त्योहार की बात करें तो, भाद्रपद का महीना आते ही घर-घर में गणेश जी की स्थापना होती है।
दस दिन की धूम, आरती, प्रसाद, और फिर आता है वो दिन जब आंखें नम हो जाती हैं। अनंत चतुर्दशी।
यही वो दिन है जब गणपति बप्पा विदा होते हैं और लोग "गणपति बप्पा मोरया, पुढच्या वर्षी लवकर या" की गूंज में उन्हें जल में विसर्जित करते हैं।
लेकिन हर साल एक सवाल ज़रूर उठता है कि यह तारीख कब है, पूजा का सही समय क्या है, और विसर्जन कब करना चाहिए।
तो चलिए, 2026 की अनंत चतुर्दशी की पूरी जानकारी यहाँ दे देते हैं।
अनंत चतुर्दशी 2026 की सही तारीख
पंचांग के अनुसार, अनंत चतुर्दशी 2026 में शनिवार, 12 सितंबर 2026 को पड़ रही है।
भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि इसी दिन रहेगी।
गणेश चतुर्थी से ठीक दसवें दिन यह पर्व आता है, इसलिए इसे अनंत चतुर्दशी के साथ-साथ गणेश विसर्जन का दिन भी कहा जाता है।
चतुर्दशी तिथि कब से कब तक रहेगी
पंचांग गणना के आधार पर:
- चतुर्दशी तिथि आरंभ: 11 सितंबर 2026, शुक्रवार की रात लगभग 11:40 बजे
- चतुर्दशी तिथि समाप्त: 12 सितंबर 2026, शनिवार की रात लगभग 10:25 बजे
यानी पूरा दिन 12 सितंबर 2026 को ही चतुर्दशी तिथि रहेगी। पूजा और विसर्जन दोनों इसी दिन करना पारंपरिक रूप से उचित माना जाता है।
(ये समय अनुमानित पंचांग गणना पर आधारित हैं। अपने क्षेत्र के स्थानीय पंचांग से एक बार ज़रूर मिलान करें।)
पूजा मुहूर्त 2026
राहुकाल के दौरान कोई भी पूजा या विसर्जन करने से आमतौर पर बचने की सलाह दी जाती है।
शनिवार को राहुकाल सुबह करीब 9 से 10:30 बजे के बीच रहता है, इसलिए उससे पहले या बाद में विसर्जन करना ठीक रहेगा।
अनंत चतुर्दशी का अर्थ क्या है
"अनंत" यानी जिसका कोई अंत नहीं। यह पर्व भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा से जुड़ा है।
इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करके बाजू पर "अनंत" नामक 14 गांठों वाला धागा बांधा जाता है।
पारंपरिक मान्यता के अनुसार यह धागा समृद्धि और मंगल का प्रतीक माना जाता है।
गणेश विसर्जन भी इसी दिन होता है क्योंकि गणेश उत्सव भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी से शुरू होकर चतुर्दशी तक चलता है।
गणेश विसर्जन की परंपरा और तरीका
विसर्जन सिर्फ मूर्ति को पानी में डालना नहीं है। इसके पीछे पूरी एक भावना है। विदाई की।
आमतौर पर जो क्रम अपनाया जाता है वो कुछ ऐसा होता है:
पहले षोडशोपचार पूजा की जाती है। यानी सोलह प्रकार से पूजन। फिर आरती होती है, प्रसाद वितरण होता है और उसके बाद जुलूस के साथ या घर से ही नदी, तालाब, या कृत्रिम जलाशय तक गणपति जी को ले जाया जाता है।
विसर्जन से पहले गणेश जी से अगले साल फिर आने की प्रार्थना की जाती है। और फिर जल में मूर्ति का विसर्जन।
कई लोग अब पर्यावरण के प्रति जागरूकता को ध्यान में रखते हुए मिट्टी की गणेश मूर्ति का उपयोग करते हैं जो पानी में घुल जाती है। यह एक अच्छी सोच है।
अनंत सूत्र पूजा विधि
इस दिन विष्णु जी की पूजा में अनंत सूत्र यानी धागा बांधने की विशेष परंपरा है। इसमें रेशमी या कच्चे धागे में 14 गांठें लगाई जाती हैं।
पुरुष इसे दाहिने हाथ में और महिलाएं बाएं हाथ में बांधती हैं।
पूजा सामग्री में आमतौर पर शामिल होती हैं:
- अनंत सूत्र (14 गांठ वाला धागा, लाल या पीला)
- कुमकुम, हल्दी, अक्षत
- पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर)
- तुलसी पत्र, फूल
- धूप, दीप
- नैवेद्य में मोदक या खीर
भगवान विष्णु की प्रतिमा के सामने इस सूत्र को रखकर पूजन किया जाता है, फिर बाजू पर बांधा जाता है।
गणेश चतुर्थी 2026 कब से शुरू होगी
अगर अनंत चतुर्दशी 12 सितंबर 2026 है, तो गणेश चतुर्थी 10 दिन पहले यानी 2 सितंबर 2026, बुधवार को होगी।
2 सितंबर से 12 सितंबर तक यानी पूरे 10 दिन गणेशोत्सव मनाया जाएगा।
अनंत चतुर्दशी और जैन परंपरा
