बुधवार, 3 जून 2026 का दिन शुरू हो चुका है, और सुबह उठते ही बहुत से लोगों के मन में एक ही सवाल रहता है।
कौन-सा समय किसी नए काम के लिए ठीक रहेगा?
गुजरात और देश के कई हिस्सों में चौघड़िया देखने की आदत पीढ़ियों से चली आ रही है।
दुकान का मुहूर्त हो, यात्रा हो, या कोई जरूरी फोन, लोग पहले समय देख लेते हैं।
यहाँ मैंने आज दिन और रात दोनों के चौघड़िया, राहुकाल, गुलिक काल और यमगंड का समय एक ही जगह रखा है।
साथ में यह भी समझाया है कि इनका मतलब क्या होता है और इन्हें व्यवहार में कैसे काम में लाया जा सकता है।
एक बात पहले ही साफ कर दूँ। ये समय परंपरा और पंचांग की गणना पर आधारित हैं, और शहर के हिसाब से थोड़े आगे-पीछे होते रहते हैं।
आज की मुख्य जानकारी एक नज़र में
बुधवार का दिन परंपरा में बुध ग्रह से जुड़ा होता है।
पढ़ाई, व्यापार, हिसाब-किताब, लेन-देन और बातचीत से जुड़े कामों के लिए इस दिन को कई लोग अनुकूल मानते हैं।
आज दिन की शुरुआत लाभ चौघड़िया से होती है, जिसे पारंपरिक रूप से अनुकूल माना जाता है।
यानी सुबह का पहला हिस्सा कई लोग विभिन्न कार्यों की शुरुआत के लिए उपयुक्त मानते हैं।
बाकी पूरा ब्योरा नीचे टेबल में है। पहले आज का चौघड़िया देख लेते हैं, फिर एक-एक चीज़ को आराम से समझेंगे।
बुधवार, 3 जून 2026 का चौघड़िया (अहमदाबाद और आसपास के क्षेत्रों के अनुसार
नीचे दिन और रात दोनों के चौघड़िया दिए गए हैं। हरे रंग के नाम पारंपरिक रूप से अनुकूल माने जाने वाले समय दर्शाते हैं।
लाल रंग वाले सावधानी वाले, और स्लेटी रंग वाला चर सामान्य या चलने-फिरने वाले कामों के लिए उपयुक्त माना जाता है।
दिन का चौघड़िया
| चौघड़िया | समय |
|---|---|
| लाभ | सुबह 6:00 – 7:40 |
| अमृत | सुबह 7:40 – 9:20 |
| काल | सुबह 9:20 – 11:00 |
| शुभ | सुबह 11:00 – दोपहर 12:40 |
| रोग | दोपहर 12:40 – 2:20 |
| उद्वेग | दोपहर 2:20 – शाम 4:00 |
| चर | शाम 4:00 – 5:40 |
| लाभ | शाम 5:40 – 7:20 |
| रात का चौघड़िया | समय |
|---|---|
| उद्वेग | शाम 7:20 – रात 8:40 |
| चर | रात 8:40 – 10:00 |
| लाभ | रात 10:00 – 11:20 |
| अमृत | रात 11:20 – 12:40 |
| काल | रात 12:40 – 2:00 |
| शुभ | रात 2:00 – 3:20 |
| रोग | रात 3:20 – सुबह 4:40 |
| उद्वेग | सुबह 4:40 – 6:00 |
ऊपर दिया गया समय अहमदाबाद के आसपास के सूर्योदय और सूर्यास्त को ध्यान में रखकर बनाया गया है।
राजकोट, सूरत, वडोदरा या किसी और शहर में यह कुछ मिनट आगे-पीछे रहेगा।
चौघड़िया क्या होता है, आसान भाषा में
चौघड़िया दिन और रात को छोटे-छोटे समय खंडों में बाँटने का एक पुराना तरीका है।
सूर्योदय से सूर्यास्त तक का समय आठ बराबर हिस्सों में बँटता है, और सूर्यास्त से अगले सूर्योदय तक का समय भी आठ हिस्सों में।
हर हिस्से को एक नाम मिलता है, और हर नाम को किसी ग्रह से जोड़ा जाता है।
कुल सात नाम होते हैं, जो एक क्रम में घूमते रहते हैं।
ये सात नाम हैं: अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, काल और रोग।
इनमें अमृत, शुभ और लाभ को परंपरा में अनुकूल माना जाता है।
