Gyaras Kab Ki Hai 2026? जानें एकादशी की सही तारीख, शुभ मुहूर्त और व्रत समय

Gyaras Kab Ki Hai 2026? जानें एकादशी की सही तारीख, शुभ मुहूर्त और व्रत समय
Table of Contents / विषय सूची

हर महीने दो बार एकादशी आती है। एक शुक्ल पक्ष में, एक कृष्ण पक्ष में।

यानी आमतौर पर 24 एकादशियाँ होती हैं। और हर एकादशी का अपना नाम होता है, पारंपरिक रूप से अलग महत्व माना जाता है।

“कई लोग यह जानना चाहते हैं कि अगली ग्यारस कब है। व्रत कब रखना है।

पारण किस समय करना है? तो इस लेख में 2026 की सभी एकादशियों की तारीखें, उनके नाम, और व्रत से जुड़ी जरूरी बातें सरल भाषा में दी गई हैं।

एकादशी यानी ग्यारस क्या होती है?

हिंदू पंचांग में हर पक्ष की ग्यारहवीं तिथि को एकादशी कहते हैं। "एकादश" यानी ग्यारह।

इसीलिए इसे ग्यारस भी कहा जाता है, खासकर राजस्थान, मध्य प्रदेश और गुजरात में।

पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु की पूजा का महत्त्वपूर्ण माना जाता है।

बहुत से भक्त इस दिन उपवास रखते हैं और अगले दिन द्वादशी तिथि में पारण करते हैं।

2026 में एकादशी की पूरी सूची

नीचे दी गई सूची 2026 की सभी प्रमुख एकादशियों की है। तारीखें भारतीय पंचांग के अनुसार हैं।

 2026 एकादशी तारीख सूची वार्षिक सूची
जनवरी जून 2026
सफला एकादशी
4 जनवरी 2026 (रविवार)
पुत्रदा एकादशी
19 जनवरी 2026 (सोमवार)
षटतिला एकादशी
2 फरवरी 2026 (सोमवार)
जया एकादशी
18 फरवरी 2026 (बुधवार)
विजया एकादशी
4 मार्च 2026 (बुधवार)
आमलकी एकादशी
19 मार्च 2026 (गुरुवार)
पापमोचनी एकादशी
3 अप्रैल 2026 (शुक्रवार)
कामदा एकादशी
18 अप्रैल 2026 (शनिवार)
वरूथिनी एकादशी
2 मई 2026 (शनिवार)
मोहिनी एकादशी
18 मई 2026 (सोमवार)
अपरा एकादशी
1 जून 2026 (सोमवार)
निर्जला एकादशी
16 जून 2026 (मंगलवार)
जुलाई – दिसंबर 2026
योगिनी एकादशी
1 जुलाई 2026 (बुधवार)
देवशयनी एकादशी
15 जुलाई 2026 (बुधवार)
कामिका एकादशी
30 जुलाई 2026 (गुरुवार)
श्रावण पुत्रदा एकादशी
14 अगस्त 2026 (शुक्रवार)
अजा एकादशी
28 अगस्त 2026 (शुक्रवार)
परिवर्तिनी एकादशी
12 सितंबर 2026 (शनिवार)
इंदिरा एकादशी
27 सितंबर 2026 (रविवार)
पापांकुशा एकादशी
12 अक्टूबर 2026 (सोमवार)
रमा एकादशी
26 अक्टूबर 2026 (सोमवार)
देवउठनी एकादशी
10 नवंबर 2026 (मंगलवार)
उत्पन्ना एकादशी
25 नवंबर 2026 (बुधवार)
मोक्षदा एकादशी
9 दिसंबर 2026 (बुधवार)
सफला एकादशी
25 दिसंबर 2026 (शुक्रवार)


2026 की सबसे खास एकादशियाँ कौन सी हैं?

2026 की सबसे खास एकादशियाँ

सभी एकादशियों का अपना महत्व है, पर कुछ तिथियाँ पारंपरिक रूप से ज्यादा महत्वपूर्ण मानी जाती हैं।

निर्जला एकादशी – 16 जून 2026 को है। यह जेठ माह की एकादशी होती है और इसमें जल भी नहीं पीने की परंपरा है। कई श्रद्धालु इसे साल की  कठिन और विशेष महत्व वाली एकादशी मानते हैं।

देवशयनी एकादशी – 15 जुलाई 2026 को है। इस दिन से चातुर्मास शुरू होता है। पारंपरिक मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु योगनिद्रा में रहने की मान्यता है।

देवउठनी एकादशी – 10 नवंबर 2026 को है। इसे देव प्रबोधिनी एकादशी भी कहते हैं। चातुर्मास का समापन इसी दिन होता है। शादी-विवाह के शुभ काम इसके बाद फिर शुरू होते हैं।

     यह भी पढ़ें

मोक्षदा एकादशी – 9 दिसंबर 2026 को है। गीता जयंती भी इसी दिन के आसपास आती है। कई जगह इस दिन गीता पाठ का आयोजन होता है।

एकादशी व्रत का समय और पारण कब करें?

