साल 2026 में दो बार चंद्र ग्रहण पड़ने वाला है। पहला चंद्र ग्रहण 3 मार्च 2026 को होगा।
दूसरा और अंतिम चंद्र ग्रहण 27-28 अगस्त 2026 को है।
इस लेख में दोनों ग्रहणों की तिथि, समय, सूतक काल और भारत में दृश्यता की पूरी जानकारी सरल भाषा में दी गई है।
प्रकाशन से पहले समय पुनः सत्यापित करें क्योंकि स्थानीय गणना में अंतर हो सकता है।
Chandra Grahan 2026 List के अनुसार पहला ग्रहण 3 मार्च 2026 को दोपहर 2:16 बजे से शाम 7:53 बजे तक रहेगा और यह भारत में दृश्य होगा। दूसरा ग्रहण 27-28 अगस्त 2026 को है, जो भारत में दिन के समय होने के कारण यहां से दिखाई नहीं देगा। दोनों ग्रहण पूर्णिमा तिथि को ही पड़ते हैं।
चंद्र ग्रहण क्या होता है और यह कब लगता है
जब पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है तो उसे चंद्र ग्रहण कहते हैं। यह हमेशा पूर्णिमा के दिन ही होता है।
कई हिंदू परंपराओं में चंद्र ग्रहण को धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है और कुछ लोग इस दौरान विशेष अनुष्ठान करते हैं।
ग्रहण तीन प्रकार के होते हैं। पूर्ण चंद्र ग्रहण, आंशिक चंद्र ग्रहण और उपच्छाया चंद्र ग्रहण।
तीनों की प्रकृति और धार्मिक महत्व अलग-अलग माना जाता है।
कई परंपराओं में दृश्य ग्रहण को अधिक महत्व दिया जाता है।
उपच्छाया चंद्र ग्रहण के संबंध में विभिन्न परंपराओं में अलग-अलग मान्यताएं मिलती हैं।
2026 में कुल कितने चंद्र ग्रहण हैं
2026 में कुल चार ग्रहण हैं जिनमें दो सूर्य ग्रहण और दो चंद्र ग्रहण शामिल हैं।
ग्रहण आमतौर पर एक मौसम में आते हैं और लगभग छह माह के अंतराल पर दोहराए जाते हैं।
2026 में ये सर्दियों के अंत और गर्मियों के अंत में पड़ रहे हैं।
दोनों चंद्र ग्रहणों की संक्षिप्त जानकारी नीचे तालिका में दी गई है।
| विवरण | पहला चंद्र ग्रहण | दूसरा चंद्र ग्रहण |
|---|---|---|
| तिथि | 3 मार्च 2026 (मंगलवार) | 27-28 अगस्त 2026 (शुक्रवार) |
| ग्रहण प्रकार | पूर्ण चंद्र ग्रहण | आंशिक चंद्र ग्रहण |
| भारत में दृश्यता | हां (आंशिक रूप से) | नहीं (दिन का समय) |
| सूतक काल | लागू | लागू नहीं |
| पूर्णिमा | फाल्गुन पूर्णिमा (होली) | भाद्रपद पूर्णिमा |
पहला चंद्र ग्रहण 3 मार्च 2026 पूरी जानकारी
3 मार्च 2026 को पूर्ण चंद्र ग्रहण होगा। यह 2026 का पहला चंद्र ग्रहण है।
यह 1.14 परिमाण का पूर्ण ग्रहण है जिसमें चंद्रमा पृथ्वी की उम्ब्रल छाया में पूरी तरह ढक जाएगा। उस दौरान चंद्रमा लाल रंग का दिखाई दे सकता है। इसे कई लोग "ब्लड मून" भी कहते हैं।
कुल अवधि लगभग 3 घंटे 27 मिनट रहेगी। ग्रहण दोपहर 3:21 बजे IST पर शुरू होगा और शाम 6:46 बजे IST पर समाप्त होगा। में शुरू होने के कारण यह उस समय दिखाई नहीं दिया। शाम को चंद्रोदय के बाद कई शहरों में शाम 6:26 बजे से 6:46 बजे के बीच यह स्पष्ट रूप से दिखा।
| ग्रहण चरण | भारतीय समय (IST) |
|---|---|
| उपच्छाया संपर्क प्रारंभ | दोपहर 2:16 बजे |
| आंशिक ग्रहण प्रारंभ | दोपहर 3:21 बजे |
| पूर्ण ग्रहण प्रारंभ | शाम 4:04 बजे (UTC अनुसार) |