चर को सामान्य या यात्रा-योग्य कहा जाता है। उद्वेग, काल और रोग को कई लोग जरूरी कामों के लिए टालना पसंद करते हैं।
दिन का पहला चौघड़िया हर वार के हिसाब से बदलता है।
बुधवार को दिन की शुरुआत लाभ से होती है, इसलिए आज सुबह का पहला खंड लाभ का है।
एक छोटी बात ध्यान रखने लायक है। हर चौघड़िया की लंबाई हर दिन एक जैसी नहीं होती।
गर्मियों में दिन बड़े होते हैं, तो दिन के खंड लंबे और रात के छोटे हो जाते हैं। जून में अभी यही हो रहा है।
आज दिन के चौघड़िया का मतलब
सुबह 6:00 से 7:40 तक लाभ चौघड़िया है। नए काम की शुरुआत, पढ़ाई, या किसी जरूरी बातचीत के लिए यह समय कई लोग उपयुक्त मानते हैं।
इसके बाद सुबह 7:40 से 9:20 तक अमृत आता है।
दिन का यह हिस्सा परंपरा में पारंपरिक रूप से काफी अनुकूल माना जाता है, और शुभ कामों के लिए लोग इसे ढूँढते हैं।
सुबह 9:20 से 11:00 तक काल चौघड़िया रहेगा।
इस दौरान कई लोग बड़े फैसले या नई शुरुआत टालना पसंद करते हैं, हालाँकि रोज़मर्रा के काम सामान्य रूप से चलते रहते हैं।
दोपहर के आसपास, यानी सुबह 11:00 से 12:40 तक शुभ चौघड़िया है।
नाम से ही साफ है कि इसे शुभ कामों के लिए पारंपरिक रूप से उपयुक्त माना गया है।
दोपहर 12:40 से 2:20 तक रोग और फिर 2:20 से शाम 4:00 तक उद्वेग रहेगा।
इन दोनों को परंपरा में सावधानी वाला समय कहा जाता है। शाम 4:00 से 5:40 तक चर है।
जो यात्रा और चलते-फिरते कामों के लिए ठीक माना जाता है। दिन का अंत फिर लाभ चौघड़िया से होता है, शाम 5:40 से 7:20 तक।
आज रात के चौघड़िया का मतलब
रात की शुरुआत शाम 7:20 से उद्वेग के साथ होती है, जो रात 8:40 तक रहेगा।
इसके बाद रात 8:40 से 10:00 तक चर आता है, जो हल्के-फुल्के कामों के लिए उपयुक्त माना जाता है।
रात 10:00 से 11:20 तक लाभ और फिर 11:20 से 12:40 तक अमृत चौघड़िया है।
देर रात तक जागने वाले या रात की पूजा-पाठ करने वाले लोगों के लिए ये दोनों खंड अनुकूल माने जाते हैं।
आधी रात के बाद रात 12:40 से 2:00 तक काल और 3:20 से सुबह 4:40 तक रोग रहेगा।
बीच में रात 2:00 से 3:20 तक शुभ चौघड़िया है। रात का आखिरी हिस्सा, सुबह 4:40 से 6:00 तक, फिर उद्वेग का है।
रात के समय आमतौर पर लोग सोते हैं, इसलिए ज्यादातर लोग इसका उपयोग खास मौकों पर ही करते हैं।
जैसे रात की यात्रा शुरू करनी हो, या कोई धार्मिक अनुष्ठान देर रात रखना हो।
राहुकाल, यमगंड और गुलिक काल का समय
चौघड़िया के साथ-साथ बहुत से लोग राहुकाल और कुछ दूसरे काल भी देखते हैं।
इन्हें परंपरा में जरूरी कामों के लिए टालने योग्य माना जाता है। आज का अनुमानित समय नीचे दिया है।
बुधवार का राहुकाल और अन्य काल
| काल | समय |
|---|---|
| राहुकाल | दोपहर 12:40 – 2:20 |
| यमगंड | सुबह 7:40 – 9:20 |
| गुलिक काल | सुबह 11:00 – दोपहर 12:40 |
| अभिजित मुहूर्त | दोपहर 12:15 – 1:05 (लगभग) |
राहुकाल हर दिन करीब डेढ़ घंटे का होता है और हर वार में अलग समय पर पड़ता है।
बुधवार को यह दिन के बीचों-बीच आता है, इसलिए दोपहर के जरूरी काम तय करते समय इस पर एक नज़र डाल लेना उपयुक्त माना जाता है।
