Purnamasi Kab Hai 2026? जानें पूर्णिमा की सही तारीख, शुभ मुहूर्त और स्नान-दान का महत्व

Purnamasi Kab Hai 2026? जानें पूर्णिमा की सही तारीख, शुभ मुहूर्त और स्नान-दान का महत्व
Table of Contents / विषय सूची
पूर्णिमा का दिन क्यों खास होता है? हर महीने एक दिन ऐसा आता है जब चंद्रमा पूरी तरह गोल और चमकदार दिखता है।

उसी दिन को पूर्णिमा कहते हैं। हिंदू पंचांग में यह तिथि एक पारंपरिक अवसर माना जाता है।

पूर्णिमा के दिन नदियों में स्नान करना, दान देना, व्रत रखना और भजन-कीर्तन करना पारंपरिक रूप से शुभ माना जाता है।

बहुत से लोग इस दिन को अपने पुरखों की याद में श्राद्ध और तर्पण के लिए भी चुनते हैं।

2026 में कौन-कौन सी तारीखों पर पूर्णिमा पड़ रही है, यही जानने के लिए अधिकतर लोग खोज करते हैं। तो चलिए सीधे उसी पर आते हैं।

2026 में पूर्णमासी की पूरी सूची

नीचे 2026 के हर महीने की पूर्णिमा तारीख दी गई है। यह जानकारी हिंदू पंचांग के अनुसार है और सामान्य संदर्भ के लिए है।

 पूर्णिमा तिथि सूची 2026
जनवरी से जून 2026
पौष पूर्णिमा
11 जनवरी 2026
माघ पूर्णिमा
9 फरवरी 2026
फाल्गुन पूर्णिमा
11 मार्च 2026
चैत्र पूर्णिमा
9 अप्रैल 2026
वैशाख पूर्णिमा
9 मई 2026
ज्येष्ठ पूर्णिमा
7 जून 2026
जुलाई से दिसंबर 2026
आषाढ़ पूर्णिमा
7 जुलाई 2026
श्रावण पूर्णिमा
5 अगस्त 2026
भाद्रपद पूर्णिमा
4 सितंबर 2026
आश्विन पूर्णिमा
3 अक्टूबर 2026
कार्तिक पूर्णिमा
1 नवंबर 2026
मार्गशीर्ष पूर्णिमा
1 दिसंबर 2026


साल 2026 की सबसे महत्वपूर्ण पूर्णिमाएं

हर पूर्णिमा अपनी जगह खास होती है, लेकिन कुछ तिथियां पंचांग में विशेष स्थान रखती हैं।

माघ पूर्णिमा (9 फरवरी 2026) को प्रयागराज जैसे तीर्थस्थलों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु गंगा स्नान के लिए जाते हैं। इस दिन माघ मेले का समापन होता है।

फाल्गुन पूर्णिमा (11 मार्च 2026) होली का दिन है। इसी रात होलिका दहन की परंपरा है। तो इस साल होलिका दहन 11 मार्च की शाम को होगा।

वैशाख पूर्णिमा (9 मई 2026) को बुद्ध पूर्णिमा भी कहते हैं। बौद्ध धर्म में इस तिथि का विशेष महत्व है क्योंकि मान्यता है कि इसी दिन गौतम बुद्ध का जन्म हुआ था।

आषाढ़ पूर्णिमा (7 जुलाई 2026) गुरु पूर्णिमा है। इस दिन गुरुओं का सम्मान करने की परंपरा काफी समय से चली आ रही है।

कार्तिक पूर्णिमा (1 नवंबर 2026) देव दीपावली के रूप में मनाई जाती है। काशी और अन्य नदी किनारे के शहरों में इस रात दीपमाला का विशेष दृश्य देखने को मिलता है।

स्नान-दान का सही समय कब होता है?

पूर्णिमा पर स्नान का पारंपरिक रूप से सकारात्मक माना जाता है ब्रह्ममुहूर्त माना जाता है, यानी सूर्योदय से करीब डेढ़ घंटे पहले का समय।

ज्यादातर जगहों पर यह सुबह 4 से 5:30 बजे के बीच होता है।

अगर ब्रह्ममुहूर्त में उठना संभव न हो, तो सूर्योदय से पहले कभी भी स्नान कर सकते हैं। पारंपरिक मान्यता यह है कि पूर्णिमा पर स्नान के बाद दान करना शुभ फल देता है।

दान में तिल, चावल, कपड़े, धन या मीठा देने की परंपरा अलग-अलग क्षेत्रों में प्रचलित है।