व्रत एकादशी तिथि की शुरुआत से माना जाता है, जो कभी-कभी दशमी की रात से ही शुरू हो जाती है।

पारण यानी व्रत तोड़ना, द्वादशी तिथि में किया जाता है। सामान्यतः सुबह 6 बजे से 8:30 बजे के बीच पारण का समय उचित माना जाता है।

पर सही समय हर महीने पंचांग के अनुसार थोड़ा अलग होता है।

 एकादशी व्रत और पारण सामान्य समय-सारणी
व्रत शुरू
दशमी की रात्रि / एकादशी सुबह से
पूजा का समय
सुबह 6:00 से 8:00 बजे (सामान्यतः)
पारण समय
द्वादशी में सूर्योदय के बाद
ध्यान रखें
हरिवासर में पारण न करें
क्या खाएं
फल, सेंधा नमक, साबूदाना, दूध
क्या न खाएं
अनाज, प्याज, लहसुन, मांस
पारण भोजन
सादा, सात्विक भोजन उचित माना जाता है
जल पीना
निर्जला व्रत में बंद, बाकी में जल ले सकते हैं

एकादशी का व्रत कैसे रखें – सरल विधि

पहले दिन यानी दशमी को शाम का भोजन सात्विक और हल्का करें। रात को किसी तरह का अनाज न खाएं तो उपयुक्त माना जाता है।

एकादशी की सुबह जल्दी उठें। स्नान करके भगवान विष्णु की तस्वीर या मूर्ति के सामने दीपक जलाएं। तुलसी के पत्ते अर्पित करने की परंपरा है।

जप, पाठ या भजन अपनी इच्छानुसार करें।

पूरा दिन अनाज से परहेज करें। शाम को फिर से पूजा करें। रात को जागरण की परंपरा है, पर यह सबके लिए जरूरी नहीं।

अगले दिन द्वादशी में सूर्योदय के बाद, पंचांग में बताए गए पारण समय में व्रत तोड़ें।

शुभ मुहूर्त और एकादशी पर पूजा का सही समय

शुभ मुहूर्त और एकादशी पर पूजा

एकादशी पर पूजा के लिए ब्रह्म मुहूर्त (सुबह करीब 4:30 से 5:30 बजे) को पारंपरिक रूप से उपयुक्त माना जाता है।

पर जो इतनी जल्दी नहीं उठ सकते, वो सुबह 6 से 8 के बीच भी पूजा कर सकते हैं।

सटीक राहुकाल और मुहूर्त के लिए स्थानीय पंचांग देखना ज्यादा सही रहता है, क्योंकि यह शहर और सूर्योदय के समय के हिसाब से बदलता है।

देवशयनी और देवउठनी एकादशी का विशेष महत्व

देवशयनी एकादशी (15 जुलाई 2026) के बाद से करीब 4 महीने तक चातुर्मास रहता है।

इस दौरान शादी-विवाह, गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्य पारंपरिक रूप से नहीं किए जाते।

देवउठनी एकादशी (10 नवंबर 2026) पर यह चातुर्मास समाप्त होता है।

इस दिन तुलसी विवाह भी होता है, जो कई परिवारों में उत्साह के साथ मनाया जाता है। इसके बाद शादियों का मौसम शुरू हो जाता है।

निर्जला एकादशी 2026 क्यों खास है यह तिथि?

16 जून 2026 की निर्जला एकादशी को पंचांग में "भीमसेनी एकादशी" भी कहते हैं।

परंपरा के अनुसार इसमें 24 घंटे बिना जल पीए व्रत रखा जाता है।

कई श्रद्धालु मानते हैं कि जो साल भर हर एकादशी नहीं रख सकते, वो निर्जला एकादशी का व्रत भी रख सकते हैं।

यह मान्यता पारंपरिक ग्रंथों में मिलती है, हालांकि इसे विश्वास और श्रद्धा के नजरिए से देखना चाहिए।

जून का महीना गर्म होता है, तो स्वास्थ्य का ध्यान रखते हुए व्रत करना जरूरी है।

बुजुर्ग, बीमार और गर्भवती महिलाओं को निर्जला व्रत से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए।

एकादशी की तिथि कैसे तय होती है?

