Shubh Muhurat Kaise Nikale? सही समय चुनने की विधि

Shubh Muhurat Kaise Nikale? सही समय चुनने की विधि
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शुरुआत यहाँ से करें,  हर काम का एक सही वक्त होता है।
शादी हो, गृहप्रवेश हो, नई दुकान खोलनी हो या बच्चे का नामकरण हो।
भारत में यह परंपरा सदियों पुरानी है कि कोई भी बड़ा काम शुभ मुहूर्त देखकर किया जाए।

लेकिन सवाल यह उठता है कि यह मुहूर्त निकाला कैसे जाता है?

पंडित जी के पास जाने के अलावा क्या कोई तरीका है जिससे आप खुद समझ सकें?

जवाब हाँ है। और यही इस लेख में बताया गया है।

मुहूर्त का मतलब क्या होता है असल में

संस्कृत में "मुहूर्त" का मतलब होता है समय की एक इकाई। एक दिन में 30 मुहूर्त होते हैं, यानी हर मुहूर्त करीब 48 मिनट का होता है।

लेकिन आम बोलचाल में मुहूर्त का मतलब होता है।

वह समय जो किसी खास काम के लिए अनुकूल माना जाता है। यह अनुकूलता कई चीज़ों को देखकर तय की जाती है, जैसे तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण।

यह पाँच मिलकर पंचांग बनाते हैं।

पंचांग क्या होता है और यह क्यों ज़रूरी है

पंचांग यानी पाँच अंगों का संग्रह। यह एक हिंदू पंचांग कैलेंडर होता है जिसमें हर दिन की ज्योतिषीय जानकारी दर्ज होती है।

पाँच अंग ये हैं:

  1. तिथि — चंद्रमा की स्थिति से तय होती है
  2. वार — सप्ताह का दिन
  3. नक्षत्र — चंद्रमा जिस नक्षत्र में हो
  4. योग — सूर्य और चंद्रमा की स्थिति का योग
  5. करण — तिथि का आधा भाग

मुहूर्त निकालते समय इन्हीं पाँचों को देखा जाता है। अगर इनमें से ज़्यादातर अनुकूल हों, तो वह समय काफी शुभ माना जाता है।

तिथि कैसे काम करती है

चंद्र कैलेंडर के अनुसार एक महीने में 30 तिथियाँ होती हैं। 15 शुक्ल पक्ष की और 15 कृष्ण पक्ष की।

कुछ तिथियाँ पारंपरिक रूप से शुभ मानी जाती हैं, जैसे द्वितीया, तृतीया, पंचमी, सप्तमी, दशमी, एकादशी, त्रयोदशी।

कुछ तिथियाँ जैसे चतुर्थी, अष्टमी, नवमी, चतुर्दशी और अमावस्या को कई कामों के लिए अनुकूल नहीं माना जाता।

अलग-अलग परंपराओं और क्षेत्रों में इसमें थोड़ा अंतर हो सकता है। अलग-अलग क्षेत्रों और परंपराओं में थोड़ा फर्क हो सकता है।

वार का असर मुहूर्त पर

सात दिनों में से हर दिन किसी ग्रह से जुड़ा माना जाता है:

वार ग्रह एवं कार्य
सोमवार चंद्रमा — शांति के कार्य
मंगलवार मंगल — साहस के कार्य
बुधवार बुध — व्यापार के कार्य
गुरुवार बृहस्पति — शिक्षा और विवाह

शुक्रवार से रविवार

वार ग्रह एवं कार्य
शुक्रवार शुक्र — सौंदर्य और प्रेम
शनिवार शनि — मेहनत के कार्य
रविवार सूर्य — नेतृत्व के कार्य

गुरुवार और बुधवार को आमतौर पर नए काम शुरू करने के लिए काफी अनुकूल माना जाता है।

मंगलवार और शनिवार को कुछ कार्यों के लिए सावधानी बरतने की बात कही जाती है, हालाँकि यह पूरी तरह काम के प्रकार पर भी निर्भर करता है।

