घर में कोई शुभ काम होता है, तो घर के बड़े-बुजुर्ग पहले यही पूछते हैं, "चोघड़िया देखा? पंचांग में मुहूर्त है?" दोनों बातें एक साथ आती हैं, पर दोनों एक चीज़ नहीं हैं।
बहुत लोग इन्हें एक ही समझ लेते हैं। और यह पूरी तरह सही नहीं माना जाता , क्योंकि दोनों का काम लगभग एक जैसा लगता है, यानी सही समय चुनना। पर जब ज़रा गहराई से देखते हैं, तो दोनों की अपनी-अपनी दुनिया है।
चोघड़िया क्या होता है?
चोघड़िया शब्द दो हिस्सों से बना है, "चो" यानी चार, और "घड़िया" यानी घड़ी।
मतलब हर चोघड़िया लगभग डेढ़ घंटे का एक समय-खंड होता है।
दिन में सूर्योदय से सूर्यास्त तक ८ चोघड़िया होते हैं। रात में सूर्यास्त से अगले सूर्योदय तक फिर ८ चोघड़िया। यानी पूरे दिन-रात में कुल १६ चोघड़िया।
हर चोघड़िया का एक नाम है और उसका स्वामी ग्रह अलग होता है। उसी से तय होता है कि वो समय शुभ है, सामान्य है, या टाला जाए।
चोघड़िया के ७ नाम इस तरह हैं:
पंचांग क्या होता है?
पंचांग एक पूरा ज्योतिषीय कैलेंडर है। "पंच" यानी पाँच, और "अंग" यानी अंग या हिस्से। यानी पाँच चीज़ों से मिलकर बना है।
वो पाँच चीज़ें हैं, तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण। हर एक चीज़ अलग जानकारी देती है।
सिर्फ शुभ समय नहीं, बल्कि त्योहार, व्रत, ग्रह-गोचर, सूर्योदय-सूर्यास्त, चंद्रमा की स्थिति, सब कुछ पंचांग में होता है।
पंचांग हर साल नया बनता है। इसे ज्योतिषशास्त्र के विद्वान तैयार करते हैं। भारत के अलग-अलग क्षेत्रों में अलग पंचांग प्रचलित हैं, जैसे विक्रम संवत पंचांग, शक संवत पंचांग, या केरल-तमिलनाडु के क्षेत्रीय पंचांग।
पंचांग के पाँच अंग और उनका काम
सबसे सरल तरीके से कहें तो, चोघड़िया एक छोटा औज़ार है, पंचांग एक पूरा ग्रंथ।
चोघड़िया सिर्फ दिन-रात के समय को ८-८ खंडों में बाँटता है और बताता है कि कौन सा खंड किस काम के लिए ठीक रहेगा।
यह देखना आसान है। किसी भी व्यक्ति को पंडित के पास जाने की ज़रूरत नहीं, बस वार देखा और उस दिन का चोघड़िया क्रम निकाल लिया।
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पंचांग उससे कहीं बड़ा है। वो सिर्फ समय नहीं बताता, वो यह विस्तृत ज्योतिषीय गणनाओं पर आधारित होता है । किसी काम का पूरा मुहूर्त निकालना हो, तो पंचांग की ज़रूरत पड़ती है।
चोघड़िया कैसे निकालते हैं?
यह जानना ज़रूरी है कि चोघड़िया सूर्योदय के समय से शुरू होता है।
हर जगह सूर्योदय का समय अलग होता है, तो दिल्ली का चोघड़िया और मुंबई का चोघड़िया थोड़ा अलग होगा।
हर वार का पहला चोघड़िया उस दिन के स्वामी ग्रह से तय होता है।
जैसे रविवार को पहला चोघड़िया "उद्वेग" होता है क्योंकि रविवार का स्वामी सूर्य है। सोमवार को पहला चोघड़िया "अमृत" होता है क्योंकि चंद्रमा का स्वभाव अमृत चोघड़िया से जुड़ा है।
पंचांग के पाँच अंग और उनका काम
पंचांग को समझना थोड़ा ज़्यादा समय लेता है, पर एक बार समझ आ जाए तो उसकी गहराई दिखती है।
तिथि चंद्रमा की स्थिति से तय होती है। एक चंद्र मास में ३० तिथियाँ होती हैं, शुक्ल पक्ष की १५ और कृष्ण पक्ष की १५। कौन सी तिथि शुभ है, यह हर काम के हिसाब से अलग होता है।
वार तो हम सब जानते हैं, सोमवार से रविवार। पर ज्योतिष में हर वार का स्वामी ग्रह होता है और उसका असर उस दिन की शुरुआत से जुड़ा रहता है।
नक्षत्र चंद्रमा जिस तारा-समूह में होता है उसे नक्षत्र कहते हैं। कुल २७ नक्षत्र हैं। विवाह जैसे बड़े कामों में नक्षत्र बहुत ध्यान से देखा जाता है।
योग सूर्य और चंद्रमा की देशांतर स्थिति से बनता है। कुल २७ योग होते हैं। इनमें से कुछ, जैसे विष्कुम्भ और वज्र, अशुभ माने जाते हैं। कुछ जैसे अमृत सिद्धि योग बहुत शुभ।
करण तिथि का आधा हिस्सा होता है। दिन में दो करण होते हैं। ये भी मुहूर्त निकालने में काम आते हैं।
कौन सा कब काम आता है?