अभिजित मुहूर्त दोपहर के आसपास का एक छोटा-सा खंड है, जिसे कई लोग पारंपरिक रूप से अनुकूल मानते हैं।
पर आज यह राहुकाल की शुरुआत से थोड़ा टकरा रहा है, इसलिए जो लोग दोनों बातों का ध्यान रखते हैं, वे साफ-साफ शुभ चौघड़िया वाले समय को चुनना ज्यादा सहज पाते हैं।
राहुकाल और अशुभ समय में क्या करें, क्या टालें
राहुकाल को लेकर एक बात समझना जरूरी है। इसका मतलब यह नहीं कि उस दौरान कुछ भी रुक जाता है।
रोज़मर्रा के काम, खाना-पीना, दफ्तर का काम, सब सामान्य रूप से चलते रहते हैं।
कई लोग सिर्फ नई और बड़ी शुरुआत इस समय टालते हैं। जैसे दुकान का उद्घाटन, गृहप्रवेश, या लंबी यात्रा की शुरुआत।
अगर कोई जरूरी काम राहुकाल में ही आ रहा हो और टाला न जा सके, तो परंपरा में लोग पहले से थोड़ी तैयारी या छोटी पूजा कर लेते हैं। इससे मन शांत रहता है और काम पर ध्यान बना रहता है।
कई लोग इन समयों को दैनिक योजना बनाने के एक पारंपरिक संदर्भ के रूप में देखते हैं।
यह दिन को बेहतर ढंग से बाँटने का एक पुराना तरीका है, बस।
शुभ चौघड़िया का उपयोग कैसे करें
मान लीजिए आपको आज कोई नया काम शुरू करना है। सबसे पहले देखिए कि वह किस तरह का काम है।
पैसे, व्यापार या लेन-देन से जुड़ा काम हो, तो लाभ चौघड़िया वाला समय कई लोग पसंद करते हैं।
आज दिन में लाभ दो बार आ रहा है, सुबह जल्दी और शाम को।
पूजा, मांगलिक काम या किसी शुभ शुरुआत के लिए अमृत और शुभ चौघड़िया को अनुकूल माना जाता है।
आज सुबह 7:40 से 9:20 का अमृत और 11:00 से 12:40 का शुभ इसके लिए उपयुक्त विकल्प हैं।
अगर यात्रा करनी हो या कहीं आना-जाना हो, तो चर चौघड़िया को परंपरा में ठीक कहा जाता है।
नाम का मतलब ही चलने-फिरने से जुड़ा है।
बड़े फैसलों के लिए लोग आमतौर पर काल, रोग और उद्वेग वाले समय को टालते हैं। पर इसे एक मार्गदर्शन की तरह लें, सख्त नियम की तरह नहीं।
आज किस काम के लिए कौन-सा समय बेहतर रहेगा
सुबह का पहला हिस्सा आज काफी अनुकूल माना जाता है। लाभ के बाद सीधे अमृत आ रहा है, यानी सुबह 6:00 से 9:20 तक का समय कई शुभ कामों की शुरुआत के लिए अनुकूल माना जा सकता है।
दोपहर 11:00 से 12:40 तक का शुभ चौघड़िया एक और उपयुक्त विकल्प है।
जिनकी सुबह व्यस्त रहती है, वे इस समय को काम में ले सकते हैं।
दोपहर बाद का समय थोड़ा सावधानी वाला है, क्योंकि रोग, उद्वेग और राहुकाल एक के बाद एक आ रहे हैं।
बड़े और नए कामों के लिए लोग आमतौर पर इस खिड़की से बचते हैं।
शाम को फिर पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार अपेक्षाकृत अधिक अनुकूल समय प्राप्त होता है।
चर के बाद लाभ चौघड़िया आ रहा है, इसलिए शाम 4:00 के बाद का समय कई कामों के लिए ठीक बैठ सकता है।
चौघड़िया और रोज़मर्रा की ज़िंदगी
एक बात मैंने अक्सर देखी है। चौघड़िया का एक संभावित उपयोग तब है जब इसे व्यक्तिगत आवश्यकता और परंपरा के संतुलन के साथ बरता जाए।
हर छोटे काम के लिए शुभ समय का इंतज़ार करना न तो व्यावहारिक है, न जरूरी।
ज्यादातर लोग सिर्फ बड़े मौकों पर इसे देखते हैं, जैसे नई दुकान, गाड़ी की खरीद, या कोई जरूरी समझौता।