नक्षत्र की भूमिका

आकाश में 27 नक्षत्र होते हैं। चंद्रमा हर दिन एक नक्षत्र में रहता है। मुहूर्त निकालते समय यह देखा जाता है कि चंद्रमा किस नक्षत्र में है।

कुछ नक्षत्र जैसे रोहिणी, मृगशिरा, हस्त, चित्रा, स्वाति, अनुराधा, श्रवण, धनिष्ठा और रेवती को विभिन्न शुभ कार्यों के लिए पारंपरिक रूप से अनुकूल माना जाता है।

वहीं कुछ नक्षत्र जैसे ज्येष्ठा, मूल, आर्द्रा और अश्लेषा को कुछ खास कार्यों के लिए उपयुक्त नहीं माना जाता।

चौघड़िया क्या होता है और इसे कैसे देखें

चौघड़िया क्या होता है और इसे कैसे देखें

चौघड़िया मुहूर्त जाँचने का एक सरल और व्यावहारिक तरीका है। खासकर जब किसी के पास पूरा पंचांग देखने का समय न हो।

दिन और रात को 8-8 भागों में बाँटा जाता है। हर भाग करीब डेढ़ घंटे का होता है। हर भाग का एक नाम होता है जो उसकी प्रकृति बताता है।

 चौघड़िया के नाम और उनका स्वभाव

चौघड़िया स्वभाव
अमृत काफी शुभ माना जाता है
शुभ शुभ कार्यों के लिए उचित
लाभ व्यापार के लिए अनुकूल
चर यात्रा के लिए माना जाता है

जिन्हें टालना बेहतर माना जाता है

चौघड़िया स्वभाव
काल अशुभ माना जाता है
रोग टाला जाता है प्रायः
उद्वेग बड़े कार्यों के लिए नहीं

चौघड़िया निकालने के लिए पहले सूर्योदय का समय देखें। उसके बाद दिन के घंटों को 8 से भाग दें।

हर वार के लिए पहला चौघड़िया तय होता है और उसी क्रम में आगे बढ़ता है।

राहुकाल — इसे क्यों टाला जाता है

राहुकाल हर दिन डेढ़ घंटे का एक समय होता है जो राहु ग्रह से जुड़ा माना जाता है।

पारंपरिक मान्यताओं में इस दौरान नए काम शुरू करना उचित नहीं माना जाता।

हर वार का राहुकाल अलग होता है:

 वार के अनुसार राहुकाल (सूर्योदय 6 बजे मानकर)

वार राहुकाल
सोमवार सुबह 7:30 – 9:00
मंगलवार दोपहर 3:00 – 4:30
बुधवार दोपहर 12:00 – 1:30
गुरुवार दोपहर 1:30 – 3:00

शुक्रवार से रविवार

वार राहुकाल
शुक्रवार सुबह 10:30 – 12:00
शनिवार सुबह 9:00 – 10:30
रविवार शाम 4:30 – 6:00

ध्यान रखें कि ये समय अनुमानित हैं और सूर्योदय के समय के अनुसार बदलते हैं।

अपने शहर के सटीक समय के लिए स्थानीय पंचांग या किसी विश्वसनीय पंचांग वेबसाइट से जाँच करें।

योग और करण थोड़ा और गहरा जाएँ

पंचांग के पाँचवें और चौथे अंगों को अक्सर लोग अनदेखा कर देते हैं।

योग 27 होते हैं। कुछ जैसे सिद्ध योग, अमृत योग और शिव योग को काफी अनुकूल माना जाता है। वहीं विष्कुंभ, व्याघात, वज्र जैसे योग में सावधानी बरती जाती है।

करण तिथि का आधा हिस्सा होता है। एक दिन में दो करण होते हैं। बव, बालव, कौलव, तैतिल, गर, वणिज और विष्टि — ये सात चर करण हैं। विष्टि करण को भद्रा भी कहते हैं और इसमें महत्वपूर्ण काम टाले जाते हैं।

अभिजित मुहूर्त सबसे आसान और खास

अगर आपके पास पंचांग नहीं है और आप जल्दी में हैं, तो अभिजित मुहूर्त एक व्यावहारिक विकल्प माना जाता है।