यह सबसे व्यावहारिक सवाल है। मेरे अपने घर में जब भी कोई छोटा काम होता है, जैसे नई गाड़ी निकालना, दुकान खोलना, कोई नया काम शुरू करना, तो बस चोघड़िया देख लेते हैं।
पर जब बात शादी की हो, या नए घर में प्रवेश की, या किसी बच्चे के जन्म संस्कार की, तब पंडित जी पंचांग खोलते हैं।
वहाँ तिथि, नक्षत्र, योग सब मिलाया जाता है।
यानी दोनों की ज़रूरतें अलग-अलग मौकों पर पड़ती हैं। चोघड़िया रोज़ का टूल है। पंचांग बड़े फैसलों का संदर्भ।
क्या चोघड़िया पंचांग का हिस्सा है?
हाँ, तकनीकी रूप से चोघड़िया की जानकारी पंचांग में भी दी जाती है। लेकिन चोघड़िया खुद पंचांग का "अंग" नहीं है। वो पंचांग के पाँच मूल अंगों में नहीं आता।
चोघड़िया एक अलग परंपरागत गणना-पद्धति है जो पंचांग के साथ-साथ चलती है। कई पंचांग किताबें आजकल चोघड़िया भी छापती हैं, ताकि पाठकों को सुविधा हो।
जैन परंपरा में पंचांग का उपयोग
जैन समाज में भी पंचांग का उपयोग होता है, लेकिन उनका अपना जैन पंचांग अलग होता है। उसमें पर्युषण, दशलक्षण जैसे पर्वों की तिथियाँ और चंद्र गणना होती हैं।
जैन समाज में चोघड़िया की जगह "मुहूर्त" और "करण" का ज़्यादा उपयोग होता है। परंपरा अलग हो सकती है, लेकिन आकाशीय गणना का आधार वही रहता है।
आज के समय में ये कैसे काम करता है?
मोबाइल ने सब बदल दिया है। अब ज़्यादातर लोग ऐप से चोघड़िया देखते हैं।
कई पंचांग वेबसाइटें हैं जो रोज़ का चौघड़िया और तिथि दोनों बताती हैं।
भारत सरकार का राष्ट्रीय पंचांग भी उपलब्ध है, जो शक संवत पर आधारित है।
इसे India Meteorological Department से जुड़ी कैलेंडर प्रणाली के अंतर्गत स्वीकार किया गया है। इसके अलावा, ज्योतिष और पंचांग की विस्तृत जानकारी के लिए Drik Panchang जैसी विश्वसनीय वेबसाइटें भी उपयोगी हैं।
पर एक बात ध्यान रहे, ऐप जो चोघड़िया दिखाता है, वो आपके शहर के सूर्योदय पर आधारित होना चाहिए। अगर ऐप लोकेशन सेट नहीं है, तो समय थोड़ा गलत भी हो सकता है।
गलतफहमियाँ जो अक्सर होती हैं
एक बड़ी गलतफहमी यह है कि काल चोघड़िया में कोई भी काम नहीं होना चाहिए। पर परंपरागत मान्यता के अनुसार काल चोघड़िया सरकारी काम, कुछ पारंपरिक कार्यों और कुछ विशेष कामों के लिए ठीक माना जाता है। यह पूरी तरह अशुभ नहीं है।
दूसरी गलतफहमी यह है कि पंचांग सिर्फ पंडितों के लिए है। ऐसा नहीं है।
पंचांग की बुनियादी जानकारी कोई भी समझ सकता है। बस थोड़ा समय और रुचि चाहिए।
और तीसरी, यह कि चोघड़िया देखने से काम का नतीजा बदल जाता है। परंपरा में इसे मार्गदर्शन माना जाता है, गारंटी नहीं। यह सोच रखना ज़्यादा संतुलित है।
FAQ
क्या चोघड़िया देखना ज़रूरी है हर काम के लिए?
हर काम के लिए यह अनिवार्य नहीं है। रोज़ के छोटे कामों में बहुत लोग इसे नहीं देखते। पर जिन्हें परंपरा में आस्था है, वे बड़े या नए कामों को देखना पसंद करते हैं। यह व्यक्तिगत श्रद्धा का मामला है।
पंचांग हर साल क्यों बदलता है?
क्योंकि चंद्रमा, सूर्य और ग्रहों की स्थिति हर साल अलग होती है। तिथियाँ, नक्षत्र, और ग्रह-गोचर हर साल नए सिरे से गणना करके तैयार होते हैं। इसीलिए हर साल नया पंचांग आता है।
क्या चोघड़िया और राहुकाल एक ही चीज़ हैं?
नहीं, दोनों अलग हैं। राहुकाल हर दिन का एक विशेष अशुभ समय होता है जो राहु ग्रह से जुड़ा है। चोघड़िया एक अलग समय-विभाजन पद्धति है। दोनों अलग-अलग गणनाओं से निकलते हैं।
क्या पंचांग सभी धर्मों में एक जैसा होता है?
नहीं। हिंदू, जैन, और बौद्ध परंपराओं में पंचांग अलग-अलग होते हैं। हिंदू पंचांग में भी विक्रम संवत और शक संवत जैसी अलग-अलग पद्धतियाँ हैं। इसलिए एक क्षेत्र का पंचांग दूसरे क्षेत्र से थोड़ा अलग हो सकता है।
क्या मोबाइल ऐप का चोघड़िया भरोसेमंद होता है?
अच्छे ऐप जो आपकी सटीक लोकेशन और स्थानीय सूर्योदय के हिसाब से गणना करते हैं, वे आमतौर पर उपयोगी माने जाते हैं । पर अगर ऐप में लोकेशन सेट न हो, तो समय थोड़ा इधर-उधर हो सकता है। भरोसेमंद ऐप में हमेशा शहर का नाम और सूर्योदय का समय दिखता है।
दोनों की अपनी जगह है। चोघड़िया रोज़ के फैसलों में काम का है। पंचांग जीवन के बड़े पलों के लिए। दोनों को समझकर इस्तेमाल करना ही सबसे संतुलित तरीका माना जा सकता है।
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