बाकी कामों के लिए, अगर आपका मन शांत है और तैयारी पूरी है, तो वही कई लोग उसे उपयुक्त मानते हैं।
परंपरा भी मन की स्थिरता को बहुत महत्व देती है।
बुधवार का दिन वैसे भी पढ़ाई और कारोबार के लिए कई लोग अनुकूल मानते हैं।
तो आज अगर हिसाब-किताब या सीखने वाला कोई काम पेंडिंग है, उसे निपटाना उपयुक्त माना जा सकता है।
शहर और सूर्योदय का असर इस समय पर
चौघड़िया का पूरा हिसाब सूर्योदय और सूर्यास्त पर टिका होता है। इसलिए अलग-अलग शहरों में समय में थोड़ा फर्क आना स्वाभाविक है।
गुजरात के भीतर भी द्वारका और अहमदाबाद के सूर्योदय में कुछ मिनट का अंतर रहता है।
दिल्ली, मुंबई या कोलकाता में यह फर्क और बढ़ जाता है।
इसलिए सबसे अच्छा तरीका यही है कि अपने शहर के सूर्योदय-सूर्यास्त के हिसाब से समय का मिलान कर लें।
सूर्योदय और सूर्यास्त का सही समय जानने के लिए timeanddate.com जैसी लोकप्रिय संदर्भ वेबसाइट देखी जा सकती है।
चौघड़िया और पंचांग की पारंपरिक पृष्ठभूमि को थोड़ा और गहराई से समझना हो, तो विकिपीडिया का पंचांग पृष्ठ एक सामान्य संदर्भ स्रोत है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
आज, बुधवार 3 जून 2026 को दिन का पहला चौघड़िया कौन-सा है?
आज दिन की शुरुआत लाभ चौघड़िया से होती है, जो लगभग सुबह 6:00 से 7:40 तक रहता है। बुधवार को परंपरा में यह पहला खंड कई कामों की शुरुआत के लिए अनुकूल माना जाता है।
आज राहुकाल कब है और इसमें क्या टालना चाहिए?
अनुमानित रूप से राहुकाल आज दोपहर 12:40 से 2:20 तक है। इस दौरान बहुत से लोग नई दुकान, गृहप्रवेश या लंबी यात्रा की शुरुआत जैसे नए और महत्त्वपूर्ण कार्यों की शुरुआत टालना उपयुक्त मानते हैं, बाकी रोज़मर्रा के काम सामान्य रहते हैं।
चौघड़िया और राहुकाल में क्या अंतर है?
चौघड़िया दिन-रात को आठ-आठ शुभ-अशुभ खंडों में बाँटता है। राहुकाल हर वार में पड़ने वाला करीब डेढ़ घंटे का एक अलग खंड है, जिसे परंपरा में नई शुरुआत के लिए कम अनुकूल माना जाता है।
क्या ये चौघड़िया समय हर शहर में एक जैसे रहते हैं?
नहीं, ये सूर्योदय और सूर्यास्त पर निर्भर करते हैं, इसलिए हर शहर में कुछ मिनट का फर्क रहता है। दिए गए समय अहमदाबाद के आसपास के हैं, अपने शहर के पंचांग से मिलान कर लेना उपयुक्त माना जाता है।
बुधवार किन कामों के लिए अच्छा माना जाता है?
परंपरा में बुधवार को बुध ग्रह से जोड़ा जाता है, इसलिए पढ़ाई, व्यापार, लेन-देन, हिसाब-किताब और बातचीत से जुड़े कामों के लिए कई लोग इस दिन को अनुकूल मानते हैं। बाकी सामान्य काम भी हमेशा की तरह चलते रहते हैं।
डिस्क्लेमर: चौघड़िया, राहुकाल और अन्य समय संबंधी मान्यताएँ विभिन्न क्षेत्रों, परिवारों और परंपराओं के अनुसार अलग-अलग हो सकती हैं। यह जानकारी पारंपरिक मान्यताओं, पंचांग गणना और सांस्कृतिक प्रथाओं पर आधारित है और केवल सामान्य जानकारी व शैक्षिक उद्देश्य के लिए दी गई है। समय शहर और सूर्योदय के अनुसार बदल सकता है, इसलिए किसी जरूरी काम से पहले अपने स्थानीय पंचांग या किसी जानकार से पुष्टि कर लें।
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