यह दोपहर के समय होता है, ठीक मध्याह्न के आसपास। आमतौर पर दोपहर 11:45 से 12:45 के बीच का समय इसके अंतर्गत आता है, हालाँकि यह मौसम और स्थान के अनुसार थोड़ा बदल सकता है।

कई मान्यताओं में इस मुहूर्त को किसी भी शुभ काम के लिए उपयुक्त माना जाता है,

जब अन्य पंचांग योग पूरी तरह अनुकूल न हों, तब भी कई लोग इसे उपयोगी मानते हैं।

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कार्य के अनुसार मुहूर्त अलग होता है

यह एक ज़रूरी बात है जो बहुत कम लोग जानते हैं। हर काम के लिए मुहूर्त की प्राथमिकताएँ अलग होती हैं।

विवाह मुहूर्त के लिए लग्न, तिथि, नक्षत्र और वार सभी देखे जाते हैं। गुरु और शुक्र का अस्त होना इसमें बाधक माना जाता है।

गृहप्रवेश के लिए सूर्य की स्थिति, शुभ तिथि और नक्षत्र देखे जाते हैं। उत्तरायण काल यानी मकर संक्रांति से आषाढ़ के बीच का समय काफी उचित माना जाता है।

नामकरण संस्कार के लिए बच्चे के जन्म के 11वें या 12वें दिन का समय पंचांग से देखा जाता है।

नई दुकान या व्यापार शुरू करने के लिए बुधवार, गुरुवार, शुक्रवार को अनुकूल माना जाता है और लाभ या अमृत चौघड़िया देखा जाता है।

खुद मुहूर्त निकालने का व्यावहारिक तरीका

खुद मुहूर्त निकालने का व्यावहारिक तरीका

अगर आप किसी बड़े काम के लिए खुद मुहूर्त निकालना चाहते हैं, तो यह सरल क्रम अपनाएँ:

पहले वार देखें। गुरुवार, बुधवार या शुक्रवार से शुरुआत करें।

फिर तिथि जाँचें। शुक्ल पक्ष की द्वितीया, तृतीया, पंचमी, सप्तमी जैसी तिथियाँ अनुकूल मानी जाती हैं।

फिर नक्षत्र देखें। रोहिणी, हस्त, अनुराधा, श्रवण अच्छे माने जाते हैं।

राहुकाल से बचें। उस दिन का राहुकाल देखें और उसमें काम न शुरू करें।

चौघड़िया से समय चुनें। अमृत, शुभ या लाभ चौघड़िया में काम शुरू करें।

अगर इनमें से कई बातें अनुकूल हों, तो कई लोग उस समय को उपयुक्त मानते हैं।

पंचांग कहाँ से देखें

आजकल पंचांग देखना बहुत आसान हो गया है।

आप  drikpanchang.com  जैसी विश्वसनीय वेबसाइट पर जाकर अपने शहर का दैनिक पंचांग देख सकते हैं। यह वेबसाइट तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहुकाल और चौघड़िया सब एक जगह दिखाती है।

इसके अलावा बहुत से मोबाइल ऐप भी उपलब्ध हैं। लेकिन किसी बड़े संस्कार जैसे विवाह या गृहप्रवेश के लिए किसी अनुभवी ज्योतिषी या पंडित से भी राय लेना एक समझदारी भरा कदम है। क्योंकि वे कुंडली और स्थानीय परंपराओं को भी ध्यान में रखते हैं।

एक ज़रूरी बात जो हमेशा याद रखें

मुहूर्त एक सहयोगी होता है, बाधा नहीं। कई बार लोग इतने अटक जाते हैं मुहूर्त ढूँढने में कि ज़रूरी काम टलता रहता है।

अगर किसी आपातकाल में काम करना पड़े, या परिस्थितियाँ हाथ में न हों, तो भी जीवन रुकता नहीं।

मुहूर्त का मकसद मन में सकारात्मक सोच और तैयारी बनाए रखना है।

यह एक सांस्कृतिक परंपरा है जो पीढ़ियों से चली आ रही है और कई लोग इसे मन की शांति के लिए उपयोगी मानते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

शुभ मुहूर्त और अच्छा समय में क्या फर्क है?