यह पंचांग की पारंपरिक गणना का हिस्सा है। हिंदू पंचांग चंद्रमा की गति पर आधारित है।

हर महीने में 30 तिथियाँ होती हैं, 15 शुक्ल पक्ष में और 15 कृष्ण पक्ष में। एकादशी इन दोनों पक्षों की 11वीं तिथि है।

कभी-कभी एकादशी तिथि दो दिन तक चलती है।

ऐसे में पारंपरिक रूप से दूसरे दिन व्रत रखने की प्रथा है, पर यह संप्रदाय और क्षेत्र के अनुसार अलग हो सकता है।

इसीलिए अपने स्थानीय पंचांग या drikpanchang.com जैसी लोकप्रिय संदर्भ वेबसाइट पर एक बार जांच जरूर कर लें। वहाँ तिथि, पारण समय, और स्थान के अनुसार सूर्योदय की जानकारी मिलती है।

मध्यप्रदेश, राजस्थान और गुजरात में ग्यारस का महत्व

इन राज्यों में एकादशी को "ग्यारस" कहना आम बात है। घर की बड़ी-बुजुर्ग महिलाएं इस दिन विशेष व्रत रखती हैं। कुछ परिवारों में पूरे घर का खानपान एकादशी के नियमों के अनुसार बनता है।

मंदिरों में इस दिन विशेष भजन और कीर्तन होते हैं। कई जगह श्रीमद् भागवत का पाठ भी होता है।

पंचांग और एकादशी की जानकारी कहाँ से लें?

भारत सरकार का National Calendar Reference Unit (NCRU) हिंदू पंचांग से जुड़ी जानकारी का एक आधिकारिक स्रोत है।

इसके अलावा स्थानीय ज्योतिष पंचांग जैसे विक्रम संवत पंचांग, लाला रामस्वरूप रामनारायण पंचांग आदि भी लोकप्रिय संदर्भ स्रोत माने जाते हैं।

डिजिटल रूप से drikpanchang.com पर हिंदी में एकादशी की जानकारी स्थान के अनुसार मिलती है।यहाँ स्थान आधारित पंचांग जानकारी उपलब्ध रहती है।

FAQ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

2026 में कुल कितनी एकादशियाँ हैं?

साल 2026 में कुल 25 एकादशी तिथियाँ पड़ती हैं। यह संख्या हर साल थोड़ी अलग हो सकती है क्योंकि हिंदू पंचांग चंद्र आधारित है और कभी-कभी अधिक मास भी आता है।

अगर एकादशी दो दिन पड़े तो व्रत किस दिन रखें?

जब एकादशी तिथि दो दिन चलती है, तो आमतौर पर दूसरे दिन व्रत रखने की परंपरा मानी जाती है। पर यह आपके संप्रदाय और परिवार की परंपरा पर भी निर्भर करता है। स्थानीय पंचांग से एक बार जरूर देख लें।

एकादशी का पारण यानी व्रत तोड़ने का सही समय क्या है?

पारण द्वादशी तिथि में सूर्योदय के बाद किया जाता है। सामान्यतः सुबह 6 बजे से 9 बजे के बीच का समय उचित माना जाता है। हरिवासर काल में पारण करने से बचने की परंपरा है। हर महीने यह समय थोड़ा बदलता है, इसलिए पंचांग देखना जरूरी है।

क्या एकादशी का व्रत हर कोई रख सकता है?

कई लोग श्रद्धा और परंपरा के अनुसार एकादशी का व्रत रखते हैं। बीमार व्यक्ति, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं और छोटे बच्चे निर्जला व्रत से पहले अपने स्वास्थ्य का ध्यान जरूर रखें। जरूरत पड़े तो डॉक्टर से सलाह लें। व्रत श्रद्धा से होता है,  व्यक्ति की क्षमता और श्रद्धा के अनुसार रखा जाता है।

देवशयनी एकादशी और देवउठनी एकादशी में क्या अंतर है?

देवशयनी (आषाढ़ शुक्ल एकादशी) से चातुर्मास शुरू होता है और देवउठनी (कार्तिक शुक्ल एकादशी) पर समाप्त होता है। 2026 में देवशयनी 15 जुलाई को है और देवउठनी 10 नवंबर को। इन दोनों के बीच के 4 महीनों में शादी-विवाह जैसे मांगलिक कार्य पारंपरिक रूप से पारंपरिक रूप से नहीं किए जाते।

यह लेख पारंपरिक मान्यताओं और सांस्कृतिक परंपराओं पर आधारित है। यहाँ दी गई जानकारी केवल के लिए है। व्रत, मुहूर्त और तिथियों की पंचांग आधारित जानकारीके लिए अपने स्थानीय पंचांग या विश्वसनीय ज्योतिषाचार्य से परामर्श लें।

यह लेख साझें

Shiv Kumar Pandit

Shiv Kumar Pandit

सत्यापित
admin

मैं, शिव कुमार पंडित, इस प्लेटफ़ॉर्म का Co-Founder और वरिष्ठ कंटेंट रिसर्चर हूं। मुझे भारतीय संस्कृति, शुभ मुहूर्त, चोघड़िया, पंचांग और पारंपरिक ज्ञान से जुड़े विषयों पर रिसर्च करना और सरल भाषा में जानकारी साझा करना पसंद है, ताकि हर पाठक आसानी से सही जानकारी समझ सके।

टिप्पणी छोड़ें