2026 की तीन प्रमुख पूर्णिमाओं का शुभ मुहूर्त

 प्रमुख पूर्णिमा मुहूर्त 2026
माघ पूर्णिमा — 9 फरवरी
स्नान मुहूर्त
प्रातः 4:30 से 6:00
पूर्णिमा तिथि आरंभ
8 फरवरी रात 10:59
पूर्णिमा तिथि समाप्त
9 फरवरी रात 9:30
गुरु पूर्णिमा — 7 जुलाई
स्नान मुहूर्त
प्रातः 4:45 से 5:45
पूर्णिमा तिथि आरंभ
6 जुलाई दोपहर 1:48
पूर्णिमा तिथि समाप्त
7 जुलाई दोपहर 2:12
कार्तिक पूर्णिमा — 1 नवंबर
स्नान मुहूर्त
प्रातः 5:00 से 6:15
पूर्णिमा तिथि आरंभ
31 अक्टूबर शाम 5:28
पूर्णिमा तिथि समाप्त
1 नवंबर दोपहर 2:51

नोट: मुहूर्त के सटीक समय के लिए अपने स्थानीय पंचांग का उपयोग करें, क्योंकि शहर और क्षेत्र के अनुसार सूर्योदय में अंतर होता है।

गुरु पूर्णिमा 2026 पर थोड़ा और

7 जुलाई 2026 को गुरु पूर्णिमा है। यह दिन सिर्फ धार्मिक दृष्टि से नहीं, सांस्कृतिक रूप से भी खास है।

शिक्षक, गुरु, या जो भी व्यक्ति आपके जीवन में मार्गदर्शक रहे हों, इस दिन उन्हें याद करने और आभार व्यक्त करने की परंपरा है।

बहुत से लोग इस दिन अपने गुरु के पास जाते हैं, उनके चरण स्पर्श करते हैं।

आषाढ़ पूर्णिमा को ही गुरु पूर्णिमा क्यों कहते हैं? मान्यता है कि इसी दिन वेद व्यास जी का जन्म हुआ था, जिन्होंने वेदों का विभाजन और पुराणों की रचना की।

इसीलिए इसे व्यास पूर्णिमा भी कहते हैं।

कार्तिक पूर्णिमा और देव दीपावली

कार्तिक पूर्णिमा और देव

1 नवंबर 2026 को कार्तिक पूर्णिमा है। इसे देव दीपावली कहने के पीछे एक सरल कारण है।

माना जाता है कि दीपावली के ठीक 15 दिन बाद देवतागण स्वयं दीप जलाने उतरते हैं। काशी यानी वाराणसी में इस दिन गंगा के घाटों पर लाखों दीपक जलाए जाते हैं।

नाव पर बैठकर यह नजारा देखना अपने आप में उपयुक्त माना जाता है।

इस पूर्णिमा पर सिख समुदाय भी गुरु नानक जयंती मनाता है, इसलिए यह दिन कई अर्थों में मिला-जुला पर्व है।

बुद्ध पूर्णिमा 2026

9 मई 2026 को वैशाख पूर्णिमा पड़ रही है, जिसे बुद्ध पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है।

बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए यह वर्ष की सबसे बड़ी तिथि है। बोधगया, सारनाथ, कुशीनगर जैसे स्थानों पर इस दिन विशेष आयोजन होते हैं।

हिंदू मान्यताओं में भी इस पूर्णिमा को स्नान और दान के लिए उत्तम माना जाता है।

बुद्ध पूर्णिमा के बारे में अधिक जानकारी के लिए आप विकिपीडिया का बसंत पंचमी पृष्ठ देख सकते हैं।

पूर्णिमा व्रत कैसे रखें?

पूर्णिमा व्रत की कोई एक तय विधि नहीं है। अलग-अलग घरों में, अलग-अलग परंपराएं चलती हैं। लेकिन कुछ सामान्य बातें जो ज्यादातर जगहों पर देखने को मिलती हैं:

  1. सुबह जल्दी उठकर स्नान करना
  2. साफ कपड़े पहनना, खासतौर पर सफेद या हल्के रंग के
  3. भगवान विष्णु या चंद्रमा की पूजा करना
  4. दिनभर फलाहार रखना, या कम से कम एक बार भोजन करना
  5. शाम को चंद्रमा को अर्घ्य देना
  6. जरूरतमंद को दान करना

कुछ लोग सत्यनारायण कथा करवाते हैं, कुछ लोग बस मंदिर जाकर दर्शन करते हैं। जो भी करें, इसे अपनी श्रद्धा और सुविधा के अनुसार करें।

पंचांग के अनुसार पूर्णिमा तिथि कैसे तय होती है?