| अधिकतम ग्रहण | शाम 5:04 बजे (UTC अनुसार) |
| पूर्ण ग्रहण समाप्त | शाम 6:02 बजे (UTC अनुसार) |
| आंशिक ग्रहण समाप्त | शाम 6:46 बजे IST |
| उपच्छाया संपर्क समाप्त | शाम 7:53 बजे IST |
नोट: UTC और IST में 5 घंटे 30 मिनट का अंतर है। पूर्ण ग्रहण चरण के समय भारत में दिन था, इसलिए वह दृश्य नहीं था।
3 मार्च 2026 का सूतक काल
चंद्र ग्रहण का सूतक काल ग्रहण से 9 घंटे पहले शुरू होता है।
सूतक काल का समय संबंधित परंपराओं और स्थानीय मान्यताओं के अनुसार देखा जाता है।
अगर आपके शहर में चंद्र ग्रहण दिखाई न दे लेकिन पास के किसी शहर में दिखे, तो भी उसे नहीं मानना चाहिए।
सूतक की सावधानियाँ केवल तभी लागू होती हैं जब ग्रहण आपके शहर में दृश्य हो।
अगर बादल या किसी और कारण से चंद्रमा दिखाई न दे, तब भी चंद्र ग्रहण माना जाता है।
सूतक काल के दौरान पारंपरिक रूप से कुछ सावधानियां रखी जाती हैं। ये मान्यताएं पीढ़ियों से चली आ रही हैं।
- भोजन बनाना और खाना आमतौर पर सूतक के दौरान टाला जाता है।
- मंदिरों के पट बंद रहते हैं।
- कुछ परिवारों में गर्भवती महिलाओं के लिए विशेष सावधानियां रखी जाती हैं।
- बच्चों और बीमारों के लिए सूतक का समय अलग माना जाता है।
- भोजन से जुड़ी परंपराएं विभिन्न परिवारों और क्षेत्रों में अलग-अलग हो सकती हैं।
- ग्रहण खत्म होने के बाद सामान्य दिनचर्या शुरू की जा सकती है।
3 मार्च 2026 भारत के किन शहरों में दिखा ग्रहण
पहला चंद्र ग्रहण 2026 अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मिजोरम, नागालैंड, आइजोल और गुवाहाटी में दृश्य था।
जयपुर, बेंगलुरु, चेन्नई, लखनऊ, दिल्ली और मुंबई में आंशिक चंद्र ग्रहण दिखाई दिया।
भारत के विभिन्न क्षेत्रों में ग्रहण की दृश्यता अलग-अलग स्तर की रही।
| शहर / क्षेत्र | दृश्यता का प्रकार |
|---|---|
| गुवाहाटी, आइजोल, इंफाल | पूर्ण चंद्र ग्रहण दृश्य |
| दिल्ली, जयपुर, लखनऊ | आंशिक चंद्र ग्रहण दृश्य |
| मुंबई, पुणे, अहमदाबाद | आंशिक / उपच्छाया दृश्य |
| चेन्नई, बेंगलुरु, हैदराबाद | आंशिक चंद्र ग्रहण दृश्य |
| कोलकाता, भुवनेश्वर | आंशिक ग्रहण दृश्य |
नोट: सटीक समय आपके शहर के अनुसार अलग हो सकता है।
3 मार्च 2026 पूर्ण ग्रहण की अवधि और विशेषता
इस ग्रहण की पूर्ण अवधि यानी टोटैलिटी 57 मिनट 27 सेकंड रही।
पूर्ण चंद्र ग्रहण पूर्वी एशिया, दक्षिण-पूर्व एशिया, ऑस्ट्रेलिया, प्रशांत महासागर, उत्तरी अमेरिका के अधिकांश हिस्सों और दक्षिण अमेरिका के कुछ उत्तरी क्षेत्रों में दृश्य रहा।
इन क्षेत्रों के दर्शक चंद्रमा को पृथ्वी की उम्ब्रल छाया में पूरी तरह डूबा हुआ देख सके।
सबसे अच्छा दृश्य पूर्वोत्तर एशिया, उत्तरपश्चिम उत्तरी अमेरिका और मध्य प्रशांत से मिला। भारत और ऑस्ट्रेलिया में दर्शकों ने चंद्रोदय के समय ग्रहण देखा।
दूसरा चंद्र ग्रहण 28 अगस्त 2026 पूरी जानकारी
अगस्त 2026 में एक ही समय सूर्य और चंद्र ग्रहण दोनों होंगे। यहां हम दूसरे और अंतिम चंद्र ग्रहण की बात करेंगे।
यह एक आंशिक चंद्र ग्रहण होगा जिसमें चंद्रमा केवल आंशिक रूप से पृथ्वी की उम्ब्रा में प्रवेश करेगा।
