय को 8 बराबर हिस्सों में बाँटा जाता है।
हर हिस्से का नाम एक तय क्रम के हिसाब से दिया जाता है, और यह क्रम वार के ग्रह के आधार पर बदलता है।
इसीलिए हर शहर का चौघड़िया थोड़ा अलग होता है क्योंकि हर जगह सूर्योदय का समय अलग है।
कोटा और जयपुर का चौघड़िया भले ही करीब हो, लेकिन मुंबई या चेन्नई से काफी अलग होगा।
समय और तारीख की पुष्टि के लिए टाइम एंड डेट भी एक लोकप्रिय संदर्भ स्रोत है।आज का पंचांग संक्षेप, कोटा
| पंचांग विवरण | जानकारी |
|---|---|
| तिथि | ज्येष्ठ शुक्ल दशमी |
| वार | शुक्रवार |
| नक्षत्र | विशाखा |
| योग | सिद्ध |
| करण | गर |
| सूर्योदय | 05:43 AM |
| सूर्यास्त | 07:17 PM |
| राहुकाल | 10:25 AM – 12:00 PM |
| अभिजित मुहूर्त | 11:53 AM – 12:47 PM |
पंचांग की यह जानकारी द्रिक पंचांग की गणना पद्धति पर आधारित है।
शहर के अक्षांश और देशांतर के हिसाब से 2 से 5 मिनट का अंतर हो सकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
शुक्रवार को राहुकाल कितने बजे होता है?
शुक्रवार को राहुकाल सुबह करीब 10 बजकर 25 मिनट से दोपहर 12 बजे तक रहता है। कोटा में यह समय सूर्योदय के आधार पर तय होता है और थोड़ा ऊपर-नीचे हो सकता है।
क्या राहुकाल में यात्रा करना ठीक है?
पारंपरिक मान्यता के अनुसार राहुकाल में नई यात्रा शुरू करने से बचने की सलाह दी जाती है। लेकिन पहले से चल रही यात्रा या रोजमर्रा के सफर पर इसके संबंध में अलग-अलग पारंपरिक मान्यताएँ प्रचलित हैं। यह पूरी तरह व्यक्तिगत आस्था पर निर्भर है।
अमृत चौघड़िया में कौन से काम अच्छे माने जाते हैं?
अमृत चौघड़िया को पंचांग में पारंपरिक रूप से काफी अनुकूल माना जाता है। इस समय में नई दुकान खोलना, कोई अनुबंध करना, या महत्त्वपूर्ण बैठक निर्धारित करना पारंपरिक रूप से ठीक माना जाता है। यह मान्यता पर आधारित है।
चर चौघड़िया किस काम के लिए होता है?
चर चौघड़िया को मुख्य रूप से यात्रा के लिए उपयुक्त माना जाता है। इसे सामान्य श्रेणी में रखा जाता है। शुक्रवार का पहला दिन चौघड़िया चर से शुरू होता है क्योंकि शुक्र ग्रह से यही क्रम तय होता है।
कोटा का चौघड़िया जयपुर से अलग क्यों होता है?
हर शहर का सूर्योदय का समय थोड़ा अलग होता है। चौघड़िया की गणना सूर्योदय से होती है, इसलिए कोटा और जयपुर में 2 से 4 मिनट का अंतर सामान्य है। अपने शहर का स्थानीय समय स्थानीय पंचांग से देखना बेहतर रहता है।
अंत में एक बात
चौघड़िया और पंचांग हमारी संस्कृति का एक पुराना हिस्सा है।
कोटा जैसे शहर में जहाँ व्यापार और परिवार दोनों की जड़ें गहरी हैं, यह परंपरा आज भी प्रचलित है।
इसे कई लोग सांस्कृतिक परंपरा के रूप में देखते हैं।
अंतिम निर्णय अपनी आवश्यकता, परिस्थिति और उपलब्ध जानकारी के आधार पर लेना उचित माना जाता है।
बस इतना ही।
सामान्य जानकारी: चौघड़िया, राहुकाल और मुहूर्त संबंधी मान्यताएँ विभिन्न क्षेत्रों, परिवारों और परंपराओं के अनुसार अलग-अलग हो सकती हैं। यह लेख पारंपरिक पंचांग मान्यताओं और सांस्कृतिक परंपराओं पर आधारित है। यहाँ दी गई जानकारी केवल सामान्य जानकारी और सांस्कृतिक उद्देश्य के लिए है। किसी भी महत्वपूर्ण निर्णय के लिए अपने विवेक और आवश्यकता होने पर संबंधित विषय के जानकार व्यक्ति से परामर्श कर सकते हैं।
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