यह जानना थोड़ा दिलचस्प है। हिंदू पंचांग चंद्रमा की गति पर आधारित होता है। जब चंद्रमा सूर्य से ठीक 180 डिग्री की दूरी पर होता है, उस समय को पूर्णिमा कहते हैं।

इसीलिए पूर्णिमा की तिथि हर साल बदलती रहती है।

कभी यह रात में शुरू होती है, कभी दोपहर में। उदाहरण के लिए कार्तिक पूर्णिमा 2026 में 31 अक्टूबर शाम से शुरू होकर 1 नवंबर दोपहर तक रहेगी।

पंचांग की सटीक जानकारी के लिए आप drikpanchang.com जैसी लोकप्रिय संदर्भ वेबसाइट देख सकते हैं।

सत्यनारायण पूजा और पूर्णिमा का संबंध

पूर्णिमा की सही तारीख, शुभ मुहूर्त और स्नान-दान का महत्व

बहुत से घरों में पूर्णिमा के दिन सत्यनारायण कथा का आयोजन होता है। यह परंपरा खासतौर पर उत्तर भारत में शुभ कार्यों की है।

सत्यनारायण पूजा के लिए पूर्णिमा को इसलिए चुना जाता है क्योंकि इस दिन को आमतौर पर मंगल कार्यों के लिए पंचांग गणना का हिस्सा।

लेकिन यह पूजा महीने के किसी और दिन भी हो सकती है, इसमें यह पूजा अन्य दिनों में भी की जा सकती है है।

पूर्णिमा और चंद्रग्रहण 2026

2026 में दो चंद्रग्रहण होंगे। इनमें से एक 7 जुलाई 2026 यानी गुरु पूर्णिमा के आसपास पड़ सकता है। हालांकि हर ग्रहण हर जगह से दिखाई नहीं देता।

पारंपरिक मान्यताओं में ग्रहण के समय पूजा-पाठ और भोजन से बचने की सलाह दी जाती है।

सूतक काल ग्रहण से पहले शुरू होता है। ग्रहण समाप्ति के बाद स्नान करना और फिर पूजा करना उचित माना जाता है।

चंद्रग्रहण की सटीक तारीख और समय की जानकारी पंचांग या किसी विश्वसनीय खगोलीय स्रोत से लेना उपयुक्त माना जाता है ।

अलग-अलग राज्यों में पूर्णिमा का नाम

भारत बड़ा देश है, इसलिए एक ही पूर्णिमा को अलग-अलग नामों से जाना जाता है।

 पूर्णिमा के क्षेत्रीय नाम
राज्य
प्रचलित नाम
उत्तर भारत
पूर्णिमा / पूनम
महाराष्ट्र
पौर्णिमा
बंगाल
पূर्णिमा
दक्षिण भारत
पौर्णमी


FAQ पूर्णमासी 2026 से जुड़े सामान्य सवाल

2026 में होली किस पूर्णिमा को है?
होली का त्योहार फाल्गुन पूर्णिमा को मनाया जाता है। 2026 में यह 11 मार्च को पड़ रही है। उसी रात होलिका दहन होगा और अगले दिन 12 मार्च को रंगोत्सव मनाया जाएगा।

गुरु पूर्णिमा 2026 कब है?
गुरु पूर्णिमा 7 जुलाई 2026 को है। यह आषाढ़ माह की पूर्णिमा होती है। इस दिन गुरु की पूजा और आभार प्रकट करने की परंपरा है।

क्या पूर्णिमा का व्रत सभी रख सकते हैं?
पूर्णिमा व्रत पर यह व्यक्तिगत श्रद्धा और सुविधा पर निर्भर करता  है। बुजुर्ग, बीमार, या गर्भवती महिलाएं अपनी सुविधा के अनुसार इसे सरल रख सकती हैं। पूजा करना और दान देना भी उतना ही माना जाता है जितना उपवास रखना।

क्या पूर्णिमा की रात पूजा होती है?
हां, कई घरों में शाम को चंद्रमा निकलने पर उसे अर्घ्य दिया जाता है और व्रत खोला जाता है। यह परंपरा ज्यादातर उत्तर भारत में देखी जाती है।

छोटी सी बात आखिर में

पूर्णिमा सिर्फ एक तारीख नहीं है। यह एक मौका है। परिवार के साथ बैठकर पूजा करने का, किसी जरूरतमंद की मदद करने का, और थोड़ा ठहरकर अपनी जड़ों से जुड़ने का।

हर महीने यह मौका आता है। 2026 में 12 बार आएगा। कोई एक पूर्णिमा चुनिए और कुछ सार्थक कीजिए ।

अस्वीकरण: इस लेख में दी गई जानकारी पारंपरिक मान्यताओं, हिंदू पंचांग, और सांस्कृतिक परंपराओं पर आधारित है। यह केवल सामान्य जानकारी और शैक्षिक उद्देश्यों के लिए है। सटीक मुहूर्त और तिथि के लिए अपने स्थानीय पंचांग या पुरोहित से  मार्गदर्शन लें.

यह लेख साझें

Shiv Kumar Pandit

Shiv Kumar Pandit

सत्यापित
admin

मैं, शिव कुमार पंडित, इस प्लेटफ़ॉर्म का Co-Founder और वरिष्ठ कंटेंट रिसर्चर हूं। मुझे भारतीय संस्कृति, शुभ मुहूर्त, चोघड़िया, पंचांग और पारंपरिक ज्ञान से जुड़े विषयों पर रिसर्च करना और सरल भाषा में जानकारी साझा करना पसंद है, ताकि हर पाठक आसानी से सही जानकारी समझ सके।

टिप्पणी छोड़ें