आंशिक ग्रहण की अवधि 3 घंटे 18 मिनट रहेगी।
यह ग्रहण भारत के नई दिल्ली से दृश्य नहीं होगा क्योंकि इस दौरान चंद्रमा क्षितिज के नीचे रहेगा। स्थानीय समय के अनुसार अधिकतम ग्रहण 28 अगस्त 2026 को प्रातः 9:42:52 IST पर होगा।
28 अगस्त 2026 का ग्रहण समय (वैश्विक)
| ग्रहण चरण | IST समय (भारत) |
|---|---|
| उपच्छाया संपर्क प्रारंभ | प्रातः 6:55 बजे IST |
| आंशिक ग्रहण प्रारंभ | प्रातः 8:04 बजे IST |
| अधिकतम ग्रहण | प्रातः 9:43 बजे IST |
| आंशिक ग्रहण समाप्त | दोपहर 11:21 बजे IST |
| उपच्छाया संपर्क समाप्त | दोपहर 12:30 बजे IST |
नई दिल्ली के लिए 28 अगस्त 2026 को कोई चंद्र ग्रहण दृश्य नहीं होगा। भारत के अधिकांश हिस्सों में यही स्थिति रहेगी क्योंकि दिन का समय होगा।
28 अगस्त 2026 का ग्रहण किन देशों में दिखेगा
28 अगस्त 2026 का चंद्र ग्रहण दुनिया के एक बड़े हिस्से में दिखेगा।
यह अफ्रीका, यूरोप, स्कैंडिनेविया, आइसलैंड, ग्रीनलैंड के कुछ हिस्सों, अंटार्कटिका और अमेरिका के अधिकांश हिस्सों में दृश्य होगा। दुनिया की लगभग 12 प्रतिशत आबादी यानी करीब 98.7 करोड़ लोग इसके सभी चरण देख सकेंगे।
16 प्रतिशत यानी करीब 1.3 अरब लोग आंशिक चरण देख पाएंगे।
यह आंशिक ग्रहण होते हुए भी पूर्ण ग्रहण जैसा दिखेगा और कुछ लोग इसे "ब्लड मून" से मिलता-जुलता मान सकते हैं।
Time and Date की एक रिपोर्ट के अनुसार इस दौरान चंद्रमा का लगभग 96 प्रतिशत भाग पृथ्वी की छाया में आ जाएगा।
भारत में यह दिन का समय होने के कारण दृश्य नहीं होगा। इसलिए इस ग्रहण का सूतक काल भारत में लागू नहीं होगा।
28 अगस्त 2026 का सूतक काल
नई दिल्ली के लिए 28 अगस्त 2026 को सूतक काल लागू नहीं है।
अगर आपके शहर में चंद्र ग्रहण दिखाई न दे लेकिन पास के किसी शहर में दिखे, तो उसे नहीं मानना चाहिए।
सूतक की सावधानियाँ तभी लागू होती हैं जब ग्रहण आपके शहर में दृश्य हो।
चंद्र ग्रहण 2026 और धार्मिक परंपराएं
कई धार्मिक परंपराओं में चंद्र ग्रहण के दौरान विशेष अनुष्ठानों का उल्लेख मिलता है।
कई भक्त ग्रहण काल को प्रार्थना और मंत्र जाप के लिए उपयोग करते हैं।
ऐसी मान्यता है कि चंद्र ग्रहण के दौरान मंत्र जाप को कई लोग आध्यात्मिक अभ्यास के रूप में करते हैं।
परंपरागत रूप से ग्रहण के दौरान जो काम करने की सलाह दी जाती है, वे इस प्रकार हैं।
- मंत्र जाप और ध्यान करना।
- ईश्वर का स्मरण और भजन-कीर्तन।
- कुछ लोग ग्रहण समाप्ति के बाद स्नान की परंपरा निभाते हैं।
- खिचड़ी या सात्विक भोजन बाद में करना।
- दान और पुण्य कार्य करना।
चंद्र ग्रहण को नग्न आंखों या दूरबीन से देखा जा सकता है।
इसके लिए किसी फिल्टर की जरूरत नहीं होती। सूर्य ग्रहण के विपरीत चंद्र ग्रहण देखना आंखों के लिए पूरी तरह सुरक्षित है।
ग्रहण और ज्योतिषीय गणना
चंद्र ग्रहण जिस राशि और नक्षत्र में होता है, उसका ज्योतिषीय महत्व अलग माना जाता है।
3 मार्च 2026 का ग्रहण फाल्गुन पूर्णिमा को है। होली से ठीक पहले यह ग्रहण पड़ने से इस दिन को कई लोग धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानते हैं।