यह दिन जैन धर्म में भी महत्वपूर्ण है। जैन समुदाय में इस दिन अनंत चतुर्दशी पर्युषण पर्व का समापन होता है।
यह उनके सबसे पवित्र पर्वों में से एक माना जाता है। पर्युषण में 8 या 10 दिन उपवास, तप, और क्षमापना होती है। अनंत चतुर्दशी पर "मिच्छामि दुक्कड़म्" कहकर एक-दूसरे से क्षमा माँगी जाती है।
दोनों परंपराओं में इस दिन का गहरा आध्यात्मिक महत्व है, भले ही पूजा पद्धति अलग हो।
विसर्जन के दौरान इन बातों का ध्यान रखें
पर्यावरण की बात करें तो नदियों और तालाबों में प्लास्टर ऑफ पेरिस या रासायनिक रंगों से बनी मूर्तियाँ डालना पानी को नुकसान पहुँचाता है। कई शहरों में अब नगर निगम और प्रशासन कृत्रिम विसर्जन कुंड बनाते हैं।
अगर घर पर छोटी मूर्ति है, तो घर में ही बाल्टी में या गमले की मिट्टी में विसर्जन किया जा सकता है, खासकर अगर मूर्ति मिट्टी की बनी हो।
यह कोई नियम नहीं है, लेकिन कई परिवार यह तरीका अपनाने लगे हैं और इसे भी श्रद्धा के साथ किया जा सकता है।
पर्यावरण से जुड़ी अधिक जानकारी के लिए भारत सरकार का पर्यावरण मंत्रालय एक उपयोगी संसाधन है।
इस दिन क्या करें और क्या न करें
कुछ बातें जो परंपरागत रूप से मानी जाती हैं:
करें:
- सुबह स्नान के बाद विष्णु सहस्रनाम या अनंत पूजा करें
- अनंत सूत्र श्रद्धा के साथ बांधें
- गणपति की विदाई भावपूर्ण आरती के साथ करें
- ब्राह्मण को या किसी ज़रूरतमंद को भोजन कराएं
न करें:
- कई परंपराओं में राहुकाल के दौरान पूजा या विसर्जन से बचने की सलाह दी जाती है
- रासायनिक रंगों वाली मूर्ति को नदी में न डालें
- इस दिन भारी भोजन से बचने की परंपरा है
पंचांग और तिथि की जानकारी कहाँ से लें
सटीक पंचांग तिथि के लिए drikpanchang.com एक लोकप्रिय पंचांग संदर्भ स्रोत है जहाँ आप अपने शहर के अनुसार सूर्योदय, तिथि और मुहूर्त देख सकते हैं। स्थानीय पंडित जी से भी एक बार सलाह ले लेना अच्छा रहता है क्योंकि क्षेत्र के अनुसार समय में थोड़ा फर्क हो सकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
अनंत चतुर्दशी 2026 में किस दिन है?
पंचांग के अनुसार अनंत चतुर्दशी 2026 में शनिवार, 12 सितंबर को मनाई जाएगी। इसी दिन गणेश विसर्जन भी होगा।
गणेश विसर्जन का सबसे अच्छा समय कौन सा माना जाता है?
पारंपरिक रूप से सुबह 7 से 9 बजे या शाम 6 से 8:30 बजे का समय विसर्जन के लिए उपयुक्त माना जाता है। राहुकाल के समय विसर्जन से आमतौर पर बचा जाता है।
अनंत चतुर्दशी पर कौन से भगवान की पूजा होती है?
इस दिन मुख्य रूप से भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा होती है। साथ ही यह गणेश उत्सव का अंतिम दिन भी होता है, इसलिए गणपति जी की विदाई भी इसी दिन होती है।
अनंत सूत्र में 14 गांठें क्यों होती हैं?
कई मान्यताओं के अनुसार 14 लोकों का प्रतीक माना जाता है यह सूत्र। कुछ परंपराओं में इसे चतुर्दशी तिथि से जोड़कर भी देखा जाता है। यह एक धार्मिक परंपरा है जो पीढ़ियों से चली आ रही है।
जैन धर्म में अनंत चतुर्दशी का क्या महत्व है?
जैन परंपरा में यह दिन पर्युषण पर्व का समापन होता है। इस दिन क्षमापना की जाती है और "मिच्छामि दुक्कड़म्" कहकर सभी से क्षमा माँगी जाती है। यह आध्यात्मिक चिंतन और क्षमापना से जुड़ा पर्व माना जाता है।
अंत में
अनंत चतुर्दशी सिर्फ एक तारीख नहीं है। यह दस दिन की भक्ति, उत्साह और परिवार की एकजुटता का समापन है।
गणपति की विदाई में जो भावना होती है, वो हर साल उन्हें विशेष भावनात्मक जुड़ाव बनाती है।
12 सितंबर 2026 को इस पर्व की तैयारी समय रहते तैयारी की जा सकती है।
अस्वीकरण: यह लेख पारंपरिक मान्यताओं, धार्मिक परंपराओं और पंचांग गणनाओं पर आधारित है। यह केवल सामान्य जानकारी और सांस्कृतिक जागरूकता के उद्देश्य से लिखा गया है। तिथि और मुहूर्त की सटीक जानकारी के लिए अपने स्थानीय पंचांग या पंडित जी से परामर्श लें।
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