अच्छा समय आमतौर पर व्यावहारिक सुविधा के आधार पर तय होता है। शुभ मुहूर्त पंचांग के पाँच अंगों यानी तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण को देखकर तय किया जाता है। यह एक पारंपरिक पद्धति है जिसे कई लोग सांस्कृतिक और आध्यात्मिक दृष्टि से उपयोगी मानते हैं।

क्या बिना पंडित के खुद मुहूर्त निकाल सकते हैं?

हाँ, छोटे कामों के लिए जैसे नई चीज़ खरीदना, यात्रा शुरू करना या कोई नया काम शुरू करना, आप चौघड़िया और राहुकाल देखकर खुद मुहूर्त तय कर सकते हैं। विवाह, गृहप्रवेश जैसे बड़े संस्कारों के लिए किसी जानकार से राय लेना ज़्यादा उचित रहता है।

राहुकाल में क्या बिल्कुल काम नहीं करना चाहिए?

पारंपरिक मान्यताओं में राहुकाल के दौरान नए काम शुरू करने से बचा जाता है। लेकिन पहले से चल रहे काम जारी रखना, रोज़मर्रा की गतिविधियाँ, और आपातकालीन स्थितियाँ इसके दायरे में नहीं आतीं।

अभिजित मुहूर्त कब होता है और क्या यह हमेशा उपलब्ध होता है?

अभिजित मुहूर्त आमतौर पर दोपहर के मध्य में होता है, लगभग 11:45 से 12:45 के बीच। बुधवार को यह विशेष रूप से काफी शुभ माना जाता है। बुधवार को दोपहर के इस समय में किए गए कार्यों को कई मान्यताओं में अनुकूल माना जाता है।

क्या सभी धर्मों में मुहूर्त की परंपरा होती है?

भारत में हिंदू परंपरा में मुहूर्त की अवधारणा सबसे विस्तृत है। जैन परंपरा में भी शुभ समय का विचार किया जाता है, हालाँकि उसकी पद्धति अलग होती है। इस्लाम और ईसाई धर्म में इस तरह की ज्योतिषीय समय-गणना की परंपरा प्रचलित नहीं है।

महत्वपूर्ण सूचना

यह लेख केवल सामान्य जानकारी, सांस्कृतिक समझ और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए लिखा गया है।

इसमें दी गई मुहूर्त, पंचांग, चौघड़िया, राहुकाल और नक्षत्र से जुड़ी जानकारी पारंपरिक मान्यताओं, सांस्कृतिक परंपराओं और व्यक्तिगत आस्था पर आधारित है। इसे किसी धर्म विशेष का प्रचार या  इसे पारंपरिक और सांस्कृतिक जानकारी के रूप में देखा जाना चाहिए।

यहाँ दी गई कोई भी जानकारी किसी भी व्यक्तिगत, आर्थिक, कानूनी, चिकित्सीय या जीवन से जुड़े बड़े फैसले का आधार नहीं बननी चाहिए। किसी भी महत्वपूर्ण निर्णय के लिए अपने विवेक का उपयोग करें और ज़रूरत हो तो किसी योग्य विशेषज्ञ या अनुभवी ज्योतिषी से व्यक्तिगत राय लें।

हर व्यक्ति की परिस्थिति, स्थान और परंपरा अलग होती है। इसलिए यहाँ दी गई जानकारी को एक सामान्य संदर्भ की तरह देखें।

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Shiv Kumar Pandit

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मैं, शिव कुमार पंडित, इस प्लेटफ़ॉर्म का Co-Founder और वरिष्ठ कंटेंट रिसर्चर हूं। मुझे भारतीय संस्कृति, शुभ मुहूर्त, चोघड़िया, पंचांग और पारंपरिक ज्ञान से जुड़े विषयों पर रिसर्च करना और सरल भाषा में जानकारी साझा करना पसंद है, ताकि हर पाठक आसानी से सही जानकारी समझ सके।

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