कई पुजारी और ज्योतिषी इस दिन की राशि और नक्षत्र के आधार पर प्रभाव बताते हैं।
ज्योतिष में ग्रहण को राहु और केतु से जोड़ा जाता है। पारंपरिक मान्यताओं में चंद्रमा पर राहु की छाया पड़ना ग्रहण का कारण माना जाता है।
ये पारंपरिक मान्यताएं हैं। वैज्ञानिक दृष्टि से ग्रहण एक खगोलीय घटना है।
चंद्र ग्रहण 2026 और होली का संयोग
3 मार्च 2026 का चंद्र ग्रहण फाल्गुन पूर्णिमा को था।
होली का त्योहार भी फाल्गुन पूर्णिमा को मनाया जाता है। इस वजह से 2026 में होली और चंद्र ग्रहण एक ही दिन पड़े।
पारंपरिक रूप से कई परिवारों ने ग्रहण समाप्त होने के बाद होलिका दहन या होली से जुड़े कार्यक्रम किए।
ग्रहण के दौरान चंद्रमा का रंग कई स्थानों पर अलग दिखाई दिया और शाम 6:46 बजे IST पर यह समाप्त हुआ।
सूतक काल समाप्त होने के बाद सामान्य गतिविधियाँ, अनुष्ठान और होली की तैयारियां फिर से शुरू हुईं।
चंद्र ग्रहण 2026 की संपूर्ण तुलनात्मक तालिका
| विवरण | 3 मार्च 2026 | 28 अगस्त 2026 |
|---|---|---|
| ग्रहण प्रकार | पूर्ण चंद्र ग्रहण | आंशिक चंद्र ग्रहण |
| परिमाण | 1.14 | 0.92 |
| भारत में दृश्य | हां (पूर्वोत्तर में पूर्ण) | नहीं |
| ग्रहण स्पर्श (IST) | दोपहर 2:16 बजे | प्रातः 6:55 बजे |
| ग्रहण मोक्ष (IST) | शाम 7:53 बजे | दोपहर 12:30 बजे |
| सूतक काल | सुबह 9:20 बजे से शाम 6:46 बजे | लागू नहीं (भारत) |
| पूर्णिमा | फाल्गुन पूर्णिमा | भाद्रपद पूर्णिमा |
| वैश्विक दृश्यता | एशिया, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका | यूरोप, अफ्रीका, अमेरिका |
चंद्र ग्रहण के समय क्या करें और क्या न करें
ग्रहण के दौरान पारंपरिक रूप से कुछ बातों का ध्यान रखा जाता है। ये सदियों पुरानी मान्यताएं हैं जो सांस्कृतिक परंपरा का हिस्सा हैं।
क्या करें
- मंत्र जाप और ध्यान में समय लगाएं।
- ग्रहण समाप्ति पर स्नान करें।
- गरीबों को दान दें।
- ग्रहण को नग्न आंखों से देखें, किसी फिल्टर की जरूरत नहीं।
क्या न करें
- सूतक काल में भोजन बनाने से बचें।
- मंदिर में प्रवेश आमतौर पर सूतक के दौरान नहीं किया जाता।
- नए कार्यों की शुरुआत ग्रहण काल में टाली जाती है।
- गर्भवती महिलाएं घर के भीतर रहना उचित मानती हैं।
भोजन से जुड़ी परंपराएं सांस्कृतिक हैं, वैज्ञानिक नहीं। हर व्यक्ति अपनी श्रद्धा के अनुसार इन्हें माने।
चंद्र ग्रहण देखना कितना सुरक्षित है
चंद्र ग्रहण को नग्न आंखों से देखना पूरी तरह सुरक्षित है। सूर्य ग्रहण के विपरीत चंद्रमा की छाया में से गुजरने पर आंखों को कोई खतरा नहीं होता।
दूरबीन से भी आराम से देखा जा सकता है। चंद्रमा की लाल आभा इस दौरान आंखों को बेहद सुंदर लगती है।
अगला चंद्र ग्रहण कब है
2026 का अंतिम चंद्र ग्रहण 28 अगस्त को है और अगला चंद्र ग्रहण 20 फरवरी 2027 को होगा।
जो लोग ग्रहण देखने के शौकीन हैं, वे 2027 की तैयारी पहले से कर सकते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
2026 में कितने चंद्र ग्रहण हैं और कब हैं?
2026 में दो चंद्र ग्रहण हैं। पहला 3 मार्च 2026 को पूर्ण चंद्र ग्रहण है। दूसरा आंशिक चंद्र ग्रहण 27-28 अगस्त 2026 को है। पहला ग्रहण भारत में दृश्य होगा जबकि दूसरा भारत से नहीं दिखेगा।
3 मार्च 2026 का सूतक काल कब से कब तक था?
तक काल सुबह 9:20 बजे शुरू हुआ और ग्रहण की समाप्ति पर शाम 6:46 बजे IST पर समाप्त हुआ। सूतक काल केवल उन्हीं के लिए लागू माना जाता है जिनके शहर में ग्रहण दृश्य था।
28 अगस्त 2026 का चंद्र ग्रहण भारत में दिखेगा या नहीं?
28 अगस्त 2026 का चंद्र ग्रहण भारत में नहीं दिखेगा क्योंकि उस समय भारत में दिन होगा। इसलिए इसका सूतक काल भी भारत में लागू नहीं होगा।
क्या चंद्र ग्रहण और सूर्य ग्रहण अलग-अलग होते हैं?
हां, दोनों बिल्कुल अलग घटनाएं हैं। जब पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है तो चंद्र ग्रहण होता है और यह हमेशा पूर्णिमा के दिन होता है। सूर्य ग्रहण में चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच आता है और यह अमावस्या को होता है। चंद्र ग्रहण देखना सुरक्षित है पर सूर्य ग्रहण देखने के लिए विशेष सुरक्षा जरूरी है।
क्या हर पूर्णिमा को चंद्र ग्रहण होता है
नहीं, हर पूर्णिमा को ग्रहण नहीं होता। ग्रहण एक मौसम में आते हैं और लगभग छह माह के अंतराल पर दोहराए जाते हैं। चंद्रमा की कक्षा पृथ्वी की कक्षा से थोड़ी झुकी होती है इसलिए हर बार छाया नहीं पड़ती। ग्रहण तभी होता है जब तीनों पिंड एक सीधी रेखा में आएं।
निष्कर्ष
2026 में दो चंद्र ग्रहण पड़े। पहला 3 मार्च को पूर्ण चंद्र ग्रहण था जो भारत के पूर्वोत्तर हिस्सों में स्पष्ट दिखा और सूतक काल की मान्यता विभिन्न परंपराओं और क्षेत्रों में अलग-अलग देखी जाती है।
दूसरा 28 अगस्त को आंशिक ग्रहण है,जो भारत से दृश्य नहीं होगा। दोनों ग्रहणों की तिथि, समय और दृश्यता समझकर आप पहले से तैयारी कर सकते हैं।
अपने क्षेत्र के अनुसार स्थानीय पंचांग की जानकारी देखी जा सकती है।
अस्वीकरण: यह लेख पारंपरिक मान्यताओं, सांस्कृतिक परंपराओं और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध खगोलीय आंकड़ों पर आधारित है। यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी और सांस्कृतिक संदर्भ के लिए है। स्थानीय गणनाओं में अंतर